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Supreme Court on Delhi Water Crisis Yamuna River Board | दिल्ली जल संकट पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज: AAP की मांग- हरियाणा-UP को ज्यादा पानी छोड़ने कहें; SC ने इमरजेंसी मीटिंग का आदेश दिया था

Published:


नई दिल्ली11 मिनट पहले

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तस्वीर दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके की है, जहां पानी की कमी वाले टैंकरों के जरिए पूरी की जा रही है।  - दैनिक भास्कर

तस्वीर दिल्ली के चाणक्यपुरी इलाके की है, जहां पानी की कमी के चलते पूरी तरह से पानी भरा जा रहा है।

दिल्ली में जल संकट के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। दिल्ली की आप सरकार की ओर से पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा को एक महीने तक एक्स्ट्रा पानी छोड़ने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 3 जून को सुनवाई की थी। जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की वेकेशन बेंच ने 5 जून को इमरजेंसी कवर अप के निर्देश दिए थे।

यमुना नदी बोर्ड में अलग-अलग राज्य और केंद्र के अधिकारियों को समस्या के समाधान पर चर्चा करने के निर्देश दिए गए थे। पूरे राज्य-केंद्र द्वारा पारित प्रस्ताव को आज ही कोर्ट में रखा जाएगा।

पिछली खबरें की मुख्य बातें
पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि दिल्ली में पानी की बर्बादी लगातार हो रही है। यहां टैंकर माफिया भी है। कई जगहों पर पानी लीक भी होता है। इसे बढ़ाकर भी फोकस करना चाहिए।

इस पर दिल्ली सरकार का पक्ष रख रहे वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा- अपर यमुना रिवर बोर्ड एक साल से संकट को लेकर कोई समाधान नहीं निकाल रहा है। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कोर्ट को बताया कि यमुना रिवर बोर्ड सभी राज्यों के संपर्क में है।

सिंघवी ने कहा कि भीषण गर्मी और हीटवेव का दौर चल रहा है। जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति खराब हो सकती है। इसके बाद बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई 6 जून (यानी आज) को करेंगे।

दिल्ली में जल संकट क्यों हुआ
दिल्ली में जल संकट के दो कारण हैं- गर्मी और पड़ोसी राज्यों पर निर्भरता। दिल्ली के पास अपना कोई जल स्रोत नहीं है। यह पानी के लिए पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार इस वर्ष दिल्ली को हर दिन 32.1 करोड़ गैलन प्रति दिन पानी की कमी से जूझना पड़ रहा है।

दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार राज्य को प्रतिदिन 129 करोड़ गैलन पानी की जरूरत है। लेकिन गर्मियों में केवल 96.9 करोड़ गैलन प्रति दिन ही मांग पूरी हो रही है। यानी दिल्ली की 2.30 करोड़ आबादी को हर दिन 129 करोड़ गैलन पानी चाहिए, लेकिन उसे सिर्फ 96.9 करोड़ गैलन पानी ही मिल रहा है।

दिल्ली को पानी कहां से मिलता है?
दिल्ली में पानी की जरूरत हरियाणा सरकार यमुना नदी से, उत्तर प्रदेश सरकार गंगा नदी से और पंजाब सरकार भाखड़ा नांगल से मिले पानी से पूरी करती है। 2023 की एक रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में हर दिन यमुना से 38.9 करोड़ गैलन, गंगा नदी से 25.3 करोड़ गैलन और भाखड़ा-नांगल से रावी-व्यास नदी से 22.1 करोड़ गैलन पानी मिलेगा।

इसके अलावा कुँए, ट्यूबवेल और ग्राउंड वाटर से 9 करोड़ गैलन पानी आता था। यानी दिल्ली को हर दिन 95.3 करोड़ गैलन पानी मिलता था। 2024 के लिए यह आंकड़ा 96.9 करोड़ गैलन हो गया है।

जेल जाने से पहले केजरीवाल ने भी अपील की थी
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने सरेंडर करने से पहले पानी की कमी से जूझ रही दिल्ली की जनता के लिए भारतीय जनता पार्टी से अपील की थी। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि भाजपा हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अपनी किस्मत आजमाने के लिए दिल्ली को एक महीने के लिए पानी देने के लिए कहेगी।

सीएम केजरीवाल ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा था कि भीषण गर्मी में पानी की मांग काफी बढ़ गई है। जो पानी दिल्ली को पड़ोसी राज्यों से मिला था, उसमें भी कमी कर दी गई है। यानी पूरा काम हो गया है। हम सब मिलकर इसकी क्षतिपूर्ति करना है। मैं देख रहा हूँ कि भगवान शिव के साथी हमारे खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे समस्या का समाधान नहीं निकलेगा।

पोस्ट में आगे केजरीवाल ने लिखा था- यदि बीजेपी हरियाणा और यूपी की अपनी खास लोगों से बात करके एक महीने के लिए दिल्ली को कुछ पानी दिलवा दे तो दिल्ली वाले बीजेपी के इस कदम की खूब सराहना करेंगे। इतनी भीषण गर्मी किसी के हाथ की बात नहीं, लेकिन हम सब मिलकर काम करें तो लोगों को इससे राहत तो दिलवा सकते हैं।

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