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- सुप्रीम कोर्ट के नए आपराधिक कानूनों की सुनवाई का विवरण अपडेट | भारतीय दंड संहिता
नई दिल्ली1 घंटा पहले
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तीन नए क्रिमिनल कानून 1 जुलाई 2024 से लागू होंगे। सरकार ने 24 फरवरी 2024 को इससे जुड़ी अधिसूचना जारी की थी। (फ़ॉलो फोटो)
सुप्रीम कोर्ट में कल 3 नए आपराधिक कानून को लेकर सुनवाई है। सुप्रीम कोर्ट की वैकेंसी बेंच में जस्टिस बेला एम वकील और जस्टिस पंकज मिथल केस की सुनवाई कर सकते हैं। सरकार ने बताया है कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में सुधार के बाद ये तीन कानून बने।
तीर्थस्थल को लेकर याचिका दायर करने वाले वकील विशाल तिवारी ने मूर्ति की स्थापना की है। इसमें कहा गया है कि ये त्रिविध विधेयक संसद में बिना बहस के नीचे दिया गया है। साथ ही उस समय अधिकांश निरपेक्ष परमाणु थे।
21 दिसंबर 2023 को तीन बिलों में भारतीय न्याय (दूसा) संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा (दूसा) संहिता और भारतीय प्रमाण (दूसा) संहिता बिल पास किए गए। 25 दिसंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इन बिलों पर दस्तखत किये थे।
एक जुलाई से लागू होगा 3 नया क्रिमिनल लॉ
तीन नए क्रिमिनल कानून 1 जुलाई 2024 से लागू होंगे। सरकार ने 24 फरवरी 2024 को इससे जुड़ी अधिसूचना जारी की थी। यानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की जगह भारतीय न्याय संहिता, क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (सीआरपीसी) की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और एविडेंस एक्ट की जगह भारतीय दंड संहिता लागू होगी।
नए कानून के लागू होने के बाद जो धाराएं अपराध की पहचान बन गईं, उनमें भी बदलाव होंगे। जैसे हत्या के लिए जाने वाली आईपीसी की धारा 302 अब धारा 101 कहलाएगी। आदिवासियों के लिए धारा 420 अब धारा 316 होगी। हत्या के प्रयास के लिए जाने वाली धारा 307 अब धारा 109 कहलाएगी। वहीं, अब धारा 376 अब धारा 63 होगी।
हालाँकि, हिट एंड रन केस का संबंधित प्रोविजन तुरंत लागू नहीं होगा। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने जनवरी में कहा था कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) को लागू करने का निर्णय अखिल भारतीय मोटर वाहन कांग्रेस (एआईएमटीसी) से बाद में लिया जाएगा।

हिट एंड रन केस का प्रोविजन क्या था?
ट्रक स्केल ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) के प्रोविजन का विरोध किया था। साथ ही पूरे देश में इसके खिलाफ प्रदर्शन करते हुए हड़ताल की थी। इस धारा में यह प्रावधान है कि यदि किसी ड्राइवर की तेज रफ्तार ड्राइविंग से कोई राहगीर की मृत्यु हो जाती है। और ड्राइवर के बिना पुलिस में रिपोर्ट किया गया भाग है, तो यह अपराध गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आता है। साथ ही अनाथ ड्राइवर को 10 साल की कैद और 7 लाख रु. की सजा होगी।
30 दिसंबर 2023 को ट्रक चैलेंजर्स और चैलेंजर्स ने जयपुर, नोएडा, आगरा एक्सप्रेसवे सहित कई राजमार्गों पर हिट एंड रन लॉ के प्रोजेक्शन का विरोध शुरू किया था। जो 2 जनवरी को AIMTC से चर्चा के बाद खत्म हो गई थी।
सशस्त्र विद्रोह और देश की संपत्ति को नुकसान पर जेल
बिल पेश करने वाले ने दिसंबर में कहा था कि विपक्ष ने राजद्रोह कानून बनाया, जिसमें तिलक, गांधी, पटेल समेत देश के कई लड़ाकों को कई बार 6-6 साल जेल में रखा गया। वह अब तक वकालत कर रही हैं। राजद्रोह की जगह उसे स्थापित किया गया है, क्योंकि अब देश आज़ाद हो चुका है, लोकतांत्रिक देशों में सरकार की आलोचना कोई भी नहीं कर सकता है।
शाह ने कहा- अगर किसी देश की सुरक्षा के खिलाफ, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाएगा, तो उसकी कार्रवाई होगी। यदि कोई सशस्त्र विरोध करता है, बम विद्रोह करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, उसे आजाद रहने का हक नहीं, उसे जेल जाना ही होगा। कुछ लोग इसे अपनी समझ के अनुसार कपड़े पहनने की कोशिश करेंगे, लेकिन मैंने जो कहा उसे अच्छी तरह से समझें। देश का विरोध करने वालों को जेल भेजा जाएगा।

बच्ची से रेप के दोषी को फाँसी की सज़ा
पहले रेप की धारा 375, 376 थी, अब जहां से अपराध की बात शुरू होती है, उसमें धारा 63, 69 भी शामिल है। ग्रुप को भी आगे रखा गया है। बच्चों के अपराध को भी सामने लाया गया है। मूल 302 था, अब 101 हुआ है। 18 साल से कम उम्र की बच्ची से रेप में शामिल होने और मौत की सजा का प्रस्ताव है। लड़की के दोषी को 20 साल तक की सजा या जिंदाबाद तक जेल।
3 मैक्सिकनों से क्या बदलाव हुए?
कई धाराएँ और प्रस्ताव बदले गए हैं। आईपीसी में 511 धाराएं थीं, अब 356 धाराएं हैं। 175 धाराएं बदली गईं। 8 नई जोड़ी बनी, 22 धाराएँ ख़त्म हो गईं। इसी तरह सीआरपीसी में 533 धाराएं लगती हैं। 160 धाराएँ बदली गईं, 9 नई जुड़ी हुई हैं, 9 नष्ट हो गईं। पूछताछ से लेकर सुनवाई तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से करने का प्रोविजन हो चुका है, जो पहले नहीं था।
सबसे बड़ा बदलाव ये है कि अब कोर्ट को हर फैसले में ज्यादातर 3 साल की सजा होगी। देश में 5 करोड़ केस पेंडिंग हैं। इनमें से 4.44 करोड़ केस ट्रायल कोर्ट में हैं। इसी प्रकार जिला जजों के 25,042 न्यायालयों में से 5,850 पद रिक्त हैं।
भारतीय न्याय संहिता में क्या बड़े बदलाव हुए..
- भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) में 20 नए अपराध जोड़े गए हैं।
- ऑर्गनाइज़ेशन क्राइम, हिट एंड रन, मॉब लिंचिंग पर सज़ा का प्रस्ताव।
- दस्तावेज़ में इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल रिकॉर्ड शामिल हैं।
- आईपीसी में मौजूद 19 दोस्तों को हटा दिया गया है।
- 33 अपराधी की सजा बढ़ा दी गई है।
- 83 दैवीय घटना में कैथोलिक की सजा को बढ़ाया गया है।
- छह अपराधियों में साइकल सेवा की सजा का प्रावधान किया गया है।
संसद से 146 विपक्ष थे
21 दिसंबर 2023 को तीन और कलाकारों को अलग कर दिया गया था। कांग्रेस से सांसद डी के सुरेश, नकुल नाथ और दीपक बजाज को निलंबित कर दिया गया। व्यापक तब संसद से कुल 146 न्यूनतम अब तक विपक्ष जा रहे थे। इनमें 112 विपक्ष और 34 साम्राज्य के थे।
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सीजेआई बोले- नए आपराधिक समाज के लिए ऐतिहासिक: ये तभी सफल होंगे, जब जिन पर लागू होने का मतलब है, वे अपनाएंगे

मुख्य न्यायाधीश डेवाई चंद्रचूड़ ने तीन नए आपराधिक कानूनों को ऐतिहासिक बताया। CJI ने ये भी कहा कि भारत अपने आपराधिक न्याय प्रणाली में अहम बदलाव के लिए तैयार है. ये बदलाव सफल होंगे, जब जिन पर लागू करने का मतलब है, वे अपनाएंगे। सीजेआई के मुताबिक, इन नए मुजरिमों ने आपराधिक न्याय के कानूनी मानक को एक नए युग में बदल दिया है। ये ऐतिहासिक उदाहरण हैं, क्योंकि कोई भी कानून अपराधी की जिंदगी को प्रभावित नहीं करता है। पूरी खबर पढ़ें…
