डोंगरगढ़ चंद्रगिरी तीर्थ क्षेत्र के दृश्य, भजन और भक्तों की भीड़
श्री दिगंबर जैन चंद्रगिरी अतिशय तीर्थ क्षेत्र में संत शिरोमणि 108 आचार्य श्री विद्यासागर महाराज का द्वितीय समाधि स्मृति महोत्सव भव्य रूप से मनाया गया।

आचार्य श्री समय सागर महाराज के आशीर्वाद से 108 मुनि श्री विराट सागर जी, 108 मुनि श्री निस्संग सागर जी, आर्यिकाओं श्री सिद्धांत मति माता जी, पुनीत मति माता जी, विनय मति माता जी के सान्निध्य में बाल ब्रह्मचारियों विनय भैया और चिद्रुप भैया के निर्देशन में कार्यक्रम संपन्न हुआ।
प्रातः 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, पूजा और छत्तीस मंडलीय आचार्य छत्तीसी विधान सानंद संपन्न हुआ। दोपहर 12 बजे भजन सम्राट रूपेश जैन के सुमधुर भजनों ने भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

दोपहर 2:30 बजे आचार्य श्री विद्यासागर संग्रहालय का भूमिपूजन केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया।
विशेष अतिथियों में छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, राजनंदगांव सांसद संतोष पांडेय, डोंगरगांव विधायक दलेश्वर साहू, भाजपा उपाध्यक्ष रामजी भारती, नगर पालिका अध्यक्ष रमन डोंगरे सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।
मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भावुक होकर कहा, “आज मैं मंत्री नहीं, अपने गुरु का भक्त बनकर आया हूँ। आचार्य श्री ने मृत्यु को महोत्सव बना दिया। उनके आशीर्वाद से गौशालाएँ, प्रतिभास्थली, हाथकरघा-हस्तशिल्प जैसे प्रकल्प चल रहे हैं।” उन्होंने जैन आचारों की सराहना करते हुए स्वदेशी संकल्प लिया, डॉक्टरों के पलायन रोकने और आचार्य श्री को भारत रत्न देने की घोषणा की।
108 मुनि श्री विराट सागर जी ने कहा, “आचार्य श्री अद्वितीय थे—न भूतो न भविष्यति। कर्नाटक के सदलगा में जन्मे, बचपन से साधु दर्शन पर मोहित हो आजीवन वाहन त्याग दिया। गुरु आचार्य ज्ञानसागर जी की आज्ञा से चतुर्विध संघ का विशाल साम्राज्य बनाया। कुंडलपुर से चंद्रगिरी तक उनके प्रकल्प जनकल्याण के वरदान हैं।”
तीर्थ क्षेत्र अध्यक्ष ने डोंगरगढ़, राजनंदगांव, दुर्ग, भिलाई, रायपुर समेत विभिन्न स्थानों से आए भक्तों का आभार माना। यह महोत्सव आचार्य श्री की सच्ची श्रद्धांजलि बना।
