Last Updated:
California Megaflood Risk: अमेरिका के कैलिफोर्निया पर एक ऐसी महाप्रलय का खतरा मंडरा रहा है, जिसे वैज्ञानिक ‘बिब्लिकल मेगाफ्लड’ कह रहे हैं. यानी ऐसी महाबाढ़ जिसका जिक्र बाइबिल में किया गया है. ‘ARkStorm 2.0’ नाम का यह संकट 30 दिनों तक चलने वाले तूफानों का एक सिलसिला है, जो पूरे राज्य को जलमग्न कर सकता है. ग्लोबल वार्मिंग की वजह से इसकी आशंका अब दोगुनी हो गई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का आर्थिक नुकसान और लाखों लोगों का विस्थापन हो सकता है. क्या दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था इस आसन्न विनाश से निपटने के लिए तैयार है?
कैलिफोर्निया, जिसे दुनिया ‘गोल्डन स्टेट’ के नाम से जानती है, आज एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है. लगभग 4 करोड़ की आबादी और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला यह राज्य तकनीकी नवाचार और मनोरंजन जगत का वैश्विक केंद्र है. लेकिन इस चमक-धमक और समृद्धि के नीचे एक प्राकृतिक आपदा का खौफनाक सच छिपा है. कैलिफोर्निया के लोग दशकों से भूकंप और जंगलों की आग यानी वाइल्डफायर से जूझने के आदी रहे हैं. अकेले साल 2025 में ही भीषण आग ने राज्य भर में 5 लाख एकड़ से अधिक जमीन को जलाकर राख कर दिया. इस त्रासदी में 31 लोगों की जान गई और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ. (File Photo : AP)

पिछले कुछ सालों में कैलिफोर्निया की आपदा प्रबंधन योजनाएं पूरी तरह से वाइल्डफायर और सूखे के इर्द-गिर्द घूमती रही हैं. इसका कारण भी वाजिब था, क्योंकि यह राज्य पिछले 25 सालों से लगातार सूखे की स्थिति में था. इसी साल जनवरी में पहली बार राज्य को सूखे से मुक्त घोषित किया गया है. लेकिन कैलिफोर्निया की प्रकृति हमेशा से चरम सीमाओं पर रही है. जहां एक तरफ भीषण सूखा और आग है, वहीं दूसरी तरफ मूसलाधार बारिश और विनाशकारी बाढ़ का इतिहास भी रहा है. साल 2023 में ही हमने देखा कि कैसे तूफानों और बाढ़ ने हजारों लोगों को बेघर कर दिया और बिजली सप्लाई ठप कर दी. लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तो बस एक छोटी सी झलक थी. असली खतरा तो ‘ARkStorm 2.0’ है, जो आने वाले समय में कैलिफोर्निया का नक्शा बदल सकता है. (File Photo : Reuters)

वैज्ञानिक अब एक ऐसे महातूफान की तैयारी कर रहे हैं, जो 30 दिनों तक लगातार तांडव मचा सकता है. यह मेगास्टॉर्म पिछले 200 सालों में देखे गए किसी भी संकट से कहीं अधिक बड़ा और विनाशकारी होगा. यूसीएलए के प्रसिद्ध क्लाइमेट साइंटिस्ट डॉ. डैनियल स्वेन, जिन्होंने इस खतरे पर गहन रिसर्च की है, उनका कहना है कि यह अब केवल एक संभावना नहीं बल्कि एक हकीकत है. ग्लोबल वार्मिंग ने इस ‘कब’ के सवाल को और भी करीब ला दिया है. यह तूफान इस साल भी आ सकता है या अगले कुछ दशकों में कभी भी, लेकिन जब यह आएगा, तो यह वैश्विक इतिहास की सबसे महंगी और घातक आपदा साबित होगा. (File Photo : Reuters)
Add News18 as
Preferred Source on Google

ARkStorm का तकनीकी अर्थ है ‘एटमॉस्फेरिक रिवर 1,000-ईयर स्टॉर्म’. यह एक काल्पनिक लेकिन वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह मुमकिन मेगास्टॉर्म सिनेरियो है. इसे समझने के लिए हमें सबसे पहले ‘एटमॉस्फेरिक रिवर्स’ को समझना होगा. ये वास्तव में आसमान में बहने वाली विशाल नदियां हैं, जो पानी की भाप के रूप में नमी को उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों से ध्रुवों की ओर ले जाती हैं. जब ये नमी से भरी हवाएं जमीन या ऊंचे पहाड़ों से टकराती हैं, तो यह भाप ठंडी होकर भारी बारिश या बर्फबारी के रूप में नीचे गिरती है. कैलिफोर्निया में इसे अक्सर ‘पाइनएप्पल एक्सप्रेस’ के नाम से भी जाना जाता है, जो हवाई के पास से नमी लेकर आती है. (File Photo : NOAA)

सामान्य परिस्थितियों में ये एटमॉस्फेरिक रिवर्स राज्य के लिए वरदान होती हैं क्योंकि ये कैलिफोर्निया की 50 परसेंट पानी की जरूरत को पूरा करती हैं. लेकिन संकट तब पैदा होता है जब ये सिस्टम एक जगह पर रुक जाते हैं या एक के बाद एक कई तूफान बहुत कम अंतराल पर आते हैं. ऐसी स्थिति में जमीन को पानी सोखने का समय नहीं मिलता और नदियां अपनी सीमाओं को तोड़कर शहरों में घुस जाती हैं. साल 2010 में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की एक टीम ने पहले ARkStorm परिदृश्य को विकसित किया था. (File Photo : Reuters)

यह मॉडल 1861-62 के ऐतिहासिक ‘ग्रेट फ्लड’ पर आधारित था. उस समय 45 दिनों तक चली लगातार बारिश ने सेंट्रल वैली को 300 मील लंबे एक अंतर्देशीय समुद्र में बदल दिया था. उस समय सड़कें और खेत सब गायब हो गए थे. आज के आधुनिक कैलिफोर्निया में अगर वैसा ही कुछ होता है, तो नुकसान की कल्पना करना भी डरावना है. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे होने वाला नुकसान 1 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगा, जो किसी भी भूकंप से होने वाले नुकसान से कहीं ज्यादा है. पानी की गहराई कई रिहाइशी इलाकों में 20 फीट तक पहुंच सकती है, जिससे करोड़ों लोग प्रभावित होंगे. (File Photo : Reuters)

जब वैज्ञानिकों ने 2022 में ARkStorm सिनेरियो का दोबारा विश्लेषण किया, तो उन्होंने इसमें क्लाइमेट चेंज यानी जलवायु परिवर्तन के फैक्टर को शामिल किया. इसके बाद जो परिणाम सामने आए, उन्हें डॉ. स्वेन ने ‘माइंड मेल्टिंग’ यानी दिमाग चकरा देने वाला बताया. क्लाइमेट चेंज बारिश की इन घटनाओं को मुख्य रूप से दो तरीकों से और ज्यादा खतरनाक बना रहा है. पहला है हवा की नमी सोखने की बढ़ती क्षमता. विज्ञान का सरल नियम है कि गर्म हवा ज्यादा नमी को अपने अंदर समाहित कर सकती है. हर एक डिग्री सेल्सियस तापमान बढ़ने पर वातावरण की नमी सोखने की क्षमता लगभग 7 परसेंट बढ़ जाती है. (File Photo : Reuters)

डॉ. स्वेन इसे ‘एक्सपांडिंग एटमॉस्फेरिक स्पंज इफेक्ट’ कहते हैं. आप एक किचन स्पंज की कल्पना करें जो तापमान बढ़ने के साथ-साथ बड़ा होता जा रहा है. यह स्पंज जमीन और समुद्र से बहुत ज्यादा पानी सोख सकता है. यही कारण है कि भविष्य में औसत बारिश शायद उतनी ही रहे, लेकिन जब वह गिरेगी, तो वह बहुत ज्यादा तीव्र और विनाशकारी होगी. जब आप एक पूरी तरह से भीगे हुए बड़े स्पंज को निचोड़ते हैं, तो पानी का सैलाब निकलता है. ठीक यही स्थिति हमारे वातावरण की होने वाली है. (File Photo : Reuters)

दूसरा महत्वपूर्ण कारण है ‘स्नोलाइन’ का ऊपर खिसकना. ऐतिहासिक रूप से कैलिफोर्निया के सिएरा नेवादा पहाड़ों पर सर्दियों में गिरने वाली अधिकांश नमी बर्फ के रूप में जम जाती थी. यह बर्फ प्राकृतिक रिजर्व का काम करती थी और बसंत के मौसम में धीरे-धीरे पिघलकर नदियों में पानी भेजती थी. लेकिन अब बढ़ते तापमान के कारण पहाड़ों पर बर्फ की जगह बारिश हो रही है. इससे भी बुरा यह है कि जब गर्म बारिश पहले से जमी बर्फ पर गिरती है, तो वह उसे बहुत तेजी से पिघला देती है. इसे ‘रेन-ऑन-स्नो’ इवेंट कहा जाता है. इससे सारा पानी एक साथ ढलान से नीचे आता है, जिससे नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है. इसे ही ‘डबल व्हैमी इफेक्ट’ कहा जा रहा है, जो बाढ़ के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है. (File Photo : Reuters)

ARkStorm 2.0 का प्रभाव पूरे राज्य में एक जैसा नहीं होगा. वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता ‘सेंट्रल वैली’ को लेकर है. यह इलाका कैलिफोर्निया का दिल है, जहां से पूरी दुनिया को फल और सब्जियां सप्लाई की जाती हैं. यह राज्य का कृषि केंद्र होने के साथ-साथ जल आपूर्ति प्रणाली की मुख्य धमनी भी है. यहां सिएरा नेवादा पहाड़ों से आने वाला पानी सैक्रामेंटो और सैन जोकिन नदी प्रणालियों में मिलता है. इस पूरे इलाके में हजारों मील लंबे बांध, नहरें और पंपिंग स्टेशन बनाए गए हैं ताकि खेती और शहरों को बाढ़ से बचाया जा सके. (File Photo : Reuters)

दिक्कत यह है कि यह सारा बुनियादी ढांचा पुराने क्लाइमेट के हिसाब से डिजाइन किया गया था. उस समय इंजीनियरों ने यह मानकर बांध बनाए थे कि सर्दियों में ज्यादातर पानी बर्फ के रूप में पहाड़ों पर जमा रहेगा. लेकिन अब बदले हुए हालात में सिएरा नेवादा के दक्षिणी हिस्सों में पानी का बहाव ऐतिहासिक स्तर से 200 से 400 परसेंट तक ज्यादा होने की उम्मीद है. डॉ. स्वेन कहते हैं कि सैन जोकिन वैली विशेष रूप से बहुत ज्यादा खतरे में है. यहां न केवल लाखों लोग रहते हैं, बल्कि दक्षिणी कैलिफोर्निया को पानी भेजने वाला पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर भी यहीं स्थित है. (File Photo : Reuters)

जब पानी का बहाव डिजाइन की गई सीमा से बाहर चला जाएगा, तो ये बांध और सुरक्षा दीवारें ताश के पत्तों की तरह ढह सकती हैं. कई इलाकों में पानी इतना ज्यादा और इतने लंबे समय तक रहेगा कि वहां पहुंचना भी नामुमकिन होगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य के इन तूफानों में पानी का जो स्तर होगा, उसका पिछले रिकॉर्ड्स से कोई मेल नहीं है. यह एक बिल्कुल नई और अभूतपूर्व चुनौती है जिसके लिए हमारी मौजूदा मशीनरी और इंजीनियरिंग तैयार नहीं है. (File Photo : Reuters)

किसी भी आपदा से बचने का सबसे पहला तरीका है उसे पहले से जान लेना. वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे एक ऐसी आपदा का मैप तैयार करें जो आधुनिक इतिहास में कभी नहीं हुई. इसके लिए ओक रिज नेशनल लेबोरेटरी के उन्नत फ्लड मॉडल्स का सहारा लिया जा रहा है. ये मॉडल्स यह दिखाने की कोशिश करते हैं कि अगर एक साथ कई बड़े तूफान आते हैं, तो पानी जमीन पर किस दिशा में बहेगा, कौन से बांध सबसे पहले टूटेंगे और कौन से शहर सबसे पहले डूबेंगे. (AI Photo)

कैलिफोर्निया के स्टेट क्लाइमेटोलॉजिस्ट माइकल एंडरसन के अनुसार, ये नक्शे प्रशासन के लिए सबसे महत्वपूर्ण हथियार साबित होंगे. इनकी मदद से ही यह तय किया जा सकेगा कि इमरजेंसी रिस्पॉन्स की टीमें कहां तैनात की जाएं और किन इलाकों को सबसे पहले खाली कराया जाए. इन नक्शों का पहला हिस्सा इसी साल शरद ऋतु तक आने की उम्मीद है. हालांकि, जब तक यह पूरा काम नहीं हो जाता, तब तक आपदा प्रबंधन से जुड़े लोग अंधेरे में तीर चलाने जैसा महसूस कर रहे हैं. उन्हें यह तो पता है कि खतरा बड़ा है, लेकिन वह खतरा ठीक किस मोहल्ले या किस हाईवे पर सबसे पहले टकराएगा, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी भी पूरी नहीं है. (File Photo : Reuters)

तैयारी के तौर पर कुछ ‘इमरजेंसी एक्सरसाइज’ या ‘वॉर गेम्स’ भी आयोजित किए गए हैं. साल 2013 और 2014 में ‘ARkStorm 1.0’ के आधार पर लेक ताहो क्षेत्र में एक बड़ी ड्रिल की गई थी. इसमें 300 से अधिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया था. उन्होंने चर्चा की कि अगर बिजली गुल हो जाए, सड़कें बंद हो जाएं और लैंडस्लाइड हो, तो संचार कैसे बना रहेगा. डॉ. क्रिस्टीन अल्बानो, जो डेजर्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट में प्रोफेसर हैं, कहती हैं कि ऐसी एक्सरसाइज से लोगों को पता चलता है कि मुश्किल घड़ी में किसे फोन करना है और संसाधनों को कैसे मैनेज करना है. 2017 की बाढ़ के दौरान इस अनुभव ने अधिकारियों की काफी मदद की थी. लेकिन अब चुनौती कहीं ज्यादा बड़ी है और इसके लिए नए सिरे से बड़े पैमाने पर अभ्यास की जरूरत है. (File Photo : Reuters)

बुनियादी ढांचे की बात करें तो कैलिफोर्निया के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती खड़ी है. राज्य का मुख्य बचाव तंत्र ‘सेंट्रल वैली फ्लड प्रोटेक्शन प्लान’ (CVFPP) है. यह योजना बांधों को मजबूत करने, नदियों के किनारों को चौड़ा करने और बाढ़ के मैदानों को बहाल करने पर केंद्रित है. 2005 में न्यू ऑरलियन्स में कैटरीना तूफान की तबाही ने कैलिफोर्निया को अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने पर मजबूर किया था. तब पता चला था कि दशकों से मेंटेनेंस न होने की वजह से सुरक्षा घेरे काफी कमजोर हो चुके हैं. (File Photo : Reuters)

इसके बाद 2012 में एक औपचारिक योजना बनाई गई, जिसे 2022 में फिर से अपडेट किया गया. इस पूरे काम पर अगले 30 सालों में 30 बिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है. हालांकि यह सुनने में बहुत बड़ी रकम लगती है, लेकिन अगर हम इसे ARkStorm से होने वाले 1 ट्रिलियन डॉलर के संभावित नुकसान के सामने रखें, तो यह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. समस्या सिर्फ पैसे की नहीं है, बल्कि समय की भी है. एक बांध या सुरक्षा दीवार बनाने में 10 साल से ज्यादा का समय लग जाता है, जबकि मेगास्टॉर्म किसी भी अगली सर्दियों में दस्तक दे सकता है. (File Photo : Reuters)

कैलिफोर्निया ने 2017 में ओरोविले डैम हादसे के रूप में एक छोटी सी चेतावनी देखी थी. राज्य के दूसरे सबसे बड़े जलाशय के स्पिलवे में दरार आ गई थी, जिसके कारण 2 लाख लोगों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा. हालांकि उस समस्या को ठीक कर लिया गया है, लेकिन डॉ. स्वेन चेतावनी देते हैं कि राज्य में ऐसे कई पुराने ढांचे हैं जो अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं. महाप्रलय की स्थिति में बांध शायद बाद में टूटें, लेकिन जो तटबंध (Levees) शहरों की रक्षा करते हैं, वे सबसे पहले हार मान सकते हैं. भविष्य में शहरों को बचाने के लिए शायद प्रशासन को यह कठिन फैसला लेना पड़े कि वे कुछ कृषि क्षेत्रों या पार्कों को जानबूझकर डुबो दें ताकि घनी आबादी वाले इलाकों को सुरक्षित रखा जा सके. (File Photo : Reuters)

इस पूरे संकट में सबसे परेशान करने वाली बात यह है कि हमारे पास एक सटीक टाइमलाइन नहीं है. सांख्यिकी के हिसाब से देखें तो यह मेगास्टॉर्म इस साल भी आ सकता है या अगले 70 सालों तक हम इससे बचे रह सकते हैं. यह पूरी तरह से किस्मत का खेल बन गया है. डॉ. स्वेन कहते हैं कि ARkStorm 2.0 कोई दूर की कौड़ी नहीं है, बल्कि यह एक बहुत ही वास्तविक भविष्य की झलक है. एक ऐसा भविष्य जहां कैलिफोर्निया को सिर्फ पानी की कमी से नहीं, बल्कि एक साथ बहुत ज्यादा पानी आने के खतरे से भी निपटना होगा. (File Photo : Reuters)

क्या कैलिफोर्निया तैयार है? इस सवाल का जवाब अभी भी ‘नहीं’ में ज्यादा झुकता हुआ दिखता है. तैयारी के प्रयास जरूर हो रहे हैं, लेकिन वे उस गति से नहीं हैं जिस गति से जलवायु परिवर्तन अपना असर दिखा रहा है. वैज्ञानिकों का तर्क है कि जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति और दीर्घकालिक फंडिंग सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक हम सिर्फ आपदा के बाद मलबे को साफ करने की ही तैयारी कर पाएंगे, उसे रोकने की नहीं. (File Photo : Reuters)

बाढ़ की आपदाओं के साथ एक छोटा सा प्लस पॉइंट यह है कि भूकंप के विपरीत, इन्हें कुछ दिन पहले देखा जा सकता है. आधुनिक फोरकास्टिंग तकनीक हमें यह बता सकती है कि कोई बड़ा तूफान तट की ओर बढ़ रहा है. लेकिन अगर उस सूचना पर समय रहते कार्रवाई करने का ढांचा मौजूद नहीं है, तो वह सूचना भी बेकार साबित होगी. कैलिफोर्निया के लोगों को अब भूकंप की तरह ही बाढ़ की महाप्रलय के लिए भी मानसिक रूप से तैयार रहना होगा. (File Photo : Reuters)

अंत में, सबसे बड़ी लड़ाई जागरूकता और स्वीकार्यता की है. लोग अक्सर उन आपदाओं को भूल जाते हैं जो उनके जीवनकाल में नहीं हुई हैं. 1861 की बाढ़ अब सिर्फ इतिहास की किताबों का हिस्सा है, लेकिन प्रकृति के लिए वह केवल कल की बात है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक जनता और सरकारें इस खतरे की गंभीरता को नहीं समझेंगे, तब तक सुरक्षा के लिए जरूरी निवेश करना मुश्किल होगा. (File Photo : Reuters)

डॉ. क्रिस्टीन अल्बानो के मुताबिक, हमारे जलाशय और ड्रेनेज सिस्टम उन तूफानों के लिए नहीं बने हैं जो अब अधिक गर्म और लंबे समय तक चलने वाले हो रहे हैं. हमें अपने पूरे शहरी नियोजन और इंफ्रास्ट्रक्चर की फिलॉसफी को बदलना होगा. अगर हम सिएरा नेवादा की चोटियों से आने वाले इस संभावित सैलाब के लिए खुद को आज तैयार नहीं करते, तो कल हमारे पास पछताने का भी समय नहीं बचेगा. (File Photo : Reuters)





