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नेशनल स्टार्टअप रिसर्च एंड ट्रेनिंग काउंसिल (एनसीईआरटी) ने 10 मार्च को 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में चैप्टर ‘ज्यूडिशरी करप्शन’ को रिलीज कर माफ कर दिया है। इस पुस्तक पर विवाद के बाद इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई थी।
एनसीईआरटी ने उत्तरोत्तर छूट की प्रेस विज्ञप्ति जारी की
एनसीईआरटी ने अपनी लॉटरी प्रेस विज्ञप्ति में कहा- एनसीईआरटी का मानना है कि ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंडियॉन्ड – ग्रेड 8 (भाग II)’ पुस्तक में” हमारे समाज में प्रमाण की भूमिका नाम से अध्याय IV शामिल है।
काउंसिल को इस अध्याय के प्रकाशन पर खेद है और हम बिना शर्त इसके लिए माफ़ी मांगते हैं।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद [NCERT] ने हाल ही में एक सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक, “एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड,” ग्रेड 8 (भाग II) प्रकाशित की है, जिसमें अध्याय IV का शीर्षक “द रोल ऑफ़…” शामिल है। pic.twitter.com/mZY15aJTDo– एनसीईआरटी (@ncert) 10 मार्च 2026

इस प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया गया कि तुरंत ही साड़ी कार वापस ले ली गई थी।
कोर्ट सुप्रीमो ने पत्थरबाज़ी की थाली बजाई
25 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की ओर से ‘ज्यूडिशियल करप्शन’ चैप्टर वाली किताब की एनसीईआरटी की किताब की बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। एनसीईआरटी के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की थी।
मानक के अनुसार, एनसीईआरटी ने अध्याय की सिफारिश वाले अनुदेश और इसे मंजूरी दे दी है वाले अधिकारियों की शैक्षिक प्रयोगशालाएं शामिल हैं। किताब को वेबसाइट से भी हटा लिया गया है। सीनियर वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट में यह मामला उठाया था।
सुनवाई के दौरान सिब्बल ने सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस विपुल एम पंचोली और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच को बताया कि कक्षा 8 के बच्चों को दोषियों के बारे में बताया जा रहा है। यह निन्दनीय है। सिंघवी ने कहा कि एनसीईआरटी ने राजनीति, ब्यूरोक्रेसी और अन्य छात्रों को इसमें शामिल नहीं माना है।
इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- दुनिया में किसी को भी दुष्कर्म की सजा नहीं दी जाएगी. यह एक सोची-समझी और गहरी विचारधारा है। मुझे यह कैसे पता है। मैं यह केस खुद संभाल लूंगा। हम इसके बारे में और कुछ नहीं कहना चाहते हैं।

सरकारी आधिकारिक ने कहा- शासन के तृतीय प्रयोगों को शामिल किया जाना चाहिए
एनसीईआरटी ने इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया। काउंसिल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मामले पर अब कोर्ट में विचार किया जा रहा है। इसलिए वे इस मुद्दे पर कुछ भी नहीं बोलेंगे।
इस बीच सरकारी मंजूरी ने कहा कि भले ही एनसीईआरटी एक ऑटोनॉमस संस्था है, लेकिन अध्याय जुड़ने से पहले अधिकारियों का ध्यान रखना चाहिए। सरकारी अधिकारियों ने कहा कि अगर गरीबों की संपत्ति शामिल होनी चाहिए, तो इसमें शासन के क्षेत्र- कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका को भी शामिल किया जाना चाहिए।
सरकारी दस्तावेज़ में कहा गया है कि फैक्ट्स के क्रॉस वेर असेम्बली के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया।
एनसीईआरटी की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में अध्याय था
एनसीईआरटी ने 23 फरवरी को कक्षा 8 के विद्यार्थियों के लिए सोशल साइंस की नई टेक मदरसाबुक रिलीज की थी। यह किताब एकेडमिक सत्र 2026-27 से विद्यार्थियों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज हुआ था।
किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘डी रोल ऑफ द ज्यूडिशियरी इन डायरेक्टर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘द रोल ऑफ द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया है।
इसमें कहा गया है कि बड़ी संख्या में लंबित मामले और जजों की भारी कमी के साथ ज्यूडिशियल सिस्टम के प्रमुख खुलासे शामिल हैं। न्यायाधीश आचार संहिता से धारक होते हैं, जो न केवल अदालत में अपने व्यवहार को नियंत्रित करते हैं, बल्कि कोर्च के बाहर भी अपने आचरण को नियंत्रित करते हैं।
पुस्तक का एक सिद्धांत ‘न्याय में देरी, न्याय न मिलने के बराबर है।’ इसका मतलब यह है- जैसा है वैसा ही है। यहां सुप्रीम कोर्ट में 81 हजार, जजों में 62 लाख 40 हजार, सोमनाथ और सबऑर्डिनेट कोर्ट में 4 करोड़ 70 लाख लंबित केसों की संख्या भी बताई गई है।
पुस्तक का वो भाग जिसमें करप्शन और लंबित केस का ज़िक्र शामिल है…

नई किताब में ज्यूडीशियरी से जुड़े अहम बिंदु…
- कोर्ट की हैरार्की और जस्टिस तक पहुंच को फिल्मों से लेकर ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली कहानी जैसे कि करप्शन और केस बैकलॉग को दिखाया गया है।
- करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ डॉक्टर होते हैं जो सिर्फ कोर्ट में नहीं बल्कि कोर्ट के बाहर भी अपने व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
- ज्यूडिशियरी की बेहतर दक्षता प्रणाली का भी अवलोकन किया गया है। सेंट्रल डिजिटल जर्नलिस्ट्स रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से बैंकिंग लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
- किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 से ज्यादा की कमाई हुई।
- पुस्तक में गंभीर मामलों में जजों के संवैधानिक नियमों को हटाने के बारे में यह भी बताया गया है कि संसद भवन के पास मौजूद संवैधानिक नियमों को जजों द्वारा हटाया जा सकता है।
- पढ़ें कि ऐसे प्रस्ताव पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
- अध्याय में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग स्तर पर कार्पशन का सामना करते हैं। गरीबों और धार्मिकों की न्याय तक पहुँच की समस्या और समस्याएँ हो सकती हैं।
- इसमें यह भी बताया गया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है और करप्शन के मामलों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाती है।
किताब में पूर्व सीजेआई बी आर गवई का भी ज़िक्र
भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई की किताब में जुलाई 2025 में कहा गया था कि न्यायपालिका के भीतर करप्शन और गलत कर्मचारियों के मामलों का सार्वजनिक मित्रों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा था, “विश्वास, इस विश्वास को फिर से बनाया गया है, इन रेंस को ब्लॉकचेन के लिए तेज़, स्थैतिक और पारदर्शी एक्शन में बदल दिया गया है… ट्रांसपेडी और इथेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”
एनसीईआरटी की किताब वेबसाइट पर मौजूद नहीं है
एनसीईआरटी की 8वीं कक्षा का सोशल साइंस का पार्ट 2 इसी सप्ताह जारी हुआ था। सीजेआई की टिप्पणियाँ के बाद यह किताब एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है। एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की ऑनलाइन बिक्री भी मंगलवार 24 फरवरी से बंद कर दी गई है। हालांकि अभी तक एनसीईआरटी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

एनसीईआरटी की वेबसाइट पर किताबों का दूसरा पार्ट लिस्ट मौजूद नहीं है।
एनसीईआरटी ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क यानी एनसीएफ और एनईपी-2020 के तहत सभी पाठ्यक्रम की नई पुस्तकें तैयार की हैं। कोरोना महामारी के बाद पुराने टॉपिक स्टाक को नष्ट कर नए टोपिक स्टॉल में जोड़ा जा रहा है।
पहली से 8वीं कक्षा तक की नई किताब 2025 में ही प्रकाशित हो चुकी है।.
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नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने पहली बार 8वीं के बच्चों के लिए ज्यूडिशरी में कार्प्शन के बारे में बोल्ट का फैसला लिया। यह पिछला मस्जिद के सामान में बड़ा बदलाव था। पिछले अध्याय में ज्यादातर कोर्ट के रोल और रोल पर फोकस किया गया था। बदले हुए अध्याय का नाम ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ रखा गया। पढ़ें पूरी खबर…

