Santishree Dhulipudi | JNU News | छात्रों और शिक्षकों की JNU ‘जन-अदालत’ में बड़ी जीत, VC शांतिश्री धूलिपुडी को बताया दोषी


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छात्रों-शिक्षकों की JNU ‘जन-अदालत’ में बड़ी जीत, VC शांतिश्री को बताया दोषी!

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर से विवादों में आ गया है. छात्र संघ (JNUSU) और शिक्षक संघ (JNUTA) ने कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के खिलाफ एक ‘पब्लिक इंक्वायरी’ की रिपोर्ट जारी की है. इसमें कुलपति को उन पर लगे सभी आरोपों का दोषी पाया गया है और उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है. यह विवाद फरवरी में छात्रों के निष्कासन और कुलपति द्वारा कथित जातिगत टिप्पणियों के बाद शुरू हुआ था. हालांकि, कुलपति कार्यालय ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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जेएनयू के छात्र संघ और शिक्षक संघ की जन अदालत में वीसी को दोषी बताया गया.

JNU VC Santishree Dhulipudi: देश के प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रशासन और छात्र-शिक्षक समुदायों के बीच चल रहा टकराव अब चरम पर पहुंच गया है. सोमवार को जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) और जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) ने कुलपति प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित के खिलाफ आयोजित एक ‘जन-जांच’ (Public Inquiry) की रिपोर्ट सार्वजनिक की. इस रिपोर्ट में कुलपति को गंभीर आरोपों का दोषी ठहराते हुए उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की गई है.

16 और 18 मार्च को आयोजित की गई इस सार्वजनिक जांच की रिपोर्ट में कुलपति के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. रिपोर्ट के निष्कर्ष में कहा गया है, ‘जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की कुलपति, प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित, JNUSU और JNUTA द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की दोषी हैं. पेश किए गए साक्ष्यों के आधार पर, यह उन्हें उनके पद से हटाने की औपचारिक मांग करने का एक फिट मामला है.’

निष्कासन और कथित टिप्पणी

जेएनयू परिसर में यह ताजा विवाद इस साल फरवरी की शुरुआत में शुरू हुआ था. विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ के चार पदाधिकारियों और एक पूर्व अध्यक्ष को पिछले विरोध प्रदर्शनों के दौरान “विश्वविद्यालय की संपत्ति को स्थायी नुकसान पहुँचाने” के आरोप में निष्कासित कर दिया था.

इस कार्रवाई के बाद पूरे कैंपस में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया. छात्रों का आरोप है कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक आवाजों को दबाने की कोशिश है. इसके बाद कुलपति पर कथित रूप से ‘जातिगत टिप्पणियां’ करने के आरोप भी लगे, जिससे शिक्षकों और छात्रों में भारी नाराजगी फैल गई. इसी माहौल के बीच कुलपति के इस्तीफे की मांग को लेकर इस ‘पब्लिक इंक्वायरी’ का आयोजन किया गया था.

कुलपति ने बनाई दूरी

रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि JNUSU और JNUTA ने कुलपति को इस जांच कार्यवाही में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया था. उन्हें अपना बचाव करने और आरोपों का जवाब देने का मौका दिया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें भाग नहीं लिया. रिपोर्ट के अनुसार: कुलपति ने न तो निमंत्रण का कोई जवाब दिया और न ही अपना बचाव किया. यह जांच किसी वैधानिक शक्ति द्वारा नहीं, बल्कि जेएनयू के छात्रों और शिक्षकों की सामूहिक भावना और विरोध के एक तरीके के रूप में आयोजित की गई थी.

कैंपस में बढ़ता तनाव

फिलहाल कुलपति कार्यालय की ओर से इस रिपोर्ट या इसमें लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. जेएनयू प्रशासन चुप्पी साधे हुए है, जबकि छात्र और शिक्षक संघ अब इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार और संबंधित मंत्रालयों तक अपनी मांग पहुँचाने की तैयारी कर रहे हैं.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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