Russia-Ukraine War | रूस-यूक्रेन युद्ध: अमेरिका ने यूएन में यूक्रेन प्रस्ताव से बनाई दूरी


Russia-Ukraine War: रूस-यूक्रेन जंग पर अमेरिका के एक फैसले ने जेलेंस्की की नींद उड़ा दी है. जिसके दम पर यूक्रेन अब तक रूस से जंग लड़ रहा था, वही अमेरिका अब उसके साथ खड़ा नहीं रहा. जी हां, यूएन यानी संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका ने जो फैसला लिया है, उससे जेलेंस्की को तगड़ा झटका लगा है. इस फैसले से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जरूर खुश होंगे. जी हां, संयुक्त राष्ट्र में जंग को खत्म करने के प्रस्ताव पर यूक्रेन को अमेरिका का साथ नहीं मिला है. अमेरिका ने भी भारत की तरह खुद को अलग रखा है. मतलब कि यूक्रेन जंग पर संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव में वोटिंग से अमेरिका ने दूरी बनाई है और मतदान में नहीं लिया हिस्सा. भारत और चीन ने भी यही किया है.
दरअसल, रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग को चार साल पूरे हो चुके हैं. इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में एक बड़ा प्रस्ताव पेश किया गया. इसमें यूक्रेन की मदद और रूस से तुरंत युद्ध रोकने की मांग की गई थी. संयुक्त राष्ट्र् में यह प्रस्ताव यूक्रेन ने पेश किया था. मगर अमेरिका ने इस वोटिंग से खुद को अलग रखा. अमेरिका का यह फैसला यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के लिए बड़ा झटका है. वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को इससे खुशी मिल सकती है, क्योंकि अमेरिका का यह रुख रूस के पक्ष में जाता नजर आ रहा है. इस घटना ने दुनिया भर में हलचल मचा दी है, क्योंकि ट्रंप के आने के बाद अमेरिका की यूक्रेन नीति में बदलाव आया है.

यूएन संयुक्त राष्ट्र में क्या हुआ?

  • 24 फरवरी 2026 को संयुक्त राष्ट्र् (UNGA) में ‘Support for Lasting Peace in Ukraine’ नाम का प्रस्ताव लाया गया.
  • इसमें यूक्रेन की संप्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया गया. साथ ही, रूस से तुरंत, पूरी तरह और बिना शर्त सीजफायर (युद्ध विराम) की मांग की गई.
  • 193 सदस्य देशों में से 107 ने इसके पक्ष में वोट दिया. 12 देशों ने विरोध में और 51 ने खुद को अलग रखा.
  • पक्ष में वोट करने वालों में इजराइल, यूरोपीय संघ के कई देश और अन्य शामिल थे.
  • विरोध में रूस, बेलारूस, उत्तर कोरिया, ईरान जैसे देश थे. वोटिंग से दूरी बनाने वालों में अमेरिका, भारत, चीन, ब्राजील , यूएई, हंगरी और कजाकिस्तान जैसे देश थे.

अमेरिका ने कैसे चौंकाया
यूएन में यूक्रेन के प्रस्ताव से अमेरिका की दूरी ही सबसे अधिक चौंकाने वाली है. वैसे तो भारत ने भी इस वोटिंग से खुद को अलग रखा. मगर भारत का यह कदम उतना नहीं चौंकाता है, जितना अमेरिका ने चौंकाया है. कारण कि भारत का शुरू से ही यही स्टैंड रहा है- तटस्थ और स्वतंत्र. भारत ने कभी किसी एक पक्ष का साथ नहीं दिया. भारत शुरू से शांति के पक्ष में रहा है. भारत ने शुरू से ही इस युद्ध में तटस्थ रुख अपनाया है. मगर अमेरिका ने हर कदम पर यूक्रेन का साथ दिया है. पैसा हो या हथियार, हर तरह से यूक्रेन को अमेरिका से मदद मिली है. मगर इस बार जब यूक्रेन के प्रस्ताव पर अमेरिका ने अलग रहने का ही फैसला किया.

भारत की तरह अमेरिका ने भी यूक्रेन के प्रस्ताव से खुद को अलग रखा है.

जेलेंस्की को ट्रंप का झटका
डोनाल्ड ट्रंप जनवरी 2025 में दोबारा राष्ट्रपति बने थे. उनके आने के बाद अमेरिका ने यूक्रेन को दी जा रही मदद में कटौती की है. डोनाल्ड ट्रंप ने पुतिन को दोबारा डिप्लोमेसी में शामिल किया और 2022 के हमले की निंदा नहीं की. यूएनजीए में अमेरिकी प्रतिनिधि टैमी ब्रूस ने कहा कि प्रस्ताव में सीजफायर की अपील अच्छी है, लेकिन कुछ शब्द ऐसे हैं जो शांति वार्ता में बाधा डाल सकते हैं. अमेरिका ने प्रस्ताव के कुछ पैराग्राफ्स पर अलग वोटिंग की मांग की, लेकिन वह खारिज हो गई. इससे पहले अमेरिका ने एक महीने पहले भी यूक्रेन के पक्ष में एक प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था. ट्रंप का यह रुख जेलेंस्की के लिए झटका है, क्योंकि अमेरिका यूक्रेन का सबसे बड़ा समर्थक रहा है. वहीं, पुतिन खुश होंगे, क्योंकि अमेरिका का वोटिंग से अलग रहना रूस की स्थिति को मजबूत करता है.

भारत और इजरायल के रूख अलग
इस वोटिंग में एक और खास बात है कि अमेरिका का सहयोगी देश इजरायल ने यूक्रेन का साथ दिया है. जी हां, इजरायल ने अमेरिका से अलग होकर प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया. इजराइली राजदूत डैनी डैनॉन ने कहा कि दोनों देशों के हित अलग हैं. वहीं, भारत ने इस प्रस्ताव पर खुद को अलग रखा है. यानी भारत ने वोटिंग से दूरी बनाई. भारत शुरू से ही इस युद्ध में तटस्थ रहा है. भारत का मानना है कि युद्ध का हल बातचीत से होना चाहिए, न कि एकतरफा प्रस्तावों से. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार पुतिन और जेलेंस्की से बात की है और शांति की अपील की है. भारत की तरह चीन ने भी यही रणनीति अपनाई है. बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 से ही जारी है.



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