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Ready to Ladakh Trip: नीला आसमान, बर्फ से ढकी चोटियां और ऊंचे दर्रों के बीच से गुजरती सड़कें यानी जन्नत का दूसरा नाम लद्दाख. इस शब्द को सुनकर किसका दिल नहीं धड़केगा. रोमांच और अद्भुत रहस्यों से भरा लद्दाख में घूमने का टाइम आ गया है. अप्रैल से लद्दाख पर्यटकों के लिए खोल दिया जाता है. लद्दाख घूमना जिंदगी का लाइव टाइम अचीवमेंच है. यहां के हर लम्हें को जिंदगी भर यादों के दस्तावेजों के लिए संजोया जा सकता है. ऐसे में यदि आप भी इस लाइफटाइम अचीवमेंट को अचीव करने की सोच रहे हैं तो इस बार शानदार मौका है क्योंकि इस बार दिल्ली से 18 फ्लाइटें रोज हैं और सड़क मार्ग से जाने के लिए बसों की कोई कमी नहीं है.
लद्दाख इस बार रिकॉर्ड पर्यटकों को बुलाने की योजना बना लिया है. लद्दाख के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए बताया कि लेह एयरपोर्ट पर उड़ानों की संख्या बढ़ा दी गई है. अब यहां 2 अप्रैल से उड़ानों की संख्या रोजाना 18 कर दी गई है. लेफ्टिनेंट गवर्नर ने सोशल मीडिया पर लिखा है लद्दाख इस बार रिकॉर्ड पर्यटकों का स्वागत करने के लिए पूरी तरह तैयार है. टूरिज्म का सीजन शुरू हो चुका है. इस तरह ज्यादा पर्यटकों की आवाजाही को देखते हुए इस बार हवाई सेवाओं में बड़ा सुधार किया गया है.

2 अप्रैल से लेह एयरपोर्ट पर रोज़ाना उड़ानों की संख्या 8 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है. धीरे-धीरे इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है. अब लेह का सीधा संपर्क दिल्ली,मुंबई, श्रीनगर और चंडीगढ जैसे बड़े शहरों से हो गया है. जल्द ही 2 और उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है, जिससे यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाने में और सुविधा मिलेगी. उड़ानों की संख्या बढ़ने से ज्यादा पर्यटक आएंगे, जिससे स्थानीय लोगों को रोज़गार मिलेगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. @lg_ladakh के X हैंडल से ली गई तस्वीर.

लद्दाख जाने वाले पर्यटकों की भारी संख्या को देखते हुए विमानन कंपनियों पहले से ही तैयार हो गई है. उदाहरण के लिए 24 अप्रैल को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा से लेह एयरपोर्ट के लिए 13 फ्लाइटें हैं. इकोनोमिक क्लास में 7 हजार रुपये से किराया शुरू हो जाता है. वहीं इसका अधिकतम किराया 11 हजार तक है. बिजनेस क्लास में भी यह 10 हजार से शुरू हो जाता है. फ्लाइटों की संख्या में और इजाफा होने की संभावना है. @lg_ladakh के X हैंडल से ली गई तस्वीर.
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दिल्ली से लेह के लिए डाइरेक्ट बस सेवा भी है. हालांकि यह संभवतः मई से शुरू होगी क्योंकि वर्तमान में सड़कों से बर्फ हटाने का काम हो रहा है. बस से लेह जाने के लिए दो रास्ते हैं. मनाली से लेह जाने वाली सड़क छोटी है और इसी रास्ते हिमाचल परिवहन की बसें सीधी चलती है. यह बस दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डा से खुलती है. 1000 किलोमीटर लंबी इस सड़क मार्ग से बस का न्यूनतम किराया 1700 से 1800 के आसपास है जबकि वॉल्वो बस में किराया 2500 रुपये तक हो सकता है. दूसरा रास्ता श्रीनगर से होकर है लेकिन इस रास्ते से डाइरेक्ट नहीं है. इसके लिए आपको पहले श्रीनगर जाना होगा फिर वहां से आपको लेह के लिए दूसरी बस पकड़नी होगी. @lg_ladakh के X हैंडल से ली गई तस्वीर.

लेह-लद्दाख सुकून भरी शांति और और अलौकिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. अगर आप लेह की यात्रा कर रहे हैं तो आप यहां के 5 जन्नत वाले नजारे को देखना न भूलें. पहला- पैंगोंग त्सो झील. पैंगोंग झील दुनिया की सबसे बड़ी जीवंत झीलों में से एक है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका पानी सूरज की रोशनी के साथ नीला से हरा और फिर लाल दिखाई देता है. बर्फीले पहाड़ों के बीच फैला यह गहरा नीला पानी किसी शांत सपने जैसा लगता है. दूसरा है नुब्रा वैली. यह लद्दाख के सबसे रोमांचक और रहस्यों से भरी घाटी है. इसे लद्दाख का बगीचा भी कहा जाता है. यहां आपको ठंडे रेगिस्तान में दो कूबड़ वाले ऊंट देखने को मिलते हैं. सफेद रेत के टीले और साथ में बहती श्योक नदी का नजारा इसे बेहद खूबसूरत बनाता है.

लेह-लद्दाख सुकून भरी शांति और और अलौकिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. अगर आप लेह की यात्रा कर रहे हैं तो आप यहां के 5 जन्नत वाले नजारे को देखना न भूलें. पहला- पैंगोंग त्सो झील. पैंगोंग झील दुनिया की सबसे बड़ी जीवंत झीलों में से एक है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका पानी सूरज की रोशनी के साथ नीला से हरा और फिर लाल दिखाई देता है. बर्फीले पहाड़ों के बीच फैला यह गहरा नीला पानी किसी शांत सपने जैसा लगता है. दूसरा है नुब्रा वैली. यह लद्दाख के सबसे रोमांचक और रहस्यों से भरी घाटी है. इसे लद्दाख का बगीचा भी कहा जाता है. यहां आपको ठंडे रेगिस्तान में दो कूबड़ वाले ऊंट देखने को मिलते हैं. सफेद रेत के टीले और साथ में बहती श्योक नदी का नजारा इसे बेहद खूबसूरत बनाता है. @lg_ladakh के X हैंडल से ली गई तस्वीर.

लेह-लद्दाख में तीसरा आकर्षण है-मैग्नेटिक हिल. यह एक जादुई अनुभव वाली जगह है. यहां गुरुत्वाकर्षण के विपरीत गाड़ियां अपने आप पहाड़ी की तरफ खिंची चली जाती हैं. आसपास के भूरे पहाड़ों का विस्तार आंखों को सुकून देता है. आप यहां आकर किसी दूसरी दुनिया में खो जाएंगे. चौथा आकर्षण है शांति स्तूप. लेह शहर की पहाड़ी पर स्थित यह सफेद गुंबद वाला स्तूप शांति का प्रतीक है. यहां से पूरे लेह शहर और सूर्यास्त का विहंगम दृश्य दिखाई देता है, जो मन को असीम शांति प्रदान करता है. इसके बाद लेह पैलेस जाना न भूलें.17वीं शताब्दी का यह महल तिब्बती वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है. इसकी ऐतिहासिक बनावट और यहाँ से दिखने वाली लद्दाख की चोटियां इसे फोटोग्राफी के लिए सबसे बेहतरीन जगह बनाती हैं.

अगर आप हवाई मार्ग से लद्दाख जा रहे हैं तो उससे पहले कुछ बातों को ध्यान अवश्य रखें. लद्दाख में जहां आप घूमने जाएंगे वहां का तापमान बहुत कम हो जाता है. ऐसे में अगर आप अचानक गर्म से ठंड वातावरण में जाएंगे तो शरीर उस हिसाब से इतने कम समय में खुद को तैयार नहीं कर पाएगा. इसलिए एहतियात जरूर बरतना चाहिए. सबसे पहले कम से कम 48 घंटे लेह में आराम करें. उसके बाद ही नुब्रा वैली या पैंगोग लेक जैसी जगहों की यात्रा करें. इससे आपका शरीर मौसम और ऊंचाई के अनुसार ढल जाएगा. Photo-PTI

लेह जाने से पहले अपना परमिट जरूर बना लें. लेह यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट (ILP) ऑनलाइन बनता. इसे पहले बना लें, ताकि आपको वहाँ किसी तरह की परेशानी न हो. लद्दाख पर्यावरण के हिसाब से बेहद संवेदनशील है. इसलिए वहां कुदरती चीजों का प्रयोग करें. प्लास्टिक उत्पादों से जितना संभव हो सके बचें. रियूजेबल बोतलों का इस्तेमाल करें ताकि लद्दाख की खूबसूरती में अपना योगदान दे सकें. Photo-PTI





