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RAW chief Parag Jain given additional charge of security secretary | रॉ चीफ पराग जैन को सुरक्षा सचिव का अतिरिक्त प्रभार: DU से ग्रेजुएट, 1989 बैच के पंजाब कैडर के IPS ऑफिसर, जानें कंप्लीट प्रोफाइल

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7 मिनट पहले

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केंद्र सरकार ने रविवार, 12 नवंबर को R&AW यानी रिया एंड अनासा विंग्स के प्रमुख जैन को सुरक्षा सचिव का अतिरिक्त प्रावधान जारी किया है। यह फैसला कैबिनेट अलॉटमेंट कमेटी ने लिया है। व्यावसायिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने अपने प्रस्तावों की जानकारी जारी करने का आदेश दिया है।

R&AW के प्रमुख बनने से पहले R&AW के अध्ययन अनुसंधान केंद्र के प्रमुख थे। वो 20 साल से रॉ के लिए काम कर रहे हैं।

पार जैन के प्रोफेशनल जर्नी की झलक

1. एविएशन रिसर्च सेंटर (एआरसी) के निदेशक

R&AW के अंतर्गत आने वाले इस तकनीकी खुफिया केंद्र का नेतृत्व करते हुए जैन ने हवाई निगरानी (हवाई निगरानी), सिग्नल सिग्नल (SIGINT) और इमेजरी उपकरण (IMINT) जैसे क्षेत्रों को बनाया। उनके सन्देश में एआरसी ने गुप्तचर विश्लेषण की नई खोज की।

2. ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के सूत्रधार

मई 2025 में पाकिस्तान और पीओके में भारत पर तैनात मिसाइल बलों ने अपनी खुफिया रणनीति में खतरनाक हमले किए। यह ऑपरेशन R&AW की विरासत का प्रत्यक्ष उदाहरण बन गया।

3. पंजाब में उग्र विरोधी अभियानों के नायक

1990 और 2000 के दशक में पार जैन ने बठिंडा, मानसा, साझीपुर जैसे सैद्धान्तिक में एसएसपी के तौर पर काम किया और रोमानिया और चंपारण में अमोथ रहते हुए सागर और फैक्ट्री के नेटवर्कों पर प्रभावशाली एक्शन की।

4. पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर डेस्क के विशेषज्ञ

रॉ में रहते हुए उन्होंने पाकिस्तान पर इंटरचेंज का नेतृत्व किया। बालाकोट एयरस्ट्राइक और एस्कॉर्ट 370 को हटाना जैसे संदेश में उनकी भूमिका बेहद अहम रही।

5. अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक एवं नेटवर्क विश्लेषण

भारतीय मिशन में रेडियोधर्मिता के दौरान उन्होंने श्रीलंका और कनाडा में सक्रिय कालस्टीनी चरमपंथी नेटवर्क पर करीबी नजर रखी और भारत सरकार को समय पर सूचित किया।

क्यों अहम है उनकी संस्था?

  • प्रौद्योगिकी एवं मानविकी संतुलन का संतुलन: जैन की विशेषता यह है कि वे मैरोन सैथिया (HUMINT) और तकनीकी पर्यवेक्षक दोनों को डिजिटल रूप से उपयोग करके गुप्त तंत्र को अधिक प्रभावशाली बनाया गया है।
  • सीमापार तट पर तटरेखा: उनके संदेश ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत से पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों का निर्माण हो रहा है, बेरोजगारी से मुक्ति के लिए तेजतर्रार नेतृत्व की जरूरत है।
  • डायस्पोरा आधारित आतंकवादी नेटवर्क पर नजर: विशेष रूप से कनाडा और यूरोप में फैले खालिस्तानी नेटवर्कों पर स्केल कैसे उनकी भूमिका में आगे गिरावट आ सकती है।

आरएन काव थे भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के पहले प्रमुख

भारतीय खुफिया एजेंसी आर्केस्ट्रा एंड एना सब्सी वाइज़ यानी रॉ की स्थापना 1968 में हुई थी। इसके पहले प्रमुख आरएन काव थे। इन्हें भारत के मास्टरस्पेस के नाम से जाना जाता है।

काव ने रॉ के निर्देशक के रूप में करीब 10 साल (1968 से 1977) तक अपनी रियासत दी थी।

काव ने रॉ के निर्देशक के रूप में करीब 10 साल (1968 से 1977) तक अपनी रियासत दी थी।

इसके बाद काव को सेंट्रल कैबिनेट के सुरक्षा सलाहकार (असल में, पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार) नियुक्त किया गया। इसके बाद वो आरोप प्रधानमंत्री (राजीव गांधी) को सुरक्षा के मामले और विश्व के खुफिया विभाग के अध्यक्षों से संबंध स्थापित करने में विशेष सलाहकार के रूप में अपने सलाहकार दे रहे थे।

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