
इंडिया टीवी के टाइम्स एवं प्रोडक्शन हाउस के चीफ रजत शर्मा।
नरेंद्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। बुधवार को सहयोगी दलों के साथ मिलकर नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुन लिया गया। अब एनडीए के नेता राष्ट्रपति से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा। राष्टपति को एनडीए में शामिल कर दुश्मनों के नेताओं के दस्तखत वाली समर्थन की चिट्ठी सौंप दी जाएगी। इसके साथ ही नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो जाएगा। राष्ट्रपति ने बुधवार शाम को मोदी सरकार के मंत्रियों के सम्मान में विदाई भोज दिया। एनडीए के पास 292 का आंकड़ा है, बहुमत के लिए 272 चाहिए, इसलिए मोदी की सरकार बनेगी, इसमें कोई संदेह नहीं है।
बुधवार को भारतीय गठबंधन के नेताओं ने भी साफ कर दिया कि वे विपक्ष में ही बैठेंगे, सरकार बनाने की कोई कोशिश नहीं करेंगे। सुबह संजय राउत कह रहे थे कि बीजेपी के पास सिर्फ 240 सांसद हैं, जबकि इंडिया अलायंस के पास पांच सौ सांसद हैं, नीतीश कुमार और चंद्रबाबू एम.डी.ए. तो सबके दोस्त हैं, लेकिन चंद्रबाबू एम.डी.ए. ने दिल्ली पहुंचने से पहले हैदराबाद में ही कह दिया कि वो एनडीए है। के साथ हैं, एनडीए के साथ ही रहेंगे। नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने भी साफ कर दिया कि वह एनडीए के साथ ही रहेंगी। शाम को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी गठबंधन सरकार बनाने की कोई कोशिश नहीं होगी। अब सवाल सिर्फ इतना है कि नरेंद्र मोदी पहली बार ऐसी सरकार का नेतृत्व करेंगे जो सहयोगी दलों के समर्थन पर टिकी होगी।
एनडीए की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा, राजनाथ सिंह, अमित शाह, टीडीपी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू, जेडीयू के अध्यक्ष नीतीश कुमार, बीजेपी के एकनाथ शिंदे, लोक जनशक्ति पार्टी के चिरागवेल, आरएलडी के जयंत चौधरी, एनसीपी के प्रफुल्ल पटेल, जेडी-एस से एच डी कुमार स्वामी, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चे के जीतनराम मांझी, ऑल झारखंड वेस्टर्न यूनियन के सुदेश पटेल, अपना दल की अनुप्रिया पटेल, आंध्र प्रदेश से जनसेना के अध्यक्ष पवन कल्याण, असम गण परिषद के अतुल बोरा, सिक्किम क्रांतिकारी परिषद के इंद्र सब्बा और नॉर्थ ईस्ट के एलायंस पार्टनर्स के नेता शामिल हुए। सबसे पहले सभी चैनलों ने नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुन लिया। इसके बाद सभी दुर्भाग्यपूर्ण जोड़ों को समर्थन की चिट्ठी दे दी। अब 7 जून को एनडीए के सभी सांसदों को शामिल किया जाएगा, जिसमें मोदी को एनडीए संसदीय दल का नेता चुना जाएगा। उसी दिन एनडीए की तरफ से सरकार बनाने का दावा पेश किया जाएगा।
इस बीच राजनाथ सिंह, अमित शाह, जे पी नड्डा कैबिनेट को लेकर सभी सहयोगियों से बात करेंगे। यह फॉर्मूला तय किया गया है कि पांच मंत्रियों पर एक कैबिनेट मंत्री का पद दिया जाएगा। जैसे चुनाव के बाद सबके अपने-अपने विश्लेषण होते हैं, वैसे ही सरकार बनाने को लेकर नेताओं को अपनी-अपनी व्याख्याएं होती हैं। भगवान शिव के लिए बुधवार को जश्न का दिन था क्योंकि इस बात में अब कोई शक नहीं रहा कि एक बार फिर मोदी सरकार बनेगी। मोदी विरोधी मोर्चे में कई नेता ऐसे हैं जो अभी भी यही सोचते हैं कि कभी तो चंद्रबाबू या नीतीश कुमार मोदी के लिए समस्या पैदा करेंगे। कांग्रेस के लिए यही बड़ी बात है कि मोदी विरोधी मोर्चे में सबसे ज्यादा सीटें उन्हें मिलीं और अब इस मोर्चे का नेतृत्व उनके पास रहेगा।
अखिलेश भैया खुश हैं कि 4-4 बार हारने के बाद वे यूपी में भाजपा से ज्यादा सीटें हासिल कर लिए। उनके कारण भाजपा को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला। चाचा शरद पवार खुश हैं कि उन्होंने महाराष्ट्र में क्रिकेटर को रोक लिया। ममता दीदी खुश हैं कि उन्होंने जोड़ों को पैर नहीं खिलाया। जो जीता वो भी खुश, जो हारा वो भी खुश। इसी को कहते हैं सबका साथ सबका विकास। इंडिया अलायन्स ने अपनी हार मान ली। गठबंधन की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि अगर गठबंधन बैठक में ही बैठ जाएगा, तो सरकार बनाने की कोई कोशिश नहीं की जाएगी। बैठक में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी के अलावा शरद पवार, एम के स्टालिन, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी, सीताराम येचुरी, उमर अब्दुल्ला, संजय राउत, डी राजा, चंपाई सोरेन, कल्पना सोरेन, संजय सिंह और राघव चड्ढा सहित 33 नेताओं ने हिस्सा लिया। करीब दो घंटे तक चली बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि नंबर न होने के बावजूद क्या सरकार बनाने की कोशिश जारी रखनी चाहिए। सभी दलों ने तय किया है कि विपक्षी गठबंधन सरकार बनाने के लिए सही वक्त का इंतजार किया जाएगा। खड़गे ने कहा कि जनता तानाशाही से आजादी चाहती है, गठबंधन सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगी और सही वक्त आने पर कदम उठाएगी।
एनसीपीआइ के संस्थापक शरद पवार इस बात को समझते हैं कि इस समय मोदी को सरकार बनाने से रोका नहीं जा सकता। वह जानते हैं कि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार को एनडीए से अलग करना मुश्किल होगा। ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे नेता इसीलिए बैठक में नहीं आए क्योंकि उन्हें पता है कि सरकार बनाने का रास्ता बंद हो गया है। लेकिन राहुल गांधी तो अपनी हर चुनावी रैली में कहते थे, ‘देख ले लो, 4 जून के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे।’ इसीलिए कांग्रेस के नेता चाहते हैं कि साम, दाम, दंड, भेद कुछ भी करके मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोका जाना चाहिए। लेकिन आंकड़े ऐसे हैं कि मोदी को तीसरे कार्यकाल से रोकना असंभव है। चुनाव के नतीजे आने के बाद भी मोदी विरोधी मोर्चे के कई नेताओं ने कहा था, हमारी सरकार बनेगी, अगर नहीं बनी तो सब लोग कि सब मिलकर लड़े फिर भी मोदी को नहीं रोक पाए। दो घंटे तक जो बैठक हुई, उसमें कई बार ये बात हुई लेकिन फिर एक नेता ने यह कह दिया कि अकेले भाजपा के पास 240 सांसद हैं, हमारी इतनी असफलताओं को मिलाकर 234 सांसद ही हैं, इसीलिए इंतज़ार करो और ठहरो, के अलावा कोई रास्ता नहीं है। (राजेश शर्मा)
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