आरएएस भर्ती परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट 15 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था। इसके बावजूद राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) ने भर्ती परीक्षाओं के पूर्ण परिणाम, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंक और मेरिट रैंक सार्वजनिक नहीं किए हैं। सूचना अधिकार अधिनियम –
आयोग का कहना है कि यह भाषा भाषा की निजता यानी प्राइवेट है। धर्मशाला ने मुख्यमंत्री कार्यालय की मेल आईडी पर शिकायत दर्ज कराई है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से आरपीएससी को काउंसलिंग पोर्टल पर याचिका के बजाय राजस्थान स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड (आरएसएसबी) को भेजा गया है।

RPSC छुपा क्यों रहा है नंबर? झुंझुनूं के रहने वाले झारखण्ड के सेनाध्यक्ष अनिल कुमार का आरोप है कि आरपीएससी रिजल्ट नहीं आ रहा है, ये तो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने साफा में कहा था कि एग्ज़ाम का नंबर कोई निजी चीज़ नहीं है।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के अंतिम परिणाम में स्कोर का नाम, रोल नंबर, श्रेणी, लिखित और साक्षात्कार के अंक, कुल अंक और अंतिम रैंक तक सार्वजनिक किया जाता है। अन्य चयन बोर्ड भी नाम, माता-पिता का नाम, अंक और योग्यता रैंक सार्वजनिक करता है। आरपीएससी का कुछ भी नहीं कहना शक पैदा करता है।

आरपीएससी की याचिका, कार्मिक कर्मचारी चयन बोर्ड को अनिल ने बताया- मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत दर्ज की गई तो सहयोगी ने संपर्क पोर्टल पर शिकायत अपलोड कर अपर कुमार मामले में कर्मचारियों के चयन बोर्ड को भेज दिया। जब वापस आया तो अब रिलेशनल को डिपार्टमेंट की बात कही जा रही है। लेकिन अब तक याचिका का समाधान नहीं हुआ.
आरटीआई आवेदन के उत्तर में आरपीएससी ने बार-बार निजता और तृतीय पक्ष की सूचना लेने से इनकार कर दिया है। यहां तक कि पहली अपील में यूपीएससी जारी नतीजों का उदाहरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का संदर्भ दिया गया, बिना किसी सुनवाई के अपील को खारिज कर दिया गया।
भास्कर ने इस मामले में आरपीएससी के सलाहकार रामनिवास को फोन किया, लेकिन उनकी बात नहीं हुई।


चमेली ने मुख्यमंत्री कार्यालय में कुछ पुरानी अदालत के वारंटों की औपचारिक याचिका दायर की है।
- 2011 का सिलिकॉन बनाम आदित्य बंदोपाध्याय केस: कोर्ट सुप्रीम ने कहा था कि एग्जाम कैसे हुआ, कॉपी कैसे चेक हुई, ये सब बताना चाहिए, इसे छुपाने की जरूरत नहीं है।
- 2018 का यूपीएससी बनाम अंगेश कुमार केस: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नौकरी देने के तरीकों के खिलाफ ईमानदारी होनी चाहिए, नहीं तो ये कानून होगा।
- 2018 का कैनरा बैंक बनाम सीएसआईआर। श्याम केस:सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वही जानकारी प्राइवेट होगी, जिसका सरकारी काम से कोई लेना-देना नहीं है।
- 2019 का सुभाष चंद्र अग्रवाल मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार सबसे ऊपर नहीं है। अगर लोगों के फायदे के लिए जानकारी जरूरी है, तो उसे बताएं।
- 2020–2024 का वैज्ञानिक और उच्च न्यायालय का निर्णय: कोर्ट ने कहा कि सरकारी नौकरी के एग्जॉम का नंबर प्राइवेट नहीं होता, क्योंकि एक ही नौकरी से नौकरी मिलती है और सरकार से नौकरी मिलती है।
