
साइबर फ्रॉड परिकल्पना
साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ रेलवे बोर्ड अलर्ट: इस समय साइबर अपराधियों द्वारा तीन तरह से लोगों को अपने जाल में फंसाया जाता है, जिन्हें बंधक बनाकर रखा जाता है और पीड़ित के पास विचारधारा-समझने का समय ही नहीं बचता है। अब सिर्फ आम लोगों को ही रेलवे से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भी साइबर अपराधियों ने अपना शिकार बनाने की फिराक में नहीं रखा है और इसके रेलवे बोर्ड को जारी करने की अपील की है। रेलवे बोर्ड ने अपने कर्मचारियों के लिए शिकायत जारी की है कि साइबर क्रिमिनल स्टाफ सदस्यों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं और इसके लिए वो सीनियर रेलवे भर्ती होने का दावा कर रहे हैं। रेलवे बोर्ड का कहना है कि धोखाधड़ी करने वालों ने कुछ जूनियर स्टाफ सदस्यों से फोन कॉल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए संपर्क किया है और अपने निजी और निजी डिजाइन वाले उपकरण निकालने की कोशिश की है, जिससे उन्हें धोखा दिया जा सके।
रेलवे अधिकारी का दावा कर रहे साइबर धोखाधड़ी
रेलवे बोर्ड ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि उनके नोट में कहा गया है कि कई साइबर फ्रॉडस्टर्स रेलवे अधिकारी फर्जी फोन कॉल और एसएमएस और व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से केवैसी वेर दोस्ती, कोचिंग पेंशन बेनेफिट और इसी तरह के दोस्त के दोस्त और मित्रवत मित्र की मांग कर रहे हैं। बोर्ड ने साफ किया कि किसी भी रेलवे अधिकारी को फोन, एसएमएस, सिलिकॉन या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए बैंक डिटेल्स, ओपीटीपी, पासवर्ड या किसी भी भरोसेमंद पेशेवर जानकारी का अधिकार नहीं है।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सलाह
बोर्ड ने रेलवे पाइपलाइन और पेंशनभोगियों से अनुरोध किया है कि बोर्ड ने इस बात पर जोर दिया है कि रेलवे पाइपलाइन या सर्विस रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए कोई लिंक या संदेश नहीं भेजा जाए। बयान में पेंशनभोगियों को रहने से रोकने और उनके परिवार के सदस्यों को ऐसी धोखाधड़ी वाली देनदारी के बारे में सलाह देने का आग्रह किया गया है।
संदिग्ध कॉल की तत्काल जानकारी
बोर्ड ने साइबर को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की जानकारी तुरंत पुलिस सेल और प्रशासनिक कार्यालय को दी जानी चाहिए। अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में, साइबर फ्रॉड के शिकार के बाद कई कर्मचारी साइबर अपराधियों के साथ संवाद जानकारी साझा कर रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है।
नए कानूनी ढाँचे के लिए साइबर सुरक्षा लॉन्च से आरंभ
केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 20 फरवरी को कहा था कि सरकार उभरती हुई साइबर सुरक्षा की झलक और अवसरों के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है। भारती एयरटेल और क्लाउड सुरक्षा फर्म ज़स्केलर के आर्किटेक्चर और थ्रेट रिसर्च सेंटर के लॉन्च पर इंडिया आर्किटेक्चर समित 2026 में आईटी मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आईटी और टेलीकॉम कंपनियों को बढ़ती साइबर सुरक्षा कंपनियों को चुना जाना चाहिए।
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