कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने फेसबुक पर पोस्ट किया, “संसद में सरकार से मैंने पूछा कि पिछले वर्ष 16,500 करोड़ रुपये के सार्वजनिक कार्यों के ठेकों में से कितने ठेके दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्गों के व्यवसायियों को मिले?उनका जवाब बेहद चिंताजनक था, उन्होंने कहा कि सरकार इस संबंध में कोई डेटा ही नहीं रखती।’’
उन्होंने ने कहा कि नीति के तहत सार्वजनिक खरीद प्रक्रिया के तहत 25 प्रतिशत खरीद एमएसएमई से होनी चाहिए, जिसमें से चार प्रतिशत खरीद दलित और आदिवासी उद्यमियों से किया जाना निर्धारित है, लेकिन जब बात सबसे बड़े और लाभकारी ठेकों और सार्वजनिक कार्यों की आती है, तो सरकार कहती है कि यह “अनिवार्य” नहीं है।





