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Rahul Gandhi Raebareli Or Wayanad Seat; Sonia Priyanka Gandhi | Lok Sabha Election | रायबरेली नहीं छोड़ने पर राहुल सहमत: मां सोनिया ने समझाया, क्यों यूपी कांग्रेस के लिए जरूरी; प्रियंका दोबारा बन सकती हैं प्रभारी – Lucknow News

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लगभग तय हो गया है कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी की सीट रायबरेली में उनके पास है। वह वायनाड छोड़ सकते हैं। बुधवार को हुई कांग्रेस की पहली बैठक और परिवार के साथ रायशुमारी के बाद उन्होंने यह फैसला किया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राहुल दोनों सीटों पर से कौन

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यह भी कहा जा रहा है कि प्रियंका यूपी प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल सकती हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद उन्होंने इस पद को छोड़ दिया था। राहुल की सीट पर प्रियंका वायनाड से चुनाव लड़ सकती हैं। गांधी परिवार अपने माध्यम से उत्तर के साथ दक्षिण में पकड़ मजबूत रखना चाहता है।

राहुल के रायबरेली में रहने की सहमति के पीछे मां सोनिया की वह भावुक अपील भी है, जिसमें उन्होंने कहा था, ‘आपको बेटा मिल रहा हूं।’ राहुल ने भी रिजल्ट के पहले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका संकेत दिया था, उन्होंने यूपी को स्पेशल थैंक्यू बताया था।

राहुल ने मां सोनिया के साथ यह फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

राहुल ने मां सोनिया के साथ यह फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की।

परिवार ने रायबरेली क्यों जरूरी है
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मां सोनिया, बहन प्रियंका और जीजा रॉबर्ट वाड्रा से बातचीत करके रायबरेली जाने पर सहमत नहीं हुए हैं। परिवार ने यह भी कहा कि रायबरेली की जीत इस बात से भी बड़ी है कि परिवार ने अमेठी की खोई सीट भी हासिल कर ली। रायबरेली में राहुल को वायनाड से बड़ी जीत मिली। इस तरह से रायबरेली छोड़ेंगे तो यूपी में गलत मैसेज आएगा।

जाहिर है, गांधी परिवार के मुखिया हमेशा यूपी से ही राजनीति की। पिता राजीव गांधी अमेठी और परदादा जवाहरलाल गांधी इलाहाबाद से चुनाव लड़ रहे हैं। रायबरेली सीट उनकी मां दादी इंदिरा और दादा फिरोज गांधी की सीट है।

प्रियंका खेमा चाहती है कि राहुल वायनाड न बनें
सूत्र बताते हैं कि प्रियंका गांधी के खेमे के कुछ लोग पहले की तरह चाहते थे कि राहुल गांधी वायनाड में ही रहें और प्रियंका रायबरेली से लड़ें। ठीक एक दिन पहले ही गांधी परिवार ने फैसला लिया था कि राहुल रायबरेली से लड़ेंगे। ये आखिरी वक्त में इसलिए हुआ कि प्रियंका और रॉबर्ट दोनों चुनाव लड़ना चाहते थे। लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रियंका को यह बताने के लिए कहा कि परिवारवाद के आरोप से कांग्रेस कमजोर होगी। पूरे परिवार को चुनाव में उतरने की बजाय राहुल को ब्रांड बनाना जरूरी है।

यह 17 मई को रायबरेली में हुई चुनावी रैली की तस्वीर है।  इसमें सोनिया ने मंच से कहा था- बेटा तुम्हें अपनी बनी हुई हूं।

यह 17 मई को रायबरेली में हुई चुनावी रैली की तस्वीर है। इसमें सोनिया ने मंच से कहा था- बेटा तुम्हें अपनी बनी हुई हूं।

3 कारण क्यों रायबरेली नहीं छोड़ेंगे राहुल

1- सोनिया की अपील, जनता ने रिकॉर्ड वोटों से जीता
17 मई को सोनिया गांधी इस लोकसभा चुनाव की पहली रैली में रायबरेली पहुंची थीं। उन्होंने मंच से कहा- ‘मैं आपको बेटा कह रही हूं।’ जैसा मुझे माना, वैसे ही मानकर रखना। राहुल आपको निराश नहीं करेंगे। राहुल ने 3.90 लाख वोटों से जीत दर्ज की, जबकि 2019 में सोनिया गांधी ने 1.67 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी।

2- केंद्र में कांग्रेस को आना है तो यूपी में मजबूत पैठ जरूरी
कांग्रेस को इस बार यूपी में 9.4 फीसदी वोट मिले। यह कांग्रेस के लिए संजीवनी की तरह है। 2019 में 6.36% वोट शेयर और एक सीट ही मिली थी। 2022 यूपी विधानसभा चुनाव में 2.33% वोट और दो मौतें मिलीं।

3- दक्षिण के बाद हिंदी पट्टी को मजबूत करना चाहते है
राहुल 2019 में पहली बार अमेठी के साथ वायनाड से चुनाव लड़कर अमेठी हार गए। वायनाड से रेड संसद पहुंचे। राहुल ने भारत जोड़ों यात्रा की शुरुआत भी कन्याकुमारी से की थी, जिसके बाद कांग्रेस लगातार दक्षिण में मजबूत हुई। मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में। कर्नाटक में कांग्रेस ने भी सरकार बना ली।

इस चुनाव में केरल में कांग्रेस को 20 में से 14, तमिलनाडु में 9 और कर्नाटक में 9 सीटें मिली हैं। अब राहुल गांधी उत्तर भारत को प्राथमिकता देते हुए हिंदी पट्टी को मजबूत करने पर फोकस करना चाहते हैं। यही कारण है कि दूसरी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान उन्होंने जो रूट चुना उसमें ज्यादातर समय इसी इलाके को दिया। यूपी के बाद कांग्रेस का राजस्थान में भी अच्छा प्रदर्शन हो रहा है।

अब दोनों भाई बहन यूपी में अपनी सक्रियता और बढ़ा सकते हैं। अमेठी में किशोरी लाल के साथ 4 अन्य सीटें जीतने पर उनका आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा हुआ है। दोनों की बॉडी लैंग्वेज भी बदली हुई हैं। इसके अलावा उन्हें यह भी पता है कि अगर वह यूपी छोड़ देंगे, तो अखिलेश का उन्हें हमेशा सहारा लेना पड़ेगा और कांग्रेस कभी अपने दम पर यूपी में नहीं खड़ी हो पाएगी।

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