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- पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामला; विशाल अग्रवाल के बेटे का विवाद | पुणे समाचार
पुणे6 मिनट पहले
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ससून अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ तावरे, चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ श्रीहरि हलनोर और स्टाफ अतुल घाटकांबले को ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में 27 मई को गिरफ्तार किया गया था।
पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस की जांच को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। गुरुवार को पूर्व आईएएस अधिकारी अरुण भाटिया ने महाराष्ट्र मानवाधिकार आयोग को चिट्ठी लिखकर पुलिस कमिश्नर के तत्काल तबादले की मांग की है।
उन्होंने कहा- पोर्श केस ने हमें झकझोर दिया है। केस की जांच ने हमारे डेमोक्रेसी का सुपर फेस शो है। भ्रष्ट अधिकारी अब रोज़ की ज़िंदगी का हिस्सा बन गए हैं।
भाटिया ने कहा कि माइनर ने शराब पी है या नहीं, इसके लिए पुलिस ने टेस्ट के लिए 6 घंटे तक की देरी की। पुलिस ने टेस्ट से पहले नाबालिग को पुलिस स्टेशन में पिज्जा खिलाया। गवाहों और कार में बैठे लोगों के बयान दर्ज करने में भी देरी हुई।
जब मामला तूल पकड़ा तो पुलिस कमिश्नर ने ब्लड टेस्ट में देरी को कुछ हद तक गलत बताया। उन्होंने दावा किया कि सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए कोई राजनीतिक दबाव नहीं था। अगर ऐसा था तो दो नेता घटना के बाद पुलिस स्टेशन क्यों पहुंचे थे।
पुलिस की जांच में देरी से पता चलता है कि जांच के बुनियादी नियमों को निर्धारित किया गया है। आवेदकों को बचाने के लिए उन्हें समय दिया गया, इससे प्रभावित हुई।
भाटिया ने कहा- ब्लड सैंपल बदलने वाले सासून अस्पताल के डॉक्टर भी भ्रष्ट थे। भ्रष्ट डॉक्टर की मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में नियुक्ति की सिफारिश की गई थी। इसकी भी जांच होनी चाहिए और स्वास्थ्य सचिव के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए
बाबू ने नाबालिग की मां से बदला था ब्लडड्रम

डॉ. अजय टावरे और श्रीहरि हलनोर 30 मई तक पुलिस हिरासत में हैं।
पुलिस ने गुरुवार को कोर्ट में बताया कि नाबालिग लड़की के ब्लड सैंपल को किसी महिला के सैंपल से बदला गया था, ताकि यह पता चल सके कि घटना के वक्त वह नशे में नहीं थी।
सैंपल की जांच के लिए बनाई गई समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पीसीबी ने नाबालिग की मां का ब्लड सैंपल लिया था।
पुलिस ने पुणे कोर्ट से आरोपी को बदलने वाले दोनों डॉक्टरों और अस्पताल के स्टाफ की कस्टडी बढ़ाने की मांग की थी। इसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए तीनों की कस्टडी 5 जून तक बढ़ा दी।
इससे पहले, हार्मोनल ड्रग्स में डॉ. शामिल थे। हलनोर ने पूछताछ में बताया कि ब्लड सैंपल बदलने के लिए मॉडल के पिता विशाल अग्रवाल थे और उनके बीच 50 लाख रुपये की डील हुई थी।
विशाल अग्रवाल ने डॉ. अजय टावरे से संपर्क किया गया था। दुर्घटना के बाद दोनों के बीच 15 बार वॉट्सऐप पर बातचीत हुई। टावरे के कहने पर विशाल अग्रवाल ने पहली किस्त के 3 लाख रुपए दिए थे।
पुलिस ने बताया कि अब तक डॉ. हेलनोर के घर से 2.5 लाख रुपये और अस्पताल के कर्मचारियों के घर से 50 लाख रुपये वसूल किए गए हैं। डॉ. टावरे प्राणी पर अभी भी खोज करना है।
साथ ही पुलिस ने कहा कि पहले माना जा रहा था कि नाबालिग का ओरिजनल ब्लडस्टैंड डस्टबिन फेंक दिया गया था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। डॉ. हेल्नोर नेडल किसी व्यक्ति को स्थापित किया था। हम उसकी तलाश कर रहे हैं।
पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस क्या है?
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 18-19 मई की रात 17 साल 8 महीने के एक लड़के ने आईटी सेक्टर में काम करने वाली बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौत हो गई।
घटना के समय नशे में था। वह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहा था। नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है। उसके पिता-दादा समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मंत्री मुश्रीफ ने माना- एनसीपी विधायक ने डॉ. तावरे की सिफारिश की थी
एनसीपी (अजित गुट) के नेता मुश्रीफ ने यह भी माना है कि पार्टी विधायक सुनील टिंगरे के रिकमंडेशन लेटर के आधार पर डॉ टावरे की नियुक्ति की गई थी। मुश्रीफ ने कहा, ‘सुनील टिन्डे ने डॉ टावरे की नियुक्ति की सिफारिश की थी और मैंने इसकी मंजूरी दे दी।’ मुझे टावरे के पिछले अभिलेखों के बारे में पता नहीं था। जब सिफारिश की गई थी, तो डीन को उसके बारे में बताना चाहिए था।’
हालांकि, डीन डॉ विनायक काले ने दावा किया कि मंत्री मुश्रीफ के आदेश पर ही डॉ टावरे को मेडिकल सुपरिंटेंडेंट का प्रोडक्शन चार्ज दिया गया था। उन्होंने बस मंत्री के आदेश का पालन किया।

ये तस्वीर एक पब के सीसीटीवी फुटेज की है। दुर्घटना से पहले नाबालिग ने अपने दोस्तों के साथ शराब पी और कार लेकर निकल गया।
जुवेनाइल बोर्ड मेंबर्स के खिलाफ जांच के आदेश
महाराष्ट्र सरकार ने नाबालिगों को जमानत देने वाले किशोर न्याय बोर्ड के तीन सदस्यों के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए 5 सदस्यों की एक समिति बनाई गई है, जो यह जांच करेगी कि बोर्ड सदस्यों ने जमानत देते समय तय नियमों का पालन किया या नहीं। समिति को एक सप्ताह में रिपोर्ट दी जाएगी।
बोर्ड ने छवियों को निबंध लिखने के लिए कहा था

एक्सीडेंट के बाद पुणे पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड के सामने कार्यवाही शुरू की थी। बोर्ड ने 7 करोड़ रुपये की जमानत दी थी। बोर्ड ने सड़क दिशानिर्देश पर 300 शब्दों का निबंध लिखने और शराब छोड़ने के लिए परामर्श देने को कहा था। बोर्ड के फैसले के खिलाफ पुणे पुलिस सत्र कोर्ट पहुंची।
पुलिस का कहना था कि नाबालिग लड़की पर बलिग की तरह कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उसका अपराध गंभीर है। सेशन कोर्ट ने पुलिस को बोर्ड में समीक्षा याचिका देने को कहा। 22 मई को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को फिर से तलब किया और उसे 5 जून तक बाल सुधारने के लिए घर भेज दिया।

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पुणे पोर्श एक्सीडेंट केस में लगातार नए खुलेसे हो रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, माइनर्मूव्ट के दादा सुरेंद्र अग्रवाल ने ही उन्हें पोर्श कार के जन्मदिन पर गिफ्ट दिया था। सुरेन्द्र अग्रवाल के दोस्त अमन वाधवा ने बताया कि 2 महीने पहले सुरेन्द्र ने वाट्सएप ग्रुप में पोर्श कार की तस्वीर शेयर की थी। साथ में लिखा था- यह कार उपहार में दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…
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