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- पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामला अपडेट; विशाल अग्रवाल पुत्र | वेदांत अग्रवाल
पुणे9 मिनट पहले
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18-19 मई की रात नाबालिग लड़की ने कार से बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मार दी थी, जिससे दोनों की मौत हो गई। दुर्घटना के बाद राहगीरों ने बादलों की पिटाई की थी।
पुणे पोर्श केस के आरोपी माइनर ने पुलिस की पूछताछ में स्वीकार किया है कि हादसे की रात वह बहुत नशे में थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाबालिग ने कहा कि उसे हादसे के बारे में ज्यादा कुछ याद नहीं है।
पुलिस ने मां की सहमति से उसके बाल सुधारने के लिए घर में 1 जून को पूछताछ की थी। जुवेनाइल बोर्ड ने 31 मई को नाबालिग से पूछताछ करने के लिए पुलिस को गिरफ्तार कर लिया था। घटना के बाद नाबालिग से कोई पूछताछ नहीं की गई थी और न ही कोई रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इस बीच पुणे की एक अदालत ने रविवार (2 जून) को नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल और मां शिवानी अग्रवाल को साक्ष्य मिटाने के मामले में 5 जून तक की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। दोनों पर ब्लड सैंपल से छेड़छाड़ का आरोप है।
1 जून की रात को गिल्बर्ट की गई थी फ्लो की मां
ग्राफिक माइनर की मां शिवानी अग्रवाल को 1 जून की रात पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुणे पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया था कि शिवानी अग्रवाल पिछले कुछ दिनों से घर से गायब थीं। उन पर बेटे का ब्लड सैंपल बदलने के लिए अपना ब्लड सैंपल देने और पापा को पैसे देने का आरोप है।
पुलिस ने कोर्ट में बताया था कि नाबालिग लड़की का ब्लड सैंपल किसी महिला के सैंपल से बदला गया था, ताकि यह पता चल सके कि घटना के वक्त वह नशे में नहीं थी। यह स्त्री और कोई नहीं, स्वरूप की माँ ही थी।
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 18-19 मई की रात 17 साल 8 महीने के एक लड़के ने आईटी सेक्टर में काम करने वाली बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौत हो गई। घटना के समय नशे में था। वह 200 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से कार चला रहा था।

ससून अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ तावरे, चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ श्रीहरि हलनोर और स्टाफ अतुल घाटकांबले को ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में 27 मई को गिरफ्तार किया गया था। दोनों पुलिस की हिरासत में हैं।
ब्लड सैंपल बदलने के लिए 50 लाख रुपए की डील हुई थी
इससे पहले, सासून अस्पताल के गिरफ्तार मरीजों में डॉ. हलनोर ने पूछताछ में बताया था कि ब्लड सैंपल बदलने के लिए मॉडल के पिता विशाल अग्रवाल थे और उनके बीच 50 लाख रुपये की डील हुई थी।
विशाल अग्रवाल ने डॉ. अजय टावरे से संपर्क किया गया था। दुर्घटना के बाद दोनों के बीच 15 बार वॉट्सऐप पर बातचीत हुई। रॉक की पूरी बात वाट्सएप कॉल पर ही की गई। टावरे के कहने पर विशाल अग्रवाल ने पहली किस्त के 3 लाख रुपए दिए थे।
डील के 50 लाख रुपए में से पांच लाख रुपए मुझे और 50 हजार रुपए स्टाफ अतुल घाटकांले को मिले। इस मामले में एक पूर्व पुलिस अधिकारी के भी शामिल होने की चर्चा है। उसने भी प्रभावों को बचाने की कोशिश की।
डॉ. टावरे ससून अस्पताल के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख और डॉ. हलनोर चीफ मेडिकल ऑफिसर थे। दोनों को 29 मई को सस्पेंड कर दिया गया था। अस्पताल के डीन डॉ विनायक काले को छुट्टी पर भेज दिए गए हैं।
