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डीएमके की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) के साथ भी सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अटकी हुई है.
डीएमके और कमल हासन की पार्टी में गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है. (फाइल फोटो)
चेन्नई. तमिलनाडु की सियासत में चुनावी समीकरण बनने से पहले ही दरारें साफ दिखने लगी हैं. द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) और अभिनेता-राजनेता कमल हासन की पार्टी मक्कल निधि मय्यम (एमएनएम) के बीच सीट बंटवारे की बातचीत गुरुवार को अटक गई. तकरार की असली वजह सीटों की संख्या नहीं, बल्कि चुनाव चिन्ह बन गया है. डीएमके चाहती है कि एमएनएम उसके ‘राइजिंग सन’ चिन्ह पर चुनाव लड़े, जबकि कमल हासन की पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह अपनी पहचान के साथ, अपने ‘टॉर्चलाइट’ चिन्ह पर ही मैदान में उतरेगी.
एमएनएम के महासचिव ए. अरुणाचलम ने कहा कि पार्टी 2019 और 2021 की तरह इस बार भी अपने ही चिन्ह पर चुनाव लड़ेगी. हालांकि सूत्रों के मुताबिक डीएमके ने एमएनएम को केवल दो सीटों का ऑफर दिया है, जिस पर बातचीत चल रही है. जनीतिक गलियारों में एक ‘समझौता फॉर्मूला’ भी चर्चा में है, जिसमें एक सीट एमएनएम अपने चिन्ह पर और दूसरी डीएमके के चिन्ह पर लड़े. इसी तरह का मॉडल एमडीएमके पहले अपनाती रही है. मामला गंभीर होता देख कमल हसन ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की आपात बैठक बुला ली है, जिससे साफ है कि एमएनएम इस मुद्दे पर झुकने के मूड में नहीं है.
उधर, डीएमके की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हो रही हैं. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (एम) के साथ भी सीट शेयरिंग को लेकर बातचीत अटकी हुई है. माकपा ने 2021 के मुकाबले ज्यादा सीटों की मांग रखी है, लेकिन डीएमके की ओर से अभी कोई जवाब नहीं आया है. इस बीच Thol Thirumavalavan ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात की, जिससे गठबंधन के भीतर चल रही हलचल और तेज हो गई है. स्पष्ट है कि तमिलनाडु में चुनाव से पहले ही गठबंधन की राजनीति में खींचतान शुरू हो चुकी है और डीएमके के लिए सहयोगियों को साथ रखना अब आसान नहीं रहने वाला.
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें





