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Police System in India Hierarchy in Superintendant and Commissionerate Police Systems | क्रांतिकारियों को कंट्रोल करने के लिए बनी पुलिस: दो सिस्टम- सुपरिटेंडेंट और कमिश्नरेट, 4 लेवल पर होती है एंट्री; जानें डिटेल जानकारी

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6 मिनट पहले

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पुलिस शब्द भारतीयों के लिए बहुत नया है। अंग्रेजो के आने के पहले यहां पुलिस नाम की कोई व्यवस्था नहीं थी। पोहाओ के पास सेना थी, पैदल सेना थी, लेकिन पुलिस के पास कोई तूफान नहीं था।

1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की सत्ता हिल गई मगर आंदोलन कुचल दिया गया। अगले साल ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया ने सीधे तौर पर अपने यानी ब्रिटिश क्राउन के हाथों में ले ली से कंपनी के अधिकार खत्म कर दिए।

क्रांतिकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस का गठन हुआ

ब्रिटिश क्राउन की सत्यता की परिभाषा के बाद कोल्ड बस्ते में पेड इंडियन पिनल कोड अर्थात आईपीसी 6 अक्टूबर, 1860 को लाया गया। इसके लिए मैकले ने अपने 3 साथियों मैकक्लिओड, एंडरसन और मिलेट के साथ मिलकर एक समिति बनाई।

इन चारों की समिति से पहला विधि आयोग बनाया गया। यही आयोग भारतीय दंड संहिता येही भारतीय दंड संहिता लेकर आया। 1 जनवरी, 1862 को आईपीसी अनुभव में आया।

सरकार के विरोध में बगावत करने वाले भारतीयों पर नियंत्रण करने के लिए बैरासिया ने भारतीय पुलिस का गठन किया। इसके लिए वो भारतीय पुलिस अधिनियम 1861 लेकर आये।

इस अधिनियम का उद्देश्य एक पेशेवर पुलिस बल की स्थापना करना था, जिसका मुख्य कार्य कानून और व्यवस्था बनाए रखना था। इस अधिनियम में पुलिस बल के संगठन और संरचना के लिए दिशा-निर्देश तय किये गये हैं।

भारत में पुलिस व्यवस्था मुख्य रूप से दो विहित से काम करती है—

(1) अधीक्षण यंत्र और (2) आयुक्तालय प्रणाली

इन दोनों की संरचना, अधिकार और काम करने का तरीका अलग-अलग होता है।

छोटे शहरों में सुपरिटेंडेंट सिस्टम लागू होता है

यह भारत की पारंपरिक पुलिस व्यवस्था है, जो ज्यादातर सजावटी, ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में लागू होती है। इस प्रणाली में जिलों के पुलिस प्रमुख पुलिस अधीक्षक (पुलिस अधीक्षक – एसपी) होते हैं।

वहीं, कानून-व्यवस्था से जुड़े कार्यकारी अधिकार जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के पास भी होते हैं, जैसे- धारा 144 लागू करना, हथियार चलाना, हथियार लाइसेंस जारी करना/रद्द करना, भीड़ नियंत्रण से जुड़े आदेश। साथ ही, एसपी इन मामलों में डीएम को रिपोर्ट करते हैं और अपनी सलाह पर कार्रवाई करते हैं।

महानगरों में कमिश्नरेट सिस्टम लागू होता है

यह सिस्टम विशेष रूप से महानगरों और बड़े शहरों के लिए बनाया गया है। यहां अपराध और कानून-व्यवस्था की अनेकानेक जटिलताएँ हैं। यहां का प्रमुख अधिकारी पुलिस आयुक्त (पुलिस आयुक्त – सीपी) होता है। शहर के आकार और महत्व के अनुसार, पुलिस आयुक्त का रैंक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक) या महानिरीक्षक (आईजीपी) के समकक्ष होता है।

सीपी के पास वे अधिकार होते हैं जो अधीक्षक प्रणाली में डीएम के पास होते हैं, जैसे- धारा 144 लागू करना, हथियार चलाना, हथियार लाइसेंस जारी करना/रद्द करना, भीड़ और कानून-व्यवस्था पर सीधे आदेश देना। यहां पुलिस को सीधे कार्यकारी अधिकार दिए गए हैं।

जब पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पावर मिल भी जाती है, तो उस कमिश्नरेट सिस्टम को कहा जाता है। इस सिस्टम में कमिश्नर, इंटीग्रेटेड पुलिस कमांड के प्रमुख होते हैं और राज्य सरकार को जवाबदेह रहता है। विशेष परिस्थितियों में एनएसए या प्राकृतिक अधिनियम लागू करने का अंतिम निर्णय पुलिस आयुक्त का भी होता है।

पुलिस विभाग में 4 पदों पर भर्ती होती है-

  1. कॉन्स्टेबल
  2. सब इंस्पेक्टर
  3. डीएसपी
  4. एएसपी

1. कॉन्स्टेबल

यह विधि व्यवस्था की सबसे छोटी इकाई है। कुछ राज्यों में यदि कॉन्स्टेबल उत्कृष्ट अत्यंत सेवा रिकॉर्ड रिकॉर्ड और समय से सभी प्रचार पाए जाते हैं, तो प्रशिक्षण से पहले एसआई तक पहुंच सकते हैं। लेकिन आमतौर पर ज्यादातर कॉन्स्टेबल एएसआई या हेड कॉन्स्टेबल पैड तक ही पहुंच जाते हैं। कॉन्स्टेबल की परीक्षा, हेल्थकेयर और सेवा पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन है।

12वीं पास कर सकते हैं कॉन्स्टेबल

कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए 12वीं (इंटरमीडियाएट) परीक्षा पास होनी चाहिए। आयु सीमा सामान्यतः 18 से 25 वर्ष होती है। इसके बाद एक उदाहरण स्पष्ट करना होगा। इसमें मैथ्स, रिजनिंग, जीएस और कंप्यूटर के क्वैश्चंस पूछे जाते हैं। फिर एफ़िलिया क्लियर करना होता है।

इसके लिए 170 मीटर ऊंचाई और फुलाकर चेस्ट का माप 81 सेंटी मीटर और फुलाकर 85 सेंटी मीटर होना चाहिए। 1600 मीटर दौड़ 6 मिनट में पूरी होती है। लॉन्ग जंप 14 फीट जंपना होता है। वहीं 3 फीट 9 इंच ऊंची जंप भी करना होगा।

हालाँकि, अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग राज्यों में कॉन्स्टेबल रिक्रूटमेंट में एजुकेशनल और प्लांट्स क्वाल असिस्टेंट और एज लिमिट अलग-अलग हैं। साथ ही रिजर्व्ड क्लासिटेमिक गेम्स को भी छूट दी गई है।

2. सब इंस्पेक्टर (एसआई)

इस पोस्ट पर डायरेक्ट रिक्रूटमेंट है और सिलेक्टेड गुड़िया में सीधे सब इंस्पेक्टर (SI) शामिल हैं। उद्यम प्रभारी या स्टोक इन्चार्ज को भी कहा जाता है। एसआई की परीक्षा, कंपनी और सेवा पूरी तरह से राज्य सरकार के अधीन है।

एसआई कोर्ट के अंदर अनाथालय का काम कर सकते हैं। यानी पुलिस विभाग के अंदर ये सबसे छोटी रैंक है, जो कोर्ट जा सकता है। तीन ऊपरी रैंक वाले अधिकारी अदालत में जा सकते हैं, जबकि नीचे के रैंक वाले अदालत में अंतिम रैंक वाले वकील नहीं कर सकते। आम तौर पर उपयोगिता एएसपी या एसीपी लेवल पर होता है। सब इंस्पेक्टर के एसपी बनने का मौका बहुत कम है।

ग्रेजुएट्स बन सकते हैं SI

किसी भी प्रकार का ट्रांसलेशन होना चाहिए। 21 से 28 वर्ष के बीच आयु होनी चाहिए। इसमें 3 स्टेप्स होते हैं- पहला रिटन एग्ज़ाम, दूसरा स्टेप्स है चप्पल, जिसमें केवल रनिंग और माप-तौल होता है। तीसरा स्टेप है मेडिकल।

भर्ती के लिए 168 सेमी हाइट होनी चाहिए। अगर लड़की हैं तो 152 सेमी हाइट होनी चाहिए। 28 मिनट में 4,800 किमी की दौड़ होती है। लड़कियों को 16 मिनट में 2,400 किमी तय करना होता है। एग्ज़ाम में मैथ, रिजनिंग, जीके और लैंगवेज़ के क्वेश्चंस पूछे जाते हैं।

इंस्पेक्टर, ऊपर की दुकान की जिम्मेदारी उन्हें मध्य प्रदेश में थाना इन्चार्ज (TI) यूपी में SO (स्टेशन ऑफिस) और दिल्ली में SHO (स्टेशन हाउस ऑफिस) में निभाना है।

इंस्पेक्टर, ऊपर की दुकान की जिम्मेदारी उन्हें मध्य प्रदेश में थाना इन्चार्ज (TI) यूपी में SO (स्टेशन ऑफिस) और दिल्ली में SHO (स्टेशन हाउस ऑफिस) में निभाना है।

3. डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी)

डीएसपी पर प्रवेश करने वाला पीपीएस यानी प्रांतीय पुलिस सेवा होती है। इसके लिए स्टेट पब्लिक सर्विस कमीशन (पीसीएस) एग्ज़ाम क्लियर करना होता है। इसमें आगे आईपीएस बनने का मौका मिलता है। ये मुख्यतः DIG की पोस्ट तक पहुंच सकते हैं।

राज्य पीएससी क्लियर करने वाले हैं डीएसपी

स्टेट पीएससी परीक्षा के लिए गेम्स के पास ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। हालाँकि, कुछ राज्यों में एपियरिंग यानी फ़ाइनल ईयर की लड़ियाँ भी आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा आयु सीमा आम तौर पर 21-40 वर्ष (अलग-अलग राज्य अलग-अलग) होती है।

इसके अलावा, डीएसपी पद के लिए फिटनेस फिटनेस अनिवार्य है। पुरुषों की लंबाई- 165 से 168 सेमी और महिलाओं की लंबाई 150-152 सेमी होनी चाहिए।

यूपीपीसीएस, बीपीएससी, एमपीपीएससी, आरपीएससी, यूकेपीएससी जैसे हरियाणा पीसीएस की विस्तृत पात्रता इसकी अधिसूचना में दी गई है।

4. मेमोरियल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (एएसपी)

एएसपी पर प्रवेश करने वाला भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस होता है। सहायक भर्ती केंद्र सरकार करती है, जो आगे उत्तर प्रदेश को लौट कर देती है।

यूपीएससी क्लियर करने वाले हैं एएसपी

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (सीएसई) क्लियर करने वाले लड़ियां एएसपी में शामिल हैं। इसके लिए किसी भी विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन डिग्री होनी चाहिए। प्रोफेशनल डिग्री धारक यानी एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, सीए आदि ग्रेजुएट भी इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। किशोरावस्था की उम्र 21 से 32 साल के बीच होनी चाहिए।

आईपीएस के लिए आईपीएल स्टैंडर्ड बहुत अहम हैं। पुरुष की लंबाई 165 सेमी और महिला की लंबाई 150 सेमी होनी चाहिए। 89 इंच छाती का फुलाव होना चाहिए।

इसके अलावा, मायोपिया -4.00D तक और हाइपरमेट्रोपिया +4.00D तक होना चाहिए। साथ ही, कलर ब्लाइंडनेस नहीं होना चाहिए।

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