नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट और संभावित सप्लाई चेन बाधाओं को देखते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की. प्रधानमंत्री आवास पर साढ़े तीन घंटे तक चली इस मैराथन बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और एनएसए अजीत डोभाल सहित कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल हुए. एलपीजी गैस सिलेंडर, पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन सहित तमाम मुद्दों पर पीएम को मंत्रालयों की तरफ से अपडेट दिए गए. प्रधानमंत्री का स्पष्ट और सख्त संदेश दिया कि इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के बीच देश में किसी भी कीमत पर जरूरी सेवाएं और आम जनता की जरूरतें प्रभावित नहीं होनी चाहिए.
मीटिंग के मुख्य रणनीतिक प्वाइंट
· सप्लाई आपूर्ति सुनिश्चित करना: पीएम ने पेट्रोलियम और खाद मंत्रालयों को निर्देश दिया कि तेल, गैस और उर्वरकों का पर्याप्त बफर स्टॉक बनाए रखें ताकि अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता का असर भारत पर न पड़े.
· सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स: एनएसए अजीत डोभाल ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ और लाल सागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर ब्रीफिंग दी, जिस पर पीएम ने वैकल्पिक समुद्री मार्गों और कूटनीतिक सुरक्षा पर जोर दिया.
· आम आदमी को राहत: बैठक में स्पष्ट किया गया कि वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव का बोझ सीधे तौर पर आम नागरिक पर न आए, इसके लिए सरकार हर संभव आर्थिक कदम उठाएगी.
अजीत डोभाल ने दिए पीएम को अपडेट
मिडिल ईस्ट में गहराते युद्ध के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर आपातकालीन उच्च स्तरीय बैठक में वित्त मंत्री निरमला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल मौजूद हैं. प्रधानमंत्री देश में तेल, गैस और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स की बारीकी से समीक्षा कर रहे हैं. सभी मंत्रालय के असफरों से वो अपडेट ले रहे हैं.
सप्लाई चेन पर मंडराता खतरा
28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब अपने तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर नियंत्रण कर जहाजों की आवाजाही को सीमित करने से वैश्विक शिपिंग रूट बुरी तरह प्रभावित हुआ है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, इसलिए इस समुद्री मार्ग की नाकेबंदी भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक चुनौती बन गई है.
सरकार ने उठाए अहम कदम
मिडिल ईस्ट संकट के बीच सरकार ने घरेलू और व्यावसायिक LPG की आपूर्ति के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी सामान्य बनी हुई है और पैनिक बुकिंग में कमी आई है. सरकार ने राज्यों को कमर्शियल LPG का आवंटन बढ़ाते हुए अस्पताल और शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता दी है. कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में छापेमारी जारी है. साथ ही, घरेलू और व्यावसायिक स्तर पर PNG कनेक्शन विस्तार और बंदरगाहों के सामान्य संचालन पर जोर दिया जा रहा है.
पीएम मोदी का ‘नेशनल कैरेक्टर’ टेस्ट पर जोर
इससे पहले 12 मार्च को प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि पश्चिम एशिया का युद्ध दुनिया के लिए एक बड़ी परीक्षा है. उन्होंने इसे राष्ट्रीय चरित्र की महत्वपूर्ण कसौटी बताते हुए जनता से धैर्य और जागरूकता की अपील की थी. सरकार का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक अस्थिरता का असर भारतीय उपभोक्ताओं की जेब और घरेलू उद्योगों पर न पड़े.
कूटनीतिक सक्रियता और रणनीति
युद्ध शुरू होने के बाद से पीएम मोदी लगातार वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं. उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, कतर, इजरायल और ईरान सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है. आज की बैठक में इन कूटनीतिक चर्चाओं के नतीजों और वैकल्पिक सप्लाई रूट पर भी विचार किया जा सकता है.





