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Keoladeo National Park: भरतपुर के केवलादेव नेशनल पार्क में सरसों के 3D स्टैचू इन दिनों पर्यटकों के लिए नया आकर्षण बन गए हैं. इन स्टैचू को सरसों के खेतों की थीम पर डिजाइन किया गया है, जो देखने में बेहद आकर्षक लगते हैं. पार्क में आने वाले पर्यटक इनके साथ जमकर फोटो और सेल्फी ले रहे हैं. खासकर युवा वर्ग में यह जगह तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि पार्क के अनुभव को भी और यादगार बना रही है.
भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क इन दिनों एक नए और अनोखे आकर्षण के कारण चर्चा में है. यहां पार्क प्रशासन द्वारा लगाए गए सरसों सारस के 3D स्टैचू पर्यटकों के बीच खासा आकर्षण का केंद्र बन गए हैं. प्राकृतिक सुंदरता और पक्षियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध इस पार्क में अब इन कलात्मक स्टैचू ने पर्यटकों के अनुभव को और भी यादगार बना दिया है.

पार्क में लगाए गए ये 3D स्टैचू सारस पक्षियों की जीवंत झलक प्रस्तुत करते हैं. इन्हें इस तरह से डिजाइन किया गया है कि देखने वाले को ऐसा महसूस होता है. मानो असली सारस सामने खड़े हों यही वजह है कि यहां आने वाले पर्यटक इन स्टैचू के साथ फोटो और सेल्फी लेने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं. बच्चे हों या बड़े, हर कोई इन आकर्षक आकृतियों के साथ अपनी यादों को कैमरे में कैद कर रहा है.

पार्क प्रशासन का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं है. बल्कि इसके जरिए पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय जैव विविधता के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा रही है. सारस पक्षी भारतीय पारिस्थितिकी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इन स्टैचू के माध्यम से लोगों को इनके महत्व के बारे में संदेश देने की कोशिश की गई है. देश-विदेश से आने वाले सैलानी जहां एक ओर केवलादेव की हरियाली, झीलों और पक्षियों का आनंद लेते हैं.
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वहीं अब ये 3D स्टैचू उनके लिए एक अतिरिक्त आकर्षण बन गए हैं. कई पर्यटक खास तौर पर इन स्टैचू के साथ तस्वीरें लेने के लिए रुकते नजर आते हैं. जिससे पार्क का माहौल और भी जीवंत दिखाई देता है.स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि इस तरह की पहल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि लोगों का जुड़ाव भी प्रकृति के साथ और मजबूत होगा

इन स्टैचू के साथ ली गई तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं. जिससे केवलादेव नेशनल पार्क की लोकप्रियता और बढ़ रही है. सारसों के ये 3D स्टैचू केवल सजावट नहीं बल्कि एक संदेश हैं. प्रकृति से जुड़ने का, उसे समझने का और उसे संरक्षित रखने का यही कारण है कि केवलादेव का यह नया प्रयोग पर्यटकों के लिए खास और यादगार अनुभव बनता जा रहा है.





