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Parliament Budget Session LIVE Updates: गृह मंत्री अमित शाह आज ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन और विनियमन) विधेयक, 2026’ पेश करने वाले हैं. इस CAPF बिल को लेकरराज्यसभा में चर्चा के दौरान सरकार और वि…और पढ़ें
गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में अहम ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन और विनियमन) विधेयक, 2026’ पेश करने वाले हैं.
ईद और फिर शनिवार-रविवार की लंबी छुट्टी के बाद संसद के बजट सत्र की कार्यवाही आज फिर शुरू हुई. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में अहम ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन और विनियमन) विधेयक, 2026’ पेश करने वाले हैं. उधर महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्तावित बिल को लेकर सरकार ने कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अहम बैठक की.
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन और विनियमन) विधेयक का मकसद केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) में अधिकारियों की भर्ती, प्रतिनियुक्ति, पदोन्नति और सेवा शर्तों को एक समान कानून के तहत विनियमित करना है. फिलहाल CRPF, BSF, ITBP और SSB जैसे बल अलग-अलग कानूनों के तहत संचालित होते हैं. सरकार का मानना है कि एक समान ढांचा न होने से प्रशासनिक दिक्कतें और सेवा विवाद बढ़ते हैं.
इस बिल के तहत आईजी स्तर के 50% पद आईपीएस अफसरों से भरे जाने का प्रस्ताव है. इसके अलावा एडीजी स्तर के कम से कम 67% पद आईपीएस अधिकारियों को दिए जाएंगे. वहीं एसडीजी और डीजी स्तर के सभी पद प्रतिनियुक्ति के जरिए भरे जाएंगे.
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महिला आरक्षण बिल का ’50+33′ फॉर्मूला
केंद्र सरकार इसी सत्र में महिला आरक्षण संशोधन बिल लाने की तैयारी में है जो भारतीय चुनावी राजनीति के ढांचे को पूरी तरह बदल देगा. इस बिल का सबसे क्रांतिकारी पहलू सीटों का नया फॉर्मूला है. इसके तहत लोकसभा की कुल सीटों में 50% की वृद्धि की जाएगी जिसके बाद बढ़ी हुई कुल सीटों में से 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. खास बात यह है कि यह पूरा परिसीमन और आरक्षण 2011 की जनगणना के आधार पर तय किया जाएगा. सरकार का लक्ष्य इस ऐतिहासिक सुधार को जल्द लागू करना है, ताकि 2029 का लोकसभा चुनाव इसी नए फॉर्मूले के तहत लड़ा जा सके. यह कदम संसद में महिलाओं की भागीदारी को निर्णायक रूप से बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा.
महिला आरक्षण बिल की तैयारियां तेज
महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की तैयारियां तेज हो गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्तावित बिल को लेकर सरकार ने कई विपक्षी दलों के नेताओं के साथ अहम बैठक की. बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह , संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मौजूद थे. सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में शिवसेना (उद्धव गुट), एआईएमआईएम, एनसीपी (शरद पवार गुट), बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए. हालांकि सूत्रों ने बताया कि इस अहम बैठक में कांग्रेस शामिल नहीं हुई, जिससे इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है.
VIP कल्चर समाज के बड़ा खतरा- जया बच्चन
राज्यसभा सांसद जया बच्चन ने वीआईपी संस्कृति को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने इसे एक गंभीर विषय बताया. सांसद ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ती वीआईपी संस्कृति की इस प्रवृत्ति पर वह कड़ी आपत्ति जता रही हैं. उन्होंने वीआईपी संस्कृति को समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया ौर कहा कि यह वीआईपी संस्कृति विशेष रूप से दिल्ली जैसे महानगर में आम नागरिकों के जीवन को बाधित कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जब भी किसी वीआईपी का आवागमन होता है, चाहे वह राजनेता हो, उच्च अधिकारी हो या कोई अन्य गणमान्य व्यक्ति, तो सड़कों पर अन्य लोगों को रोक दिया जाता है. ट्रैफिक डायवर्जन किए जाते हैं और आम लोगों को लंबे समय तक अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ता है.
‘पीएम मोदी की वजह से चैन की नींद’
बीजेपी सांसद मनन कुमार मिश्रा ने कहा, ‘… प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद देश को बहुत आगे पहुंचाया है. आर्थिक दृष्टिकोण से आज हम चौथी शक्ति हैं और बहुच जल्द हम तीसरी शक्ति बनेंगे… आज विश्व युद्ध की स्थिति में है और सारा विश्व बहुत संकट के दौर से गुजर रहा है… यह हमारे प्रधानमंत्री मोदी की देन है कि हम चैन की नींद सो रहे हैं…’
‘बंगाल की जनता बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देगी’
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने ममता बनर्जी सरकार पर प्रहार करते हुए कहा, ‘अपने मुंह मियां मिट्ठू कोई भी बन सकता है. मुसलमानों का वोट प्रभावित करने के लिए वेशभूषा भी परिवर्तित कर ली हैं, लेकिन इस बार बंगाल में परिवर्तन की लहर चल रही है. बंगाल की जनता बंगाल को बांग्लादेश नहीं बनने देगी और TMC का इरादा ख़ाक में मिल जाएगा.’
‘हम एक सेंसिटिव दौर में हैं’
पश्चिम एशिया में जारी ईरान-इजरायल जंग से आई ऊर्जा संकट पर कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कहा, ‘… सभी को डिप्लोमेसी को मौका देने की ज़रूरत है. एनर्जी इस्तेमाल करने वाले देशों के लिए हालात हर पल और भी गंभीर होते जा रहे हैं, क्योंकि यह सिर्फ़ क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस का मामला नहीं है, बल्कि फर्टिलाइज़र, खाने-पीने की चीज़ों और फार्मास्यूटिकल्स का भी मामला है… पूरी सप्लाई चेन में रुकावट आ गई है. हम एक सेंसिटिव दौर में आ गए हैं…’
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ला जा रहा बिल
यह विधेयक ऐसे समय में लाया जा रहा है जब सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2025 में अपने फैसले में CAPFs में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति कम करने और कैडर रिव्यू करने के निर्देश दिए थे. केंद्र सरकार की पुनर्विचार याचिका भी खारिज हो चुकी है.
शशि थरूर ने उठाए सवाल
विधेयक पेश होने से पहले शशि थरूर ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर CAPF जवानों और अधिकारियों से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा है. थरूर ने बताया कि उन्हें ‘एलायंस ऑफ ऑल एक्स-पैरामिलिट्री फोर्सेज वेलफेयर एसोसिएशन’ की ओर से एक मांग पत्र मिला है, जिसे उन्होंने सरकार तक पहुंचाया है. यह संगठन CRPF, BSF, ITBP, SSB, CISF और असम राइफल्स के 20 लाख से अधिक सदस्यों का प्रतिनिधित्व करता है.
CAPFs बिल 2026 को लेकर संसद में चर्चा के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है. एक ओर सरकार इसे सुधारात्मक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष और पूर्व पैरामिलिट्री कर्मी इससे जुड़े कई मुद्दों पर सवाल उठा रहे हैं.





