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पंडित सुंदरलाल शर्मा जी सामाजिक समरसता के महामानव थे_विधायक रोहित साहू पंडित सुंदरलाल शर्मा के जयंती पर त्रिवेणी संगम साहित्य समिति ने करवाया राज्यस्तरीय काव्य पाठ प्रतियोगिता 10 जिलों के कवि साहित्यकारों ने किया प्रतिभाग

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✍️ टीवी 1 इंडिया न्यूज़ संवाददाता विक्रम कुमार नागेश की रिपोर्ट गरियाबंद छत्तीसगढ़

गरियाबंद _स्थानीय साहू छात्रावास भवन में त्रिवेणी संगम साहित्य समिति के द्वारा पंडित सुंदरलाल शर्मा की जयंती के मौके पर रविवार को काव्य पाठ प्रतियोगिता एवम सम्मान समारोह का आयोजन किया गया जिसमें प्रदेश के लगभग 10 जिलों से बड़ी संख्या में कवि एवं साहित्यकार पहुंचे हुए थे।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजिम विधायक रोहित साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि पंडित सुंदरलाल शर्मा ने इस क्षेत्र में जन्म लिया और इस भूमि पर हम भी रहते हैं!हमारा जन्म हुआ है यह हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने समाज सुधार तथा समरसता का उत्कृष्ट कार्य किया।छत्तीसगढ़ राज्य की कल्पना भी उन्होंने ही की थी जो आज साकार हुआ है।ऐसे महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं आदि कवि की प्रतिमा राजिम में विराजमान है।विधायक रोहित साहू ने त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम नवापारा के कार्यो की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम वास्तविक में प्रेरक है, जो आने वाले पीढी को अतीत से जोड़ने का कार्य करती है|यहाँ साहित्य के बड़े-बड़े पुरोधा बैठे हुए हैं आने वाले 1 फरवरी से राजिम कुंभ कल्प मेला में क्षेत्रीय साहित्यकारों को अलग से मंच मिले तथा उनके लिए कार्यालय स्थापित करने का पूरा प्रयास होगा। ‎राजिम साहित्य के शक्तिपीठ तथा आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र-डॉ.अभिलाषा बेहार कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सचिव डॉ. अभिलाषा बेहार ने कहा कि इस आयोजन में छ ग के 10 जिले के साथ साथ नागपुर महाराष्ट्र एवम जोधपुर राजस्थान के साहित्यकार शामिल हुए इसके लिए आप सभी धन्यवाद के पात्र है। साहित्यकार कोई सामान्य इंसान नहीं होता उनमें ब्रह्म तत्व आ जाते हैं आप सृजन करते हैं और जो सृजन करता है वह सामान्य इंसान के बूते का काम नहीं है जहां-जहां माता के अंग गिरे वहां शक्तिपीठ स्थापित हुए, जहां-जहां ऐसे साहित्यकार पैदा होते हैं वह क्षेत्र साहित्य के शक्तिपीठ होते हैं। उनमें से एक साहित्य के शक्तिपीठ राजिम है। यहां पंडित सुंदरलाल शर्मा संत कवि पवन दीवान और न जाने कितने बड़े-बड़े साहित्यकारों ने जन्म लिया। राजिम छत्तीसगढ़ राज्य में एक मणि की तरह चमकता हुआ स्थल है। छत्तीसगढ़ में एक ही कुंभ होता है वह राजिम कुंभ है। साहित्य के शक्तिपीठ के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र है।उन्होंने राजभाषा आयोग के बारे में बताते हुए कहा की राजभाषा आयोग निशुल्क पुस्तक प्रकाशन करने के साथ विमोचन का काम भी करती है।अपने उद्बोधन के अंत में अपने पिता पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे की एक शानदार कविता सुनाई, पंक्ति देखिए-कलम सलामत रहे तो किस्तों में क्यों लिखूं,आप बताइए भाई साहब मैं किसी पर कविता लिखूं। ‎‎ नपं.अध्यक्ष महेश यादव ने कहा- राजिम पंडित सुंदरलाल शर्मा की कर्म स्थली ‎‎विशिष्ट अतिथि के आसंदी से नगर पंचायत अध्यक्ष महेश यादव ने भरे मंच से राजिम विधायक की उपस्थिति पर मांग किया कि राजिम कुंभ मेला में क्षेत्रीय कवियों को अलग से मंच प्रदान किया जाय। उन्होंने आगे अपने उद्बोधन में कहा कि राजिम पंडित सुंदरलाल शर्मा के कर्मभूमि रही है। इसलिए हमें गर्व होता है कि हमारा जन्म राजिम में हुआ है उन्होंने अछूतोंउधार के लिए बड़े-बड़े काम किया।देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व निछावर कर दिया था।पंडित सुंदरलाल शर्मा के राजिम में महामाया मंदिर के पास एक वाचनालय है उसे खुलवाना है।उसी दीवाल पर एक बहुत बढ़िया शब्द लिखा हुआ है जिसे मैं बचपन से पढ़ रहा हूं वह शब्द है-सत्य के लिए मत डरो, चाहे जियो या मरो। राजिम भक्तिन माता समिति के अध्यक्ष लाला साहू ने अपने उद्बोधन में कहा कि साहित्यकार वह व्यक्ति होता है जो अपनी कलम से देश में क्रांति लाते हैं।पंडित सुंदरलाल शर्मा जी 21 दिसंबर 1881 में ग्राम चंमसूर में जन्म लिया।आजादी के आंदोलन में अपने आप को हमेशा जोड़े रखा। वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उससे पूरा प्रदेश गौरांवित है ‎मुख्य वक्ता के रूप में अपनी बात रखते हुए,श्रवण कुमार साहू,प्रखर, शिक्षक एवं साहित्यकार ने कहा कि संत और सिपाही सदैव समाज हित में कार्य करते हैं!पंडित सुंदर लाल शर्मा जी सामाजिक पुनर्जागरण के महामानव थे!उनके विरासत को आगे बढ़ाना हम साहित्यकारों का परम कर्तव्य है|‎‎कविता प्रतियोगिता में प्रथम दिलीप टिकरिहा तथा दूसरा जुगेस चंद दास रहे!‎कविता प्रतियोगिता के निर्णायक भारत लाल साहू, कोमल सिंह साहू तथा पोयम शरण साहू थे।निर्णायकों के निर्णय के अनुसार प्रथम स्थान पिरदा भिंभौरी,बेमेतरा जिला के कवि दिलीप टिकरिहा ने प्राप्त किया,दूसरे स्थान पर कोसरंगी, आरंग के जुगेसचंद्र दास रहे।तीसरा स्थान कुम्हारी दुर्ग की शशि तिवारी ने प्राप्त किया।चतुर्थ स्थान रानीपरतेवा,छुरा के सूरज प्रकाश एवं पंचम स्थान बलौदा बाजार की डॉ. तुलेश्वरी धुरंधर रही।इस मौके पर त्रिवेणी संगम साहित्य सम्मान 2025 रामेश्वर साहू रंगीला को प्रदान किया गया।मंच पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सरपंच संघ फिंगेश्वर के अध्यक्ष हरीश साहू, नगर पंचायत के सभापति आकाश सिंह राजपूत,त्रिवेणी संगम साहित्य समिति राजिम के अध्यक्ष मकसूदन साहू बरीवाला,वरिष्ठ कवि नूतन साहू,पंडित सुंदरलाल शर्मा के परिजन,वरिष्ठ साहित्यकार दिनेश चौहान,कवि एवं साहित्यकार संतोष कुमार सोनकर मंडल,गीतकार उमेश श्रीवास सरल अमलीपदर इत्यादि उपस्थित थे।इस अवसर पर मकसुदन साहू बरिवाला कृत” बरीवाला”पुस्तक की समीक्षा शिक्षक साहित्यकार श्रवण कुमार साहू” प्रखर ने किया।कार्यक्रम का संचालन किशोर निर्मलकर ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख रूप से रोहित साहू,माधुर्य,नरेंद्र पार्थ,छग्गु यास अडिल,युगल किशोर साहू”जिज्ञासु”मोहनलाल मानिकपन, संतोष प्रकृति आदि का विशेष रूप से सहयोग रहा।

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