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न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में 47 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट पर 2024 चुनाव अभियान के दौरान डोनाल्ड ट्रंप समेत अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रचने का आरोप है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, उन्होंने सुपारी किलर समझकर FBI के अंडरकवर एजेंटों को 5,000 डॉलर दिए.
पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट.
वॉशिंगटन: न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में एक 47 वर्षीय पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट के खिलाफ सनसनीखेज मुकदमा शुरू हुआ है. अमेरिकी अभियोजकों का आरोप है कि उसने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान अमेरिका के शीर्ष राजनीतिक नेताओं, जिनमें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं, की हत्या की साजिश रची. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक ब्रुकलिन की संघीय अदालत में पेश हुए आसिफ मर्चेंट ने अपने ऊपर लगे आतंकवाद और अन्य संघीय अपराधों के आरोपों से इनकार किया है. यदि वह दोषी साबित होता है तो उन्हें उम्रकैद की सजा हो सकती है.
ट्रंप के हत्या की साजिश कैसे पता चली?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, मर्चेंट अप्रैल 2024 में अमेरिका पहुंचा और नवंबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले ‘कॉन्ट्रैक्ट किलिंग’ की व्यवस्था करने की कोशिश की. उसने एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क किया, जिसे वह सुपारी किलर ढूंढने में सक्षम समझता था. लेकिन वह व्यक्ति बाद में FBI का मुखबिर बन गया और पूरी बातचीत रिकॉर्ड की गई. अदालत में बताया गया कि मर्चेंट ने 5,000 डॉलर एडवांस राशि के तौर पर दो लोगों को दिए, जिन्हें वह पेशेवर हत्यारा समझ रहे थे. लेकिन वे दोनों FBI के अंडरकवर एजेंट निकले.
रैली में गोलीबारी और भगदड़ का था प्लान
मामले के एक गवाह नदीम अली ने अदालत में गवाही दी कि मर्चेंट ने एक सार्वजनिक रैली में किसी बड़े राजनीतिक नेता को गोली मारने की योजना बनाई थी. कथित तौर पर हमले के बाद भगदड़ और प्रदर्शन करवाकर हमलावर को भागने का मौका देने की बात कही गई थी. नदीम अली ने बताया कि होटल में एक नैपकिन पर इमारतों, भीड़ और संभावित लक्ष्य की स्थिति का नक्शा बनाकर योजना समझाई गई. उन्होंने कहा, ‘मैं यह सुनकर हैरान रह गया.’
हालांकि अभियोजकों ने किसी भी टार्गेट का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं बताया, लेकिन अदालत के दस्तावेजों में संकेत है कि ट्रंप समेत वरिष्ठ अमेरिकी नेता संभावित निशाने पर थे. मर्चेंट के लैपटॉप से ट्रंप की रैलियों के स्थानों से जुड़ी खोज भी मिली बताई गई है.
ईरान कनेक्शन की भी चर्चा
अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह भी संकेत दिया कि मर्चेंट का ईरान से संबंध रहा है. दस्तावेजों के अनुसार, वह पहले ईरान में रह चुका है. अमेरिकी अधिकारियों ने 2020 में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद अमेरिकी नेताओं के खिलाफ संभावित ईरानी बदले की चेतावनी दी थी. हालांकि ईरान ने ऐसे किसी भी हत्या की साजिश में शामिल होने के आरोपों को खारिज किया है और इन्हें ‘बेबुनियाद’ बताया है.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





