ईरान के कहने पर ट्रंप को मारने चला था पाकिस्तानी, अब US की जेल में सड़ेगा, कौन है-कैसे रची साजिश?


Pakistan Man Asif Merchant News: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश के मामले में पाकिस्तानी आसिफ मर्चेंट दोषी करार हुआ है. अमेरिका में एक संघीय अदालत ने पाकिस्तानी नागरिक आसिफ मर्चेंट को आतंकवाद और ‘मर्डर फॉर हायर के मामले में दोषी ठहराया है. अमेरिकी अदालत के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकी आसिफ मर्चेंट ने ईरान के कहने पर डोनाल्ड ट्रंप को मारने की साजिश रची थी.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, आसिफ मर्चेंट ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रशिक्षित ऑपरेटिव था और उसे अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रचने के लिए भेजा गया था. जांच में सामने आया कि आसिफ मर्चेंट अप्रैल 2024 में अमेरिका पहुंचा था और जून में न्यूयॉर्क में ऐसे लोगों से मिला जिन्हें वह सुपारी किलर समझ रहा था. लेकिन वे असल में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अंडरकवर अधिकारी थे.

कैसे आसिफ मर्चेंट की खुली पोल

आसिफ मर्चेंट ने उन्हें एक अमेरिकी राजनेता या सरकारी अधिकारी की हत्या के लिए 5,000 डॉलर एडवांस भी दिए थे. अधिकारियों के मुताबिक उसकी योजना थी कि वह अमेरिका छोड़ने के बाद हत्या का आदेश देगा. हालांकि, एफबीआई और अन्य एजेंसियों ने समय रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया और जुलाई 2024 में उसे गिरफ्तार कर लिया गया. अब इस मामले में मर्चेंट को उम्रकैद तक की सजा हो सकती है.

कौन है आसिफ मर्चेंट?

अमेरिका के मुताबिक, पाकिस्तानी आसिफ मर्चेंट ने 2022 के अंत या 2023 की शुरुआत में पाकिस्तान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के लिए काम करना शुरू किया, जहां उसे जासूसी से जुड़े तरीकों की ट्रेनिंग दी गई. इसमें काउंटर-सर्विलांस (निगरानी से बचने की तकनीक) भी शामिल थी. बाद में 2023 में उसे अमेरिका भेजा गया ताकि वह ऐसे लोगों की तलाश कर सके जिन्हें IRGC के लिए भर्ती किया जा सके और जो अमेरिका में ही रहकर काम कर सकें. मर्चेंट ने अदालत में स्वीकार किया कि उसे पता था कि IRGC एक घोषित आतंकी संगठन है. इस दौरान वह कई बार अपने IRGC हैंडलर से मिलने के लिए ईरान भी गया.

आसिफ ने क्या बताया?
आसिफ मर्चेंट ने बताया कि 2024 में उसे एक नए मिशन के साथ फिर से अमेरिका भेजा गया. उसका काम था माफिया के लोगों को भर्ती करना, ताकि वे दस्तावेज चुरा सकें, विरोध प्रदर्शन आयोजित कर सकें और तीन विशेष अमेरिकी सरकारी अधिकारियों या राजनेताओं में से किसी एक की हत्या की व्यवस्था कर सकें. इसी मकसद से उसने न्यूयॉर्क में अपने एक परिचित नदीम अली से संपर्क किया, जिसे वह अपनी साजिश में मददगार समझ रहा था. लेकिन नदीम अली ने इसकी जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को दे दी और वह उनका गोपनीय स्रोत बन गया.

जून की शुरुआत में मर्चेंट ने न्यूयॉर्क में अली से मुलाकात की और हत्या की साजिश के बारे में बताया. उसने अली से कहा कि उसके पास उसके लिए एक मौका है और हाथ से फिंगर गन का इशारा करते हुए संकेत दिया कि यह काम किसी की हत्या से जुड़ा है. मर्चेंट ने कहा कि जिन लोगों को निशाना बनाया जाएगा, वे अमेरिका में ही होंगे. उसने अली से कहा कि वह ऐसे लोगों से मुलाकात तय कराए जिन्हें मर्चेंट इन कामों के लिए किराए पर रख सके. मर्चेंट ने बताया कि उसकी योजना में कई आपराधिक गतिविधियां शामिल थीं:

1. किसी लक्ष्य के घर से दस्तावेज या यूएसबी ड्राइव चुराना,
2. एक विरोध प्रदर्शन आयोजित करना
3. और किसी राजनेता या सरकारी अधिकारी की हत्या करना.

कौन था अली, क्या बात हुई थी?
उस मुलाकात में मर्चेंट ने संभावित हत्या के तरीकों पर भी चर्चा शुरू की और अली से पूछा कि अलग-अलग परिस्थितियों में वह लक्ष्य को कैसे मार सकता है. उसने कहा कि जिस व्यक्ति को निशाना बनाया जाएगा, उसके आसपास कड़ी सुरक्षा होगी. मर्चेंट ने कहा कि हत्या तब करवाई जाएगी जब वह अमेरिका छोड़ देगा और वह विदेश से कोड शब्दों के जरिए अली से संपर्क करेगा. अली ने पूछा कि क्या उसने अपने “पार्टी” या संपर्क व्यक्ति से बात की है. मर्चेंट ने जवाब दिया कि उसने बात की है और उसे योजना को अंतिम रूप देकर अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया है। बाद में मर्चेंट ने बताया कि यह “पार्टी” उसका IRGC हैंडलर था.

अमेरिकी एजेंट से खा गया धोखा

जून के मध्य में मर्चेंट न्यूयॉर्क में उन कथित सुपारी किलरों से मिला, जो असल में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अंडरकवर अधिकारी थे. मर्चेंट ने उनसे कहा कि उसे तीन काम चाहिए: दस्तावेज चोरी करना, राजनीतिक रैलियों में विरोध प्रदर्शन करवाना और एक “राजनीतिक व्यक्ति” की हत्या करना। उसने कहा कि किसे मारना है, इसका निर्देश वह अमेरिका छोड़ने के बाद देगा. इस दौरान मर्चेंट इंटरनेट पर राजनीतिक रैलियों के स्थानों की जानकारी भी खोजता रहा और वहां की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी रिपोर्ट अपने IRGC हैंडलर को भेजता रहा.



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