‘ओसामा किलर’ SEAL टीम-6 का फेल मिशन से हुआ था जन्म, ईरान में घुसकर बचा लाए अमेरिकी पायलट, कितना दम?


साल 2009 की बात है, संयुक्त राष्ट्र की तरफ से केन्या, युगांडा, रवांडा जैसे अफ्रीकी देशों के लिए राहत सामग्री लेकर निकला अमेरिकी जहाज संकट में फंस गया. सोमालिया के रास्ते से गुजरते समय समु्द्री डाकुओं ने हमला करके जहाज के कैप्टन रिचर्ड फिलिप्स को बंधक बना लिया. आधुनिक दौर में ऐसा पहली बार हुआ कि अमेरिका के जहाज को हाथ लगाया गया. इस पर मशक्कत शुरू हुई और अमेरिका के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप सील टीम-6 ने लुटेरों को ढेर कर कैप्टन को सुरक्षित बचा लिया. यह तो महज ट्रेलर ही था. इसके 2 साल के बाद तो इसी स्पेशल फोर्स के जवानों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया कि दुनिया दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर रह गई. 2011 में पाकिस्तान के अंदर घुसकर दुर्दांत आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मार गिराया और बॉडी ले जाकर समुंदर की गहराइयों में दफन कर आए. यह स्पेशल यूनिट एक बार फिर से चर्चा में है और इसकी वजह है ईरान के साथ मौजूदा जंग के बीच F-15E विमान के घायल ऑफिसर को सुरक्षित बचा लाना. आइए यहां जानते हैं SEAL टीम 6 यानी DEVGRU के बारे में हर एक बात.

अमेरिका ने ईरान के अंदर घुसकर जाग्रोस पहाड़ियों में 24 घंटे से ज्यादा छिपे रहे जख्मी अमेरिकी पायलट को बचा लिया. वह F-15E लड़ाकू विमान को निशाना बनाए जाने के बाद वहां पैराशूट से कूद गया था. जान की बाजी लगाकर रेस्क्यू करने के बाद पूरी टीम सफलतापूर्वक वापस लौट आई. नेवल स्पेशल वारफेयर डेवलपमेंट ग्रुप को नेवी सील 6 टीम या शॉर्ट में DEVGRU भी कहा जाता है. यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसिक तलाशी और बचाव अभियान बताया है.

इस यूनिट के सदस्य बहुत कड़ी ट्रेनिंग लेते हैं. उन्हें कई सालों तक पहाड़, समुंदर, जंगल और आबादी वाले शहरी इलाकों में लड़ने की ट्रेनिंग दी जाती है. चाहे कोई भी मौसम हो या फिर कोई भी इलका, वे बिना झिझक अपने ऑपरेशन को अंजाम दे सकते हैं. स्पेशल जवान रात में भी देख सकते हैं. चुपके से दुश्मन के पास पहुंच सकते हैं. समुद्र, हवा, जमीन पर लड़ने के लिए ट्रेन्ड टीम 6 के सदस्यों को SEAL कहते हैं जो Sea, Air और Land का ही छोटा रूप है.

कलर कोड स्क्वैड्रन और हथियार
DEVGRU को भी आगे कलर कोड लाइन के स्क्वैड्रन में बांटा जाता है. ग्रीन टीम सलेक्शन और ट्रेनिंग के लिए होती है. इसके बाद ग्रे, ब्लैक, सिल्वर, गोल्ड, ब्लू, रेड स्क्वैड्रन को असॉल्ट से लेकर इंटेलिजेंस, सर्विलांस, डाइविंग तक के काम के बेस पर डिवाइड किया गया है. हर एक स्क्वैड्रन के सैनिकों को अलग-अलग ट्रूप्स में बांटा जाता है, जिसमें कमांडर और लेफ्टिनेंट रैंक के ऑफिसर अगुवाई करते हैं.

स्पेशल ट्रेनिंग के साथ ही नेवी सील 6 दुनिया के सबसे घातक और अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. लंबे समय तक लगातार फायरिंग में सक्षम Mk48 मशीन गन से लेकर हेकलर कोच HK416 असॉल्ट राइफल हो या क्लोज रेंज शॉट वाली ग्लॉक या Sig Sauer पिस्टल. एक किलोमीटर या इससे भी अधिक दूरी से निशाना लगाने में सक्षम कोल्ट Mk13 स्नाइपर राइफल हो या मैकमिलन TAC या फिर .50 कैलिबर वाली बैरेट M107A1 राइफल. ये सभी से लैस होते हैं.

ईरान की घटना से ही बनी थी यूनिट
ईरानी ऑपरेशन से चर्चा में आई सील-6 यूनिट का गठन भी 1980 में ईरान में ही हुई एक घटना के बाद किया गया था. 1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका समर्थित शाह पहलवी का शासन गिर गया था और वह देश छोड़कर बाहर निकल गए. राजधानी तेहरान में अमेरिका के 52 नागरिकों और राजनयिकों को बंधक बना लिया गया. ईरानी यह मांग कर रहे थे कि अमेरिकी बंधकों को छोड़ने के एवज में शाह को वापस सौंप दिया जाए, जिससे देश में मुकदमा चलवाया जा सके.

फेल मिशन से बनी सील-6
अमेरिका ने अपने बंधकों को ईरान से छुड़ाने के लिए 1980 में ऑपरेशन ईगल क्लॉ नाम से रेस्क्यू ऑपरेशन लॉन्च किया. यह ऑपरेशन फेल हुआ और एक हादसे की वजह से आठ अमेरिकी सैनिक मारे गए. सभी 52 बंधक एक साल तक कैद में रहे और कूटनीतिक प्रयासों से ही उनकी रिहाई संभव हो सकी. इस घटना के बाद ही अमेरिका ने खतरनाक मिशन को अंजाम दे सकने वाली स्पेशल सील-6 टीम को बनाने का फैसला किया. वैसे तो यह अमेरिकी नेवी की एक यूनिट है लेकिन इसका कंट्रोल ज्वाइंट स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड के अधीन होता है.

ईरान में पायलट को कैसे बचाया?
ईरान के साथ युद्ध के बीच 3 अप्रैल की रात अमेरिका का F15E लड़ाकू विमान गिर गया. विमान में बैठा वेपन सिस्टम ऑफिसर (WSO) ने पैराशूट के जरिए जान बचाई. वह करीब 7 हजार फीट की ऊंचाई पर जाग्रोस की पहाड़ी में बोयर अहमद प्रांत में उतरा. उसके पास एन्क्रिप्टेड बीकन और पिस्टल थी. ईरानी सेना और स्थानीय कबीले वाले उसे तलाशने लगे लेकिन वह 24 घंटे से अधिक समय तक पहाड़ियों में ही छिपा रहा. अमेरिका और इजरायल ने पूरा जोर लगा दिया.

अमेरिका ने इस्फहान से करीब 50 किलोमीटर की दूरी पर बेस बनाया और पहाड़ी वाली जगह पर रात के अंधेरे में पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया. इस दौरान दो MC-130J कमांडो II एयरक्राफ्ट और MH-6 लिटिल बर्ड हेलीकॉप्टर इस्तेमाल किए गए. लेकिन प्लेन के वहां फंसने पर नेवी सील ने दोनों को नष्ट कर दिया, जिससे ईरानियों के हाथ कुछ भी ना लग सके. इसके बाद सील टीम 6 ने घायल ऑफिसर को रेस्क्यू करके कुवैत तक पहुंचाया, जहां उसका इलाज चला.



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