दुनिया में केवल 49 लोगों के पास है यह ब्लड ग्रुप, इतना दुर्लभ कि एक बूंद की कीमत सोने से भी महंगा, क्यों है इतना खास


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What is RH-Null Rare Blood Group: दुनिया में करीब 800 करोड़ लोग हैं. लेकिन इन 800 करोड़ में से सिर्फ 45 से 50 लोग ही इतने खुशनसीब हैं कि उनके पास यह दुर्लभ ब्लड ग्रुप है. इस ब्लड ग्रुप का नाम RH-null ब्लड ग्रुप है. जिसके पास यह ब्लड ग्रुप है उसका खून सोने से भी ज्यादा कीमती है. इसलिए इसे गोल्डन ब्लड ग्रुप भी कहा जाता है. यह ब्लड ग्रुप आमतौर पर इंसानों में पाए जाने वाले 4 ब्लड ग्रुप से अलग है. इस बेशकीमती खून के बारे में आइए विस्तार से जानते हैं.

खून तो वैसे भी बेशकीमती होता है लेकिन यह खून नायाब है. क्योंकि यह खून धरती पर पैदा लिए कुल 800 करोड़ लोगों में सिर्फ 45 से 50 लोगों के पास मौजूद है. यह खून इतना नायाब है कि इसके एक बूंद की कीमत सोने से कई गुना महंगा हो सकता है. आमतौर पर हम इंसानों में चार तरह के ब्लड ग्रुप A, B, AB या O होते हैं. इनमें पॉजिटिव और निगेटिव कैटगरी होती है. लेकिन इन 45 लोगों के पास जो ब्लड ग्रुप है वह इन चारों में से कोई नहीं है. इसे Rh null ब्लड ग्रुप कहा जाता है.

Rh null ब्लड ग्रुप की खासियत यह है कि इस ब्लड ग्रुप वाले का खून धरती पर किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकता है. यह खून किसी भी व्यक्ति में सेट हो सकता है. लेकिन इस ब्लड ग्रुप वाले के साथ एक दुर्भाग्य भी है. जब इस ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को किसी के खून की जरूरत होगी तो इसके शरीर में किसी भी दूसरे व्यक्ति का खून सेट नहीं होगा. इसलिए अपनी जान बचाने के लिए इन्हें अपना ही खून स्टोर कर आपात काल के लिए रखना होता है. यही कारण है कि इनका जीवन हमेशा मेडिकल रिस्क पर रहता है.

Rh null ब्लड ग्रुप की खासियत यह है कि इस ब्लड ग्रुप वाले का खून धरती पर किसी भी व्यक्ति की जान बचा सकता है. यह खून किसी भी व्यक्ति में सेट हो सकता है. लेकिन इस ब्लड ग्रुप वाले के साथ एक दुर्भाग्य भी है. जब इस ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को किसी के खून की जरूरत होगी तो इसके शरीर में किसी भी दूसरे व्यक्ति का खून सेट नहीं होगा. इसलिए अपनी जान बचाने के लिए इन्हें अपना ही खून स्टोर कर आपात काल के लिए रखना होता है. यही कारण है कि इनका जीवन हमेशा मेडिकल रिस्क पर रहता है.

एक अध्ययन के अनुसार 2018 में जब दुनिया भर में इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों की खोज की गई तो केवल 45 लोगों में यह ब्लड ग्रुप पाया गया. हालांकि इनमें से केवल 9 लोग ही रक्तदान कर सकते हैं. अब ऐसे ब्लड ग्रुप वालों की संख्या में 4-5 लोग और जुड़ गए हैं. इस ब्लड ग्रुप की खोज 1960 में हुई थी. इसकी दुर्लभता के कारण इसे गोल्डन ब्लड कहा जाता था. इसका वास्तविक नाम आरएच शून्य है. यह खून केवल उन लोगों में पाया जाता है जिनका आरएच कारक शून्य 0 होता है. इस रक्त समूह वाले लोग अमेरिका, कोलंबिया, ब्राजील और जापान जैसे देशों में पाए जाते हैं.

एक अध्ययन के अनुसार 2018 में जब दुनिया भर में इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों की खोज की गई तो केवल 45 लोगों में यह ब्लड ग्रुप पाया गया. हालांकि इनमें से केवल 9 लोग ही रक्तदान कर सकते हैं. अब ऐसे ब्लड ग्रुप वालों की संख्या में 4-5 लोग और जुड़ गए हैं. इस ब्लड ग्रुप की खोज 1960 में हुई थी. इसकी दुर्लभता के कारण इसे गोल्डन ब्लड कहा जाता था. इसका वास्तविक नाम आरएच शून्य है. यह खून केवल उन लोगों में पाया जाता है जिनका आरएच कारक शून्य 0 होता है. इस रक्त समूह वाले लोग अमेरिका, कोलंबिया, ब्राजील और जापान जैसे देशों में पाए जाते हैं.

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वास्तव में खून की कोशिकाओं में उसकी सतह पर एक प्रोटीन की परत होती है. जिसके खून की कोशिकाओं में यह प्रोटीन मौजूद होता है, उसका खून Rh पॉजिटिव होता है जिसके खून में यह प्रोटीन नहीं है, उसे निगेटिव कहा जाता है. लेकिन गोल्डन ब्लड ग्रुप का खून में Rh फेक्टर होता ही नहीं है. यानी यह न तो पॉजिटिव होता है और न ही निगेटिव होता है. यह जीरो होता है. इसलिए इसे Rh 0 ब्लड ग्रुप कहा जाता है.

वास्तव में खून की कोशिकाओं में उसकी सतह पर एक प्रोटीन की परत होती है. जिसके खून की कोशिकाओं में यह प्रोटीन मौजूद होता है, उसका खून Rh पॉजिटिव होता है जिसके खून में यह प्रोटीन नहीं है, उसे निगेटिव कहा जाता है. लेकिन गोल्डन ब्लड ग्रुप का खून में Rh फेक्टर होता ही नहीं है. यानी यह न तो पॉजिटिव होता है और न ही निगेटिव होता है. यह जीरो होता है. इसलिए इसे Rh 0 ब्लड ग्रुप कहा जाता है.

गोल्डन ब्लड ग्रुप वालों का खून इसलिए भी दुर्लभतम होता है क्योंकि Rh (-) वाले लोगों का खून मुश्किल से ही मैच होता है. इसलिए गोल्डन ब्लड वाले लोग उसे आसानी से खून देकर जान बचा सकते हैं. Rh 0 ब्लड ग्रुप में किसी तरह का एंटीजन होता ही नहीं है. इसे इस तरह भी समझ सकते है. सामान्य तौर पर इंसान के खून के लाल रक्त कोशिकाओं में 61 तरह के Rh एंटीजन पाया जाता है. इसी के आधार पर हम ब्लड ग्रुप को 'पॉजिटिव' (+) और न होने पर 'नेगेटिव' (-) कहते हैं. Rh-null ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति के शरीर में 61 में से एक भी Rh एंटीजन नहीं होता. इसलिए इसे किसी भी ऐसे व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है जिसका Rh सिस्टम दुर्लभ हो.

गोल्डन ब्लड ग्रुप वालों का खून इसलिए भी दुर्लभतम होता है क्योंकि Rh (-) वाले लोगों का खून मुश्किल से ही मैच होता है. इसलिए गोल्डन ब्लड वाले लोग उसे आसानी से खून देकर जान बचा सकते हैं. Rh 0 ब्लड ग्रुप में किसी तरह का एंटीजन होता ही नहीं है. इसे इस तरह भी समझ सकते है. सामान्य तौर पर इंसान के खून के लाल रक्त कोशिकाओं में 61 तरह के Rh एंटीजन पाया जाता है. इसी के आधार पर हम ब्लड ग्रुप को ‘पॉजिटिव’ (+) और न होने पर ‘नेगेटिव’ (-) कहते हैं. Rh-null ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति के शरीर में 61 में से एक भी Rh एंटीजन नहीं होता. इसलिए इसे किसी भी ऐसे व्यक्ति को चढ़ाया जा सकता है जिसका Rh सिस्टम दुर्लभ हो.

इस ब्लड ग्रुप वाले के साथ एक दिक्कत भी है. इसका लाल रक्त कोशिकाओं का आकार थोड़ा असमान्य होता है. इस कारण ये कोशिकाएं जल्दी मर जाती है. और इससे ऐसे व्यक्तियों को अक्सर खून की कमी या एनीमिया भी हो सकता है. लेकिन इसे किसी अन्य व्यक्ति का खून सेट ही नहीं करेगा. ऐसे में इस आपात काल से निपटने के लिए इसी व्यक्ति से खून पहले से निकालकर रख लिया जाता है. डॉक्टर इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को आयरन से भरपूर फूड को खाने की सलाह देते हैं ताकि कभी भी खून की कमी न हो.

इस ब्लड ग्रुप वाले के साथ एक दिक्कत भी है. इसका लाल रक्त कोशिकाओं का आकार थोड़ा असमान्य होता है. इस कारण ये कोशिकाएं जल्दी मर जाती है. और इससे ऐसे व्यक्तियों को अक्सर खून की कमी या एनीमिया भी हो सकता है. लेकिन इसे किसी अन्य व्यक्ति का खून सेट ही नहीं करेगा. ऐसे में इस आपात काल से निपटने के लिए इसी व्यक्ति से खून पहले से निकालकर रख लिया जाता है. डॉक्टर इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को आयरन से भरपूर फूड को खाने की सलाह देते हैं ताकि कभी भी खून की कमी न हो.



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