Last Updated:
Azoospermia Problem in Men: कई पुरुषों का स्पर्म काउंट जीरो हो जाता है और इसकी वजह से पिता बनने में परेशानी आने लगती है. डॉक्टर सोनाली गुप्ता के अनुसार स्पर्म काउंट जीरो होने की वजह का पता लग जाए, तो अधिकतर मामलों में इसे रिवर्स किया जा सकता है. दवाओं, सर्जरी और कुछ तरीकों से स्पर्म काउंट दोबारा बढ़ाया जा सकता है.
डॉ. सोनाली गुप्ता के मुताबिक अधिकतर मामलों में सही ट्रीटमेंट से स्पर्म काउंट बढ़ाया जा सकता है.
Can Zero Sperm Count Be Reversed: आज के जमाने में अधिकतर लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान बिगड़ गया है. लोगों के सोने-जागने का रूटीन खराब हो गया है और स्ट्रेस हद से ज्यादा झेलना पड़ रहा है. इसका सीधा असर पुरुषों की फर्टिलिटी पर भी पड़ रहा है. कई युवा जीरो स्पर्म काउंट जैसी समस्या का शिकार हो रहे हैं. इसे मेडिकल की भाषा में एजोस्पर्मिया कहा जाता है. डॉक्टर्स की मानें तो जब किसी पुरुष की सीमेन रिपोर्ट में एक भी लाइव स्पर्म नहीं मिलता, तो इसे जीरो स्पर्म काउंट माना जाता है. ऐसी कंडीशन में सबसे पहले इसकी वजह का पता लगाया जाता है और फिर उसके अनुसार ट्रीटमेंट किया जाता है. वक्त रहते ट्रीटमेंट कराया जाए, तो अधिकतर मामलों में इस कंडीशन को रिवर्स किया जा सकता है.
ग्रेटर नोएडा के Bliss आईवीएफ एंड गायनी केयर सेंटर की स्पेशलिस्ट डॉ. सोनाली गुप्ता ने News18 को बताया कि सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि स्पर्म काउंट जीरो होने का कारण क्या है. कई बार शरीर में स्पर्म बनता है, लेकिन किसी रुकावट के कारण बाहर नहीं आ पाता है. इस कंडीशन को ऑब्स्ट्रक्टिव एजोस्पर्मिया कहा जाता है. ब्लॉकेज की कंडीशन में सर्जरी से रुकावट दूर कर दी जाती है. कई मामलों में इंजेक्शन के जरिए टेस्टिकल्स से सीधे स्पर्म निकाल लिए जाते हैं. इसका इस्तेमाल करके IVF के जरिए बच्चा पैदा किया जाता है. इस कंडीशन के अधिकतर मरीज IVF की मदद से आसानी से पिता बन सकते हैं.
डॉक्टर ने बताया कि कई मामलों में नॉन-ऑब्स्ट्रक्टिव एजोस्पर्मिया की कंडीशन पैदा हो जाती है. इसमें स्पर्म बनना ही बंद हो जाता है. आमतौर पर सीवियर इंफेक्शन, बुखार, टॉक्सिसिटी, हॉट वॉटर बाथ, लैपटॉप-मोबाइल गोद में रखने जैसे फैक्टर्स की वजह से यह कंडीशन पैदा होती है. इसमें बीमारियों का ट्रीटमेंट किया जाता है और इसके बाद अधिकतर मामलों में स्पर्म प्रोडक्शन शुरू हो जाता है. कुछ मामलों में जीरो स्पर्म काउंट का मुख्य कारण हार्मोनल असंतुलन होता है. शरीर में टेस्टोस्टेरोन, FSH और LH का स्तर कम होने पर शुक्राणुओं का निर्माण प्रभावित होता है. फर्टिलिटी विशेषज्ञ ब्लड टेस्ट के जरिए इन हार्मोन्स की जांच करते हैं. अगर समस्या हार्मोनल हो, तो दवाओं और इंजेक्शन के माध्यम से स्पर्म प्रोडक्शन को फिर से शुरू किया जा सकता है.
आईवीएफ स्पेशलिस्ट के मुताबिक अगर स्पर्म काउंट की समस्या का कारण तनाव, स्मोकिंग, शराब या गलत आदतें हैं, तो इसमें सुधार की पूरी संभावना रहती है. लंबे समय तक लैपटॉप गोद में रखना या बहुत टाइट कपड़े पहनना अंडकोष का तापमान बढ़ा देता है, जिससे स्पर्म निर्माण प्रभावित होता है. नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और नशे से दूरी बनाकर स्पर्म की क्वालिटी और काउंट दोनों में सुधार किया जा सकता है. आजकल बहुत सी तकनीक मौजूद हैं, जिनकी मदद से इस समस्या से निजात मिल सकती है. हालांकि लंबे समय तक इस समस्या को इग्नोर करने से स्पर्म काउंट हमेशा के लिए जीरो हो सकता है. ऐसे में लोगों को वक्त रहते अपनी जांच करानी चाहिए, ताकि सही समय पर ट्रीटमेंट शुरू किया जा सके.
About the Author

अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें





