‘इस्लामाबाद जाने से भी गुरेज नहीं लेकिन…’, अमेरिका के बातचीत के लिए ईरान ने रख दी सबसे बड़ी शर्त


Last Updated:

ईरान-अमेरिका के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान की मीडिएशन पर सस्पेंस खत्म होने का नाम लेने का नाम ले रहा है. ईरान के इस्लामाबाद शांतिवर्ता में भाग ना वाले खबरों के बीच विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बयान हलचल मचा दिया है. उन्होंने हाल के एक बयान में कहा कि उनकी टीम ने कभी इस्लामाबाद जाने से कभी इनकार नहीं किया, लेकिन वे ट्रंप की ‘अनुचित’ शर्तों के आगे नहीं झुकेंगे.

Zoom

अब्बास अराघची ने अमेरिका से बातचीत की शर्त (रॉयटर्स)

Iran-US Peace Talk: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के मैदान से शांतिवार्ता की हलचल एक बार फिर से तेज हो गई है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिका के साथ बातचीत के दरवाजे खुले रखते हुए एक बड़ा बयान दिया है. अरागची ने उन खबरों का खंडन किया है जिनमें कहा गया था कि ईरान ने पाकिस्तान द्वारा आयोजित मध्यस्थता वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने खुलासा किया था कि अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की एक प्रतिनिधिमंडल बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने को तैयार था. हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि ईरान ने इस बैठक में शामिल होने से मना कर दिया क्योंकि अमेरिका की शर्तें मानने को तैयार नहीं था.

अमेरिकी मीडिया का प्रोपगेंडा था

ईरानी विदेश मंत्री अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा, ‘ईरान की स्थिति को अमेरिकी मीडिया द्वारा गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. हम पाकिस्तान के प्रयासों के लिए उनके आभारी हैं और हमने इस्लामाबाद जाने से कभी इनकार नहीं किया. हमारी चिंता केवल उस अवैध युद्ध के स्थायी और निर्णायक अंत की शर्तों को लेकर है जो हम पर थोपा गया है.’

ट्रंप की अटैकिंग मोड बनाम ईरान की जिद

जंग के बीच डोनाल्ड ट्रंप का रुख बेहद सख्त बना हुआ है. ट्रंप ने हाल ही में तेहरान पर बमबारी करने और ईरान के पुलों और पावर प्लांटों को नष्ट करने की धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा है कि वह दो से तीन हफ्तों के भीतर ईरान में सैन्य अभियान को समेटना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए ईरान को उनकी शर्तों पर झुकना होगा. मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास की ओर से कहा गया कि ‘अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी. मध्यस्थों के जरिए केवल अनुचित और हद से ज्यादा मांगें की जा रही हैं. क्षेत्रीय शांति का स्वागत है, लेकिन यह याद रखना चाहिए कि यह युद्ध किसने शुरू किया.’

क्या संभावित समझौता?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पर्दे के पीछे एक डील पर चर्चा हो रही है. इस समझौते के तहत अमेरिका युद्धविरामके लिए तैयार हो सकता है, बशर्ते ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को इंटरनेशनल ट्रेड के लिए फिर से खोल दे. होर्मुज के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति ठप है, जिसे बहाल करना ट्रंप प्रशासन की प्राथमिकता है.

नए किरदारों की एंट्री

पाकिस्तान के प्रयासों में आई बाधा के बाद अब तुर्की और मिस्र इस गतिरोध को खत्म करने के लिए आगे आए हैं. वे इस्लामाबाद के बजाय दोहा या इस्तांबुल जैसे वैकल्पिक स्थानों पर बातचीत का प्रस्ताव दे रहे हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने उन दावों को आधारहीन बताया है.

About the Author

authorimg

Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

spot_imgspot_img