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New Cadre Allocation Policy 2026 for IAS, IPS, IFoS Officers

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5 मिनट पहले

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भारत सरकार ने यूपीएससी कैडर अलॉटमेंट के लिए 2017 से चली आ रही ‘जोन सिस्टम’ की व्यवस्था को खत्म कर दिया है। इसकी जगह नई ‘कैडर एलोकेशन लाइब्रेरी 2026’ लागू की गई है। इसके तहत अब ‘साइकिल सिस्टम’ के वैयक्तिकृत कैडर का बंटवारा होगा। ये मान्यताएं भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) पर एक-एक करके लागू होंगी।

जियो ग्राफिकल ग्रुप्स को नया ग्रुप बनाने का मौका मिला

यूपीएससी ने अब तक सभी मानकों और केंद्र शासित प्रदेशों के कुल 25 कैडर बनाए थे। इन्होनें जियोग्राफिकली 5 ज़ोन में आयोजित किया गया था- उत्तर, पश्चिम, दक्षिण, मध्य और पूर्व। यूपीएससी मेन क्लियरेंस के बाद चम्बल्स डीएएफ II फॉर्म भरते थे जिसमें पहले जोन और फिर सुपरमार्केट प्रिफरेंस को मौका मिला था। एक बार जिस स्टार्टअप में ऑफ़र की नियुक्ति होती है, परमानेंट उसी स्टेट में काम करना होता है। इसे ही कैडर कहते हैं।

नई नीति में सभी 25 कैडरों को वर्णानुक्रम अर्थात अल्फाबेटिकल क्रम (ए, बी, सी….जेड) में अरेंज कर 4 समूहों में विभाजित किया गया है:

  • समूह-I: एजीएमयूटी (दिल्ली/केंद्र शासित प्रदेश), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार, छत्तीसगढ़
  • समूह-II: गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश
  • समूह-III: महाराष्ट्र, मुख्यमंत्री, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, तेलंगाना, तेलंगाना
  • समूह-IV: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल

पुराने सिस्टम में मैन कंपनी अगर चॉकलेट ने नॉर्थ जोन के हरियाणा कैडर को प्राथमिकता दी। ऐसे में प्रोबेबिलिटी रहती थी कि अगर हरियाणा नहीं होता तो राजस्थान या उत्तर प्रदेश भी मिल जाता था। लेकिन नए सिस्टम में एक जोन के अंदर अल्फाबेटिकली अरेंज स्टेट मौजूद हैं। इसका मतलब एच-हरियाणा, जे-झारखंड और के-केरल एक जोन में होगा। ऐसे में फैक्ट्री हरियाणा के अलावा झारखंड, कर्नाटक और केरल में भी मिल सकती है।

हर साल अलग ग्रुप से शुरू होगा कैडर एलोकेशन

पुराने एस्टियोपॉस्टिक में रिव्यूटर टॉपर चॉइसल्स एक ही जोन योगदान थे, जिसमें कुछ जोन को जोड़ने के लिए मेरिटोरियस के ऑफर नहीं मिल रहे थे। नई असिस्टेव विचारधारा में अंधविश्वास लागू होगा। यानी हर साल अलग-अलग ग्रुप से कैडर एलोकेशन शुरू होगा।

मान लीजिए, इस साल ग्रुप 1 के राज्यों से अभ्यर्थियों की भर्ती शुरू हुई, तो अगले साल ग्रुप 2 के राज्यों से शुरू होगी। इससे लाभ यह होगा कि हर साल एक ही राज्य को सारी मेधावी की सुविधा नहीं मिलेगी। सभी राज्यों को समानता का मौका मिलेगा।

  • वर्ष 1: ग्रुप-I → ग्रुप-II → ग्रुप-III → ग्रुप-IV के क्रम में।
  • वर्ष 2: ग्रुप-I नीचे चला जाएगा और शुरुआत ग्रुप-II से होगी (II → III → IV → I)।
  • यह सुनिश्चित करता है कि हर साल एक ही राज्य (जैसे- उत्तर प्रदेश) को टॉप रैंक न मिले।

कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी वैकेंसी करती है

हर सेवा के लिए उनसे संबंधित कैडर कंट्रोलिंग कंपनियां मौजूद हैं। ये नियामक ही तय करते हैं कि किसी स्टेट या कैडर में कितनी वैकेंसी छिपी होगी।

  • आईएएस के लिए डीओपीटी (व्यक्तिगत एवं प्रशिक्षण विभाग)
  • आईपीएस के लिए गृह मंत्रालय (गृह मंत्रालय),
  • IFoS के लिए MoEF&CC (इंवायरमेंट मंत्रालय, फॉरेस्ट एड जलवायु परिवर्तन)

नोट: आईएफएस यानी इंडियन फॉरेन सर्विस अलग होती है, उसके लिए स्टेट कैडर नहीं होता। इसे विदेश मंत्रालय यानी विदेश मंत्रालय की सफ़ाई दी जाती है और ये लाइसेंस IFS के लिए लागू नहीं होता है।

‘कैटेगरी’ और ‘टेरिटोरियल’ की धारणा वैकेंसी है

आईएएस के लिए वैकेंसी को दो स्तरों पर विभाजित किया गया है:

  • श्रेणी निर्धारण: अनारक्षित (यूआर, ईडब्ल्यूएस), एससी, एसटी और ओबीसी।
  • क्षेत्रीय या प्रादेशिक: इनसाइडर (होम स्टेट) और आउटसाइडर (अदर स्टेट)

इनसाइडर की सीट आउटसाइडर से भरी जा सकती है

इसके अलावा, यदि किसी वर्ष किसी कैडर में इनसाइडर वैकेंसी के लिए उपयुक्त उम्मीदवार (जो उस राज्य का हो और जो वहां काम करने की इच्छा हो) उपलब्ध नहीं है, तो वह पद आउटसाइडर वैकेंसी में बदल दिया जाएगा। यह परिवर्तन उसी वर्ष हुआ जब इसे एक वर्ष में पूरा कर लिया गया और इसे अगले वर्ष के लिए आगे बढ़ाया गया (आगे बढ़ाया गया)।

31 जनवरी तक राज्य को वैकेंसी दिलचस्प बातें

वैकेंसी का यह खंडवारा एक सख्त समय सीमा के अंतर्गत आता है ताकि ट्रांसपेरेंसी बनी रहे:

  • 1 जनवरी तक राज्य को ‘कैडर गैप’ के आधार पर रिक्त पोस्ट की गणना करनी होगी।
  • 31 जनवरी तक स्टेट रिजर्वेशन को अपनी रिक्तियों की मांग भेजी जाएगी, जिसके लिए बेस पर इनसाइडर और आउटसाइडर का ब्रेक-अप तैयार किया जाएगा।

प्रिलिम्स क्लियर करने वालों के कैडर प्रेफरेंस फिलिंग होती है

चूहों को प्रीलिम्स क्लियर करने के बाद और मेन्स परीक्षा में शामिल होने से पहले टेरिटोरियल फॉर्म यानी डीएएफ सबमिट करना होता है। उसी में जिओबिलिटीज़ को कैडर मूर्तियाँ होती हैं।

न्यू स्टायल्टी से 25 ऑफिसियल्स को मिल सकता है कॉमेडी कैडर

प्रशिक्षु हर साल 180 आईएएस और 200 के करीब आईपीएस के लिए जाते हैं। इस नई मान्यता से शुरुआत 25 को उनका मियामी का कैडर मिल सकती है। बाकी लोगों को रैंडमली असीन होगा।

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