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NCERT 8th Class Social Science Book 2026 Topic; Judicial Corruption

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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) ने 8वीं कक्षा की नई सामाजिक विज्ञान पाठ्यपुस्तक में ज्यूडिशरी में एक खंड शुरू किया है। यह पहली बार है जब 8वीं के बाल न्यायपालिका में करप्शन क्या होता है इसके बारे में रीडगे में।

इस अध्याय में सुप्रीम कोर्ट के 81 हजार, कोर्ट के 62 लाख 40 हजार, सोमनाथ और सबऑर्डिनेट कोर्ट के 4 करोड़ 70 लाख के लंबित मामलों की संख्या भी बताई गई है।

यह पिछले मस्जिद के सिस्टम में एक बड़ा बदलाव है। पिछले अध्याय में अधिकांश दातर कोर्ट के रोल और रोल पर ध्यान केंद्रित किया गया था। बदले हुए अध्याय का नाम ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ है।

कोर्ट की हैरार्की और जस्टिस तक पहुंच को फिल्मों से लेकर ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली कहानी जैसे कि करप्शन और केस बैकलॉग को दिखाया गया है।

ज्यूडिशियरी से जुड़े प्वाइंट में नया सेक्शन जानें

  • करप्शन वाले सेक्शन में बताया गया है कि जज एक कोड ऑफ डॉक्टर होते हैं जो सिर्फ कोर्ट में नहीं बल्कि कोर्ट के बाहर भी अपने व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
  • ज्यूडिशियरी की बेहतर दक्षता प्रणाली का भी अवलोकन किया गया है। सेंट्रल डिजिटल जर्नलिस्ट्स रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम (सीपीजीआरएएमएस) के माध्यम से बैंकिंग लेने के तय तरीके भी बताए गए हैं।
  • किताब के मुताबिक CPGRAMS सिस्टम के जरिए 2017 और 2021 के बीच 1,600 से ज्यादा की कमाई हुई।
  • पुस्तक में गंभीर मामलों में जजों के संवैधानिक नियमों को हटाने के बारे में यह भी बताया गया है कि संसद भवन के पास मौजूद संवैधानिक नियमों को जजों द्वारा हटाया जा सकता है।
  • पढ़ें कि ऐसे प्रस्ताव पर सही जांच के बाद ही विचार किया जाता है। इस दौरान जज को मामले में अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया जाता है।
  • अध्याय में लिखा है- लोग ज्यूडिशियरी के अलग-अलग स्तर पर कार्पशन का सामना करते हैं। गरीबों और धार्मिकों की न्याय तक पहुँच की समस्या और समस्याएँ हो सकती हैं।
  • इसमें यह भी बताया गया है कि राज्य और केंद्र ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक ट्रस्ट को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है और करप्शन के मामलों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की जाती है।

किताब में पूर्व सीजेआई बीर गवई का ज़िक्र क्यों

किताब में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई का भी ज़िक्र है, जुलाई 2025 में उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका के अंदर करप्शन और ग़लत लोगों के मामलों का सार्वजनिक विश्वास पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा था, “विश्वास, इस विश्वास को फिर से बनाया गया है, इन रेंस को ब्लॉकचेन के लिए तेज़, स्थैतिक और पारदर्शी एक्शन में बदल दिया गया है… ट्रांसपेडी और इथेबिलिटी डेमोक्रेटिक गुण हैं।”

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