
फ्लाइट में बैठे पीएम मोदी ने व्यक्त किए अपने विचार
कांग्रेस चुनाव के सातवें चरण के लिए चुनाव प्रचार के बाद पीएम नरेंद्र मोदी कन्याकुमारी के लिए निकल गए। यहां उन्होंने विवेकानंद रॉक स्मारक में 45 घंटे तक ध्यान साधना की। कन्याकुमारी से दिल्ली लौटते वक्त जब पीएम नरेंद्र मोदी जब फ्लाइट में थे तो उन्होंने नए संकल्प को लिखने का काम किया। पीएम मोदी ने 1 जून को सुबह 4.15 बजे से 7 बजे के बीच नए संकल्प को लिखने का काम किया। पीएम मोदी ने लिखा, “मेरे प्यारे भारतवासियों, लोकतंत्र की जननी में लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व का एक पड़ाव आज पूरा हो रहा है। कन्याकुमारी में आध्यात्मिक यात्रा के बाद, दिल्ली जाने के लिए हवाई जहाज में आकर बैठूंगा। कई सीटों पर मतदान जारी होगा।” है, चु काशी भी शामिल है। कई सारे अनुभव हैं। मैं खुद में एक असीम ऊर्जा के प्रवाह को महसूस कर रहा हूं। मुझे कन्याकुमारी में भारत मां के चरणों में विराजमान होने का सौभाग्य मिला। शुरुआती पलों में गतिशील कोलाहल, शोर-गुल मेरी आंखें के सामने आ रहे थे। मां, बहनों और बेटियों का प्रेम क्षण, उनका आशीर्वाद सब मेरी आंखों के सामने आ रहा ता। मेरी आंखों तक नम हो रही थीं।”
पीएम मोदी ने क्या सोचा?
पीएम मोदी ने आगे लिखा कि मैं अब शून्यता की ओर बढ़ रहा था और साधना में प्रवेश कर रहा था। अगले कुछ ही पलों में सभी राजनीतिक दल, विवाद शून्य में समा गए। मेरा मन बाहरी जगत से पूरी तरह अलिप्त हो गया। इतने बड़े पर्व के बीच इस तरह की साधना में प्रवेश करना कठिन होता है। लेकिन कन्याकुमारी की भूमि और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा ने इसे मेरे लिए सहज बना दिया। मैं सांसदों के तौर पर अपने चुनाव भी काशी के जूतों के चरणों में छोड़कर आया था। उन्होंने लिखा, “मैं भगवान का आभारी हूं कि मुझे जन्म से ही ये संस्कार मिले हैं। कन्याकुमारी में उगते हुए सूर्य ने मेरे विचारों को नए आयाम दिए हैं। सागर की विशालता ने मेरे विचारों को विस्तार देने का काम किया है। आकाश के विस्तार।” “यह ब्रह्मांड की गहराई में एकात्मकता का एहसास कराता है।”
पीएम मोदी बोले- आज भारत के विकास की चर्चा दुनिया में हो रही है
उन्होंने लिखा, “कश्मीर से कन्याकुमारी, ये हमारी पहचान है जो हर देशवासी के मन में बसी है। ये वह शक्तिपीठ है, जहां मां शक्ति ने कन्याकुमारी के रूप में अवतार लिया था। दक्षिणी छोर पर मां शक्ति ने भगवान शिव को पाने के लिए।” तपस्या की और साधना की। उसी दौरान भगवान शिव हिमालय पर विराजे थे।” प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा कि आज भारत प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है। आज भारत का दायित्व केवल भारत के लिए बड़ा अवसर नहीं है, बल्कि पूरे विश्व में हमारे सभी सहयोगी देशों के लिए भी ऐतिहासिक अवसर है। जी-20 के बाद भारत की इस भूमिका को व्यापक देश स्वीकार कर रहे हैं। भारत को आज ग्लोबल साउथ की एक सशक्त महत्वपूर्ण आवाज के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। भारत का डिजिटल भारत अभियान आज पूरी दुनिया के लिए उदाहरण बना हुआ है। भारत के अभिनव प्रयोग की चर्चा पूरे विश्व में हो रही है।
