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प्रभाकरन (त्रिची): तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 से पहले त्रिची के डीएमके विधायक कतिरवन और उनके पिता श्रीनीवासन विवादों में घिर गए हैं. एआईएडीएमके ने आरोप लगाया है कि आचार संहिता लागू होने के बाद विधायक ने पार्टी पदाधिकारियों को 7 स्कॉर्पियो कारें तोहफे में दी हैं. विधायक के सोशल मीडिया पोस्ट को सबूत बनाकर चुनाव आयोग से शिकायत की गई है. आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है.
चुनाव आचार संहिता का खुला उल्लंघन: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की घोषणा के साथ ही 15 मार्च से आचार संहिता (MCC) लागू हो चुकी है. आरोप है कि इसके ठीक बाद 16 और 17 मार्च को विधायक कतिरवन और उनके पिता श्रीनीवासन ने अपने क्षेत्र के 7 प्रमुख डीएमके पदाधिकारियों को महिंद्रा स्कॉर्पियो जैसी महंगी गाड़ियां उपहार में दीं. चुनाव के दौरान ऐसे कीमती उपहार बांटना सीधे तौर पर मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को प्रभावित करने की श्रेणी में आता है.

सोशल मीडिया बना सबसे बड़ा सबूत: दिलचस्प बात यह है कि इस ‘उपहार वितरण’ की जानकारी खुद विधायक कतिरवन के सोशल मीडिया हैंडल से मिली. विधायक ने नई कारों को सौंपते हुए अपनी तस्वीरें साझा की थीं, जिन्हें अब एआईएडीएमके (AIADMK) आईटी विंग ने मुख्य साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल किया है. तकनीक के युग में राजनीतिक दिखावा अब विधायक के लिए ‘लेने के देने’ पड़ने जैसी स्थिति पैदा कर रहा है.

AIADMK ने चुनाव आयोग से की सख्त शिकायत: एआईएडीएमके आईटी विंग के पदाधिकारी नागराजन ने त्रिची जिला चुनाव अधिकारी सरवनन को औपचारिक शिकायत सौंपी है. शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि डीएमके विधायक ने चुनाव कार्य को मजबूत करने और प्रभाव जमाने के लिए बूथ एजेंटों और प्रमुख कैडरों को ये गाड़ियां दी हैं. विपक्ष ने मांग की है कि आचार संहिता उल्लंघन के लिए विधायक और उनके पिता पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए.
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पार्टी के खास सिपहसालारों को मिलीं गाड़ियां: जिन सात लोगों को ये लग्जरी गाड़ियां दी गई हैं, उनमें कट्टुकुलम गणेशन, रामचंद्रन, सेंथिलकुमार, सेंथिल कार्तिकेयन, श्रीनिवास पेरुमल जैसे डीएमके के कद्दावर स्थानीय सचिव और पदाधिकारी शामिल हैं. आरोप है कि यह कदम चुनाव से ठीक पहले इन रणनीतिकारों को सक्रिय करने और वफादारी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जो चुनावी शुचिता के खिलाफ एक बड़ा षड्यंत्र नजर आता है.

विधायक का बचाव: चौतरफा घिरे विधायक कतिरवन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उनका तर्क है कि ये गाड़ियां किसी चुनावी फायदे के लिए नहीं, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों की सहायता के रूप में दी गई थीं. हालांकि, चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी तरह के बड़े वितरण या उपहार पर पूर्ण प्रतिबंध होता है, ऐसे में विधायक का यह तर्क कानूनी रूप से कमजोर साबित हो सकता है.

चुनाव आयोग की सक्रियता: चुनाव आयोग ने इस शिकायत का संज्ञान ले लिया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है. यदि जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि गाड़ियां चुनाव को प्रभावित करने के उद्देश्य से बांटी गई हैं, तो आयोग न केवल गाड़ियों को जब्त कर सकता है, बल्कि विधायक की उम्मीदवारी पर भी संकट आ सकता है. तमिलनाडु की राजनीति में यह ‘कार गिफ्ट कांड’ अब एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन चुका है.





