इंफाल5 मिनट पहले
- लिंक

जिरिबाम में पहाड़ों पर नियंत्रण करने के लिए सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।
कांग्रेस चुनाव खत्म होने के बाद गुरुवार की देर शाम संदिग्ध कुकी उग्रवादियों के एक मैतेई बुजुर्ग की हत्या के बाद हिंसा और आगजनी के विरोध में जिरिबाम जिले में हिंसा भड़क गई है। मैतेई लोग अपने घर छोड़कर स्कूल में शरण लेने को मजबूर हैं।
एनआईए ने कहा है कि मणिपुर हिंसा के प्रमुख सूत्रधार थोंग्मिन्थांग हाओकिप फिक्सर थांगबोई हाओकिप फिक्सर रोजर (केएनएफ-एमसी) को 6 जून को इंफाल हवाई अड्डे से पकड़ा गया है। एनआईए ने उसके खिलाफ पिछले साल 18 जुलाई को भारतीय दंड विधान और यूए (पी) के तहत मामला दर्ज कर रखा था।
कुकी और जोमी उग्रवादी संगठनों ने म्यांमार और पूर्वी भारत में सक्रिय अन्य आतंकवादी संगठनों के साथ सांठगांठ कर क्षेत्र की वर्तमान उग्रवादियों का लाभ उठाने और भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की नियत से यह साजिश रची थी।
राज्य में कई स्थानों पर सुरक्षा बलों पर हुए हमलों में हाओकिप की विशेष भूमिका रही है। वह म्यांमार के आतंकवादी संगठन कुकी नेशनल फ्रंट (केएनएफ)-बी के संपर्क में है। दूसरी ओर, मणिपुर में 13 महीने से जारी हिंसा के कथित मास्टरमाइंड का खुलासा एनआईए ने किया है।

जिरिबाम के गांवों में आगजनी से भारी नुकसान हुआ है।
कुकी बोले- मतेई ने पहले शुरू किए हमले
मोंगबंग खुले इलाके के मैतेई लोगों ने डरकर अपना घर छोड़ कर पलायन कर दिया है। वे सब जिरिबाम के चिंगडोंग लईकाई में एलपी स्कूल में शरण के लिए हैं। जिला मजिस्ट्रेट ने हिंसा और आगजनी फैलाने से बचाने के लिए धारा-144 लागू कर दी और फिर लागू कर दिया। कुकी-जो समुदाय का कहना है कि जिरिबाम की कुकी आबादी में मेइतेई संगठन की तरफ से हमले शुरू हो गए हैं।
कुकी उग्रवादियों पर बुजुर्ग की हत्या का आरोप
मणिपुर अभी भी अशांत है। कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों ने गुरुवार को जिरिबाम जिले के सोरोक एटिंग्बी खुनौ के सोइबाम शरतकुमार की हत्या कर दी थी। पिछले एक साल से ज्यादा समय से जिरिबाम जिला हिंसा से अछूता रहा है। लेकिन यह घटना जिले में भड़क उठी है। आगजनी और सांप्रदायिक संघर्ष की आशंका पैदा होने के बाद प्रशासन ने यह कदम उठाया है।
हिंसा से अछूता था जिरिबाम
3 मई 2023 से मणिपुर की इम्फाल घाटी में रहने वाले लोग मैतेई और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी के बीच जातीय संघर्ष में 200 से अधिक लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। मैतेई, मुस्लिम, नागा, कुकी और गैर-मणिपुरी सहित विभिन्न जातीय संरचना वाला जिरिबाम अब तक जातीय संघर्ष से अछूता रहा था।

मणिपुर में 67 हजार लोग मारे गए
जिनेवा के इंटरनल डिस्प्लेसमेंट मॉनिटरिंग सेंटर (आईडीएमसी) ने रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि वर्ष 2023 में दक्षिण एशिया में 69 हजार लोग गुलाम होंगे। इनमें से 97 प्रतिशत यानी 67 हजार लोग मणिपुर हिंसा के कारण गुलाम हुए थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत में साल 2018 के बाद हिंसा के कारण पहली बार इतनी बड़ी संख्या में बदलाव देखने को मिले।
मार्च 2023 में मणिपुर उच्च न्यायालय ने मैतेई समुदाय को अनुसूचित जाति (एसटी) में शामिल करने के लिए केन्द्र सरकार को उचित छूट देने की घोषणा की थी। इसके बाद कुकी समुदाय ने राज्य के पहाड़ी जिलों में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
3 मई 2023 को मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हिंसक विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। जो लोग पूर्वी-पश्चिमी इंफाल, बिष्णुपुर, तेंगनुपाल और कांगपोकपी सहित अन्य जिलों में फैले हुए थे।
