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महराजगंज जिले का गिरहिया बंजरीपट्टी कंपोजिट विद्यालय सरकारी स्कूलों को लेकर बनी धारणाओं को बदलने का काम कर रहा है. कभी जहां इस स्कूल में मात्र 30 बच्चे नामांकित थे, वहीं आज 600 से अधिक छात्र यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यह विद्यालय क्वालिटी एजुकेशन, अनुशासन और आधुनिक सुविधाओं के चलते प्राइवेट स्कूलों को कड़ी टक्कर दे रहा है.
महराजगंज: जब हम सरकारी स्कूल की बात करते हैं, तो सबसे पहले हमारे मन में यही ख्याल आता है कि वहां की एजुकेशन क्वालिटी अच्छी नहीं होगी, वहां मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का अभाव होगा. वैसे सच कहें तो सरकारी स्कूलों को लेकर समाज में एक स्टीरियोटाइप बना हुआ है कि सरकारी स्कूल में बेहतर पढ़ाई नहीं होती और सुविधाओं का अभाव होता है, लेकिन इस स्टीरियोटाइप को महराजगंज जिले का एक सरकारी स्कूल तोड़ देता है.
क्या खास है इस स्कूल में
जिले के निचलौल क्षेत्र के गिरहिया बंजरीपट्टी का कंपोजिट विद्यालय अपनी एजुकेशन क्वालिटी और बच्चों की प्रतिभा के लिए जाना जाता है. यह विद्यालय महराजगंज जिले में शैक्षणिक माहौल और विद्यालय में मिलने वाली सुविधाओं की वजह से एक उदाहरण पेश करता है. यह स्कूल अपने क्वालिटी एजुकेशन और डिसिप्लिन एनवायरमेंट की वजह से सिर्फ सरकारी स्कूलों को पीछे नहीं छोड़ता है बल्कि बहुत से कॉन्वेंट स्कूलों को पीछे पीछे छोड़ देता है. कंपोजिट स्कूल गिरहिया बंजरीपट्टी महराजगंज जिले में एक मॉडल स्कूल के रूप में अपनी पहचान बना चुका है.
टेक्नोलॉजी ने बनाया पढ़ाई को और भी ज्यादा आसान
कंपोजिट विद्यालय गिरहिया बंजरीपट्टी जिले के इंडो नेपाल बॉर्डर क्षेत्र में है जो बहुत ही ग्रामीण परिवेश वाला क्षेत्र है. इसके बावजूद भी यह अपने क्वालिटी एजूकेशन और डिसिप्लिन एनवायरमेंट की वजह से बहुत से प्राइवेट स्कूलों को कड़ी टक्कर देता है. बच्चों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए विद्यालय हर प्रकार की सुविधा देखने को मिलती है.
पढ़ाई के साथ साथ टेक्नोलॉजी के प्रयोग और अलग अलग कलाओं को भी प्रोत्साहित किया जाता है. विद्यालय में रेगुलर पढ़ाई के साथ ही आईसीटी पर भी भरपूर जोर दिया जाता है ताकि बच्चों के लिए पढ़ाई को टेक्नोलॉजी की मदद से और भी आसान बनाया जा सके. कंपोजिट विद्यालय गिरहिया बंजरीपट्टी के प्रभारी धन्नू चौहान ने बताया कि जब उन्हें पहली बार इस विद्यालय की जिम्मेदारी मिली थी उस समय यहां की स्थिति बहुत ही दयनीय थी. विद्यालय में बच्चों के नामांकन की बहुत ही कम संख्या थी.
विद्यालय में 600 से ज्यादा बच्चों का नामांकन
कंपोजिट विद्यालय गिरहिया बंजरीपट्टी के कार्यालय में जब हम देखते हैं, तो सामने की दीवार पर मेडल की एक बड़ी संख्या देखने को मिलती है. विद्यालय के प्रभारी धन्नू चौहान ने बताया कि शुरुआती समय में विद्यालय में बच्चों के नामांकन की संख्या को बढ़ाना एक बड़ी जिम्मेदारी थी. उन्होंने बच्चों के गार्जियन से बात कर उनसे विद्यालय के सुविधाओं के बारे में बताया और उन्हें बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित किया. उसका सकारात्म परिणाम रहा कि वर्तमान समय में विद्यालय में छः सौ से भी अधिक बच्चों का नामांकन है बल्कि शुरुआत में विद्यालय में बच्चों के नामांकन की संख्या सिर्फ तीस के लगभग थी.
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विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें





