दिल को खराब कर डालेगा फेफड़ा, 99% लोग इस खतरे से बेफिक्र, अचानक होगी मौत, जानें


ग्रेटर नोएडा. दिल और फेफड़े शरीर के दो ऐसे अहम अंग हैं, जो एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं. यदि दिल में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, तो उसका सीधा असर फेफड़ों पर पड़ता है. विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार हृदय संबंधी बीमारियों के कारण फेफड़ों की धमनियों में दबाव बढ़ जाता है, जिसे पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन (पीएएच) कहा जाता है. यह एक गंभीर स्थिति है, जो समय पर पहचान और उपचार न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है. फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं. पहली वे, जो सीधे फेफड़ों से संबंधित होती हैं, जैसे प्रदूषण, संक्रमण, एलर्जी या जन्मजात कारण. दूसरी वे, जो दिल की बीमारियों के कारण फेफड़ों को प्रभावित करती हैं. ऐसे मामलों में हृदय से फेफड़ों की ओर जाने वाले रक्त का प्रवाह असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों की धमनियों पर दबाव बढ़ने लगता है और धीरे-धीरे स्थिति गंभीर हो जाती है.

ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल के कार्डियक साइंसेज के विशेषज्ञ डॉ. वीरेश महाजन के अनुसार, पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन एक जटिल और गंभीर बीमारी है, जो अक्सर जन्मजात हृदय दोष, ऑटोइम्यून बीमारियों और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों में देखने को मिलती है. यह समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाई जाती है. यदि समय पर इसका इलाज नहीं किया जाए, तो मरीज की व्यायाम क्षमता प्रभावित होती है, दाएं हृदय की विफलता का खतरा बढ़ जाता है और कई मामलों में अचानक मृत्यु भी हो सकती है.

डॉ. वीरेश बताते हैं कि यह समस्या कई बार बचपन से ही शुरू हो जाती है, खासकर जब जन्मजात हृदय रोग का समय पर इलाज नहीं हो पाता. बच्चों में इसके लक्षणों में सांस लेने में तकलीफ, ऑक्सीजन का स्तर कम रहना, बार-बार निमोनिया होना और वजन का सही से न बढ़ना शामिल हैं. वयस्कों में जल्दी थकान, सांस फूलना और सामान्य गतिविधियों में भी परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. एक 24 वर्षीय युवती का मामला इस बीमारी की गंभीरता और आधुनिक इलाज की संभावनाओं को उजागर करता है. बचपन में हृदय संबंधी समस्या के कारण उसकी सर्जरी की गई थी, लेकिन समय पर इलाज न होने के कारण उसके फेफड़ों का प्रेशर लगातार बढ़ता गया. पिछले 17 वर्षों से वह लगातार इलाज और निगरानी में रही, लेकिन दवाओं के बावजूद उसे पूरी तरह राहत नहीं मिल सकी. सामान्य जीवन जीना उसके लिए चुनौती बना हुआ था, यहां तक कि हल्की शारीरिक गतिविधि में भी उसे सांस फूलने लगती थी.

लंबी दवाओं के बाद भी सुधार नहीं

डॉ. महाजन ने बताया कि हमने इस मरीज को वर्षों तक इस बीमारी से जूझते हुए देखा है. लंबे समय तक दवाओं के बावजूद सुधार सीमित रहा, जिसके बाद हमने उन्नत इंटरवेंशनल तकनीक अपनाने का निर्णय लिया, ताकि उसकी जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके.
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बीमारी की पहचान के लिए इकोकार्डियोग्राफी एक महत्त्वपूर्ण और प्रभावी जांच है. यह एक नॉन-इनवेसिव टेस्ट है, जिसके माध्यम से दिल और फेफड़ों के प्रेशर का सटीक आकलन किया जा सकता है. उसी आधार पर आगे के उपचार की योजना बनाई जाती है.

इलाज के क्षेत्र में अब नई तकनीकों ने उम्मीद जगाई है. हाल ही में एक नॉन-सर्जिकल प्रक्रिया के जरिए इस युवती का सफल इलाज किया गया, जिसमें ओपन सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी. इस प्रक्रिया में कैथेटर के माध्यम से फेफड़ों की धमनियों तक पहुंचकर रेडियोफ्रीक्वेंसी ऊर्जा की मदद से आसपास की अत्यधिक सक्रिय नसों को निष्क्रिय किया जाता है, जिससे धमनियों का दबाव कम होता है. कार्डियक सर्जन डॉ. वेद प्रकाश बताते हैं कि पल्मोनरी आर्टेरियल हाइपरटेंशन के कई मामलों में एक समय ऐसा आता है, जब सर्जरी संभव नहीं रह जाती. ऐसे में यह नई नॉन-सर्जिकल तकनीक प्रभावी विकल्प के रूप में सामने आई है. इस प्रक्रिया से फेफड़ों की धमनियों का दबाव कम करने में मदद मिलती है और मरीज की स्थिति में सुधार आता है.

जोखिम कम
डॉ. वेद प्रकाश के मुताबिक, इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें जटिलताओं का जोखिम बहुत कम होता है और मरीज को जल्दी रिकवरी मिलती है. यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए लाभकारी है, जिनके लिए पारंपरिक सर्जरी अब विकल्प नहीं रह जाती.
उपचार के बाद मरीज की स्थिति में सुधार देखा गया है और फेफड़ों के प्रेशर में कमी दर्ज की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकें न केवल मरीजों की जीवन गुणवत्ता को बेहतर बनाएंगी, बल्कि इस गंभीर बीमारी के उपचार में नई दिशा भी प्रदान करेंगी.
कहा कि इस तरह की गंभीर स्थितियों से बचने के लिए सबसे जरूरी है समय पर पहचान और उपचार. यदि किसी व्यक्ति को बार-बार सांस फूलना, अत्यधिक थकान या ऑक्सीजन की कमी जैसे लक्षण महसूस हों, तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए.



Source link

Latest articles

spot_imgspot_img

Related articles

Leave a reply

Please enter your comment!
Please enter your name here

spot_imgspot_img