
राजीव प्रताप सिंह रूडी बनाम रोहिणी आचार्य
लोकसभा चुनाव 2024: लोकसभा चुनाव के लोकप्रिय चरण में यूं तो बिहार में कई दिग्गज नेताओं के भविष्य की दावेदारी है, लेकिन सारण ऐसी सीट है, जहां दिलचस्प लड़ाई देखने को मिल रही है। सारण क्षेत्र से एनडीए की ओर से भाजपा ने जहां पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप सिंह रूडी को चुनावी मैदान में उतार दिया है, वहीं दूसरी ओर रोमानिया की ओर से राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के अध्यक्ष प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी शिक्षक-शिक्षिकाओं में हैं। इस दिलचस्प रहस्य पर बिहार ही नहीं देश भर के विपक्ष टिकी हैं। इस चुनाव में रूडी के सामने जहां इस सीट पर कब्जे की चुनौती बनी हुई है, वहीं रोहिणी के सामने अपने पिता की पुरानी विरासत को चुनौती मिली है।
चार बार निर्वाचित रूडी
‘संपूर्ण क्रांति’ के जननायक नारायण की कर्मभूमि रहे सारण की राजनीति में डॉ. प्रसाद यादव लंबे समय तक केंद्र बिंदु बने रहे। इस क्षेत्र की संसद में चार बार प्रतिनिधित्व करने वाले विश्वविद्यालय परिवार के लिए यह पारंपरिक सीट मानी जाती है। हालांकि, बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी भी यहां से चार बार सांसद चुने गए हैं। सारण की सैर है कि यहां मछली पकड़ने के लिए अपने-अपने दावेदारों को चुनावी मैदान में उतारते हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला यदुवंशी और रघुवंशी के बीच ही होता है। संस्थागत के खाते से देखें तो विशिष्टता और समसामयिक इलाके के रूप में प्रतिष्ठित सारण संसदीय क्षेत्र के नाम से जाना जाता है।
विश्वास प्रसाद की बेटियां मैदान में हैं
सारण संसदीय क्षेत्र में मढ़ौरा, छपरा, गरखा, अमनौर, परसा और सोनपुर संसदीय क्षेत्र आते हैं। इसमें चार विधानसभा क्षेत्रों से राजद के जबकि दो सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया है। पिछले लोकसभा चुनाव में सारण की सीट से बीजेपी के रूडी ने ब्लूटूथ के चंद्रिका राय को परास्त किया था। उस चुनाव में रूडी को जहां 53 फीसदी से ज्यादा मत मिले थे, वहीं चंद्रिका राय को 38 फीसदी आंकड़े से ही संतोष करना पड़ा था। 2024 के लोकसभा चुनाव में करीब 18 लाख लेक वाले सारण में बीजेपी ने एक बार फिर राजीव प्रताप रूडी पर दांव खेला है। वहीं, बेसिकली प्रसाद की बेटी रोहिणी के प्रोफेसर को ग्राउंड में उतारा गया है।
जातीय समूह के उद्यम-गिरद हार-जीत
पिपरा संसदीय क्षेत्र का नाम मैसूर ठीक ही रखा गया है, लेकिन अब तक पिपरा का मिज़ाज बदला नहीं गया है। आरंभ से ही इस क्षेत्र में जीत-हार का निहितार्थ जातीय समूह का उद्यम-गिर घूमना है। माना जाता है कि यहां मोटरसाइकिलें नहीं, बल्कि जातियां जीतती रहती हैं। हालांकि, पिछले दो चुनावों में भी नरेंद्र मोदी के नाम का असर दिख रहा है। इस सीट से बौद्ध धर्म प्रसाद और रूडी चार-चार बार चुनाव में निर्वाचित हुए हैं। वैसे रूडी ने साल 1996 में ना सिर्फ जीत दर्ज की थी बल्कि यहां बीजेपी का खाता भी खोला था, बल्कि 1999, 2014 और 2019 में भी रूडी ने यहां ‘कमल’ की शुरुआत की थी। इस बार एरिज़डी ने वैली की संसदीय विरासत को वापस लाने के लिए वर्जीनिया के मैदान में उतरी रोहिणी को यहां से जिताना ना केवल मान्यता के लिए बल्कि पूरी पार्टी की प्रतिष्ठा का सवाल है।
इस बार प्राचीन पाले में जाएगी ये सीट?
दोनों गठबंधन के नेताओं ने इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां खुद रैली को संबोधित कर चुके हैं। अफानसी के अध्यक्ष पुतिन प्रसाद यादव अपनी बेटी के नामांकन के दौरान यहां मौजूद थे। इसके अलावा यहां कई दिनों तक कैंप कर नेताओं से मुलाकात होती रही। विकासशील नेता तेजस्वी यादव भी कई चुनावी सभाओं को उजागर कर चुके हैं। रोहिणी आचार्य की पहचान अब तक राजनीति में नहीं रही है। उनकी चर्चा उनके पिता प्लास्टिक प्रसाद को किडनी दान के विवरण के बाद शुरू हुई और इस चुनाव में वे चुनावी मैदान में हैं। रूडी न केवल न्यूनतम है, बल्कि समाजवादी पायलट भी हैं। चुनावी प्रचार में भाजपा के वरिष्ठ नेता राजनाथ ने अपनी किताब में कहा कि रूडी को चुनकर न आप केवल एक अल्पसंख्यक चुनेंगे, बल्कि एक विशेष व्यक्तित्व को चुनेंगे।
रूडी VS रोहिणी, किसकी जीत होगी?
चुनावी प्रचार के प्रचार पर गौर करें तो रूडी इस चुनाव में विकास के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की मंजूरी को लेकर लोगों के बीच जा रहे हैं। वहीं, अपने वोट बैंक के जरिए चुनावी नया पार करने में भी मदद मिलती है। सोसाइन सीट की पहचान राजीव प्रताप सिंह रूडी और मत प्रसाद यादव के कारण नेशनल फलक पर है। इस क्षेत्र में 20 मई को प्राइमरी स्टेज पर मतदान होना है, लेकिन 4 जून को प्राइमरी के बाद ही पता चला कि यहां के लोग रूडी को एक बार फिर से पार्टी में शामिल कर रहे हैं या फिर उनकी बेटी रोहिणी को पहली बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का दायित्व दिया गया है। असंख्यते हैं। (आईएएनएस)
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