2 मिनट पहलेलेखक: नवनीत गुर्जर, राष्ट्रीय संपादक, दैनिक भास्कर
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हर किसी का एक ही सवाल है- ये क्या हो गया? कैसे हो गया? जवाब सीधा- सा है- यूपी ने गच्चा दे दिया। इस जवाब से फिर सवाल उठता है- यूपी ने गच्चा क्यों दिया? उत्साहित, यूपी में जिस झुक को भाजपा अपना प्लस प्वाइंट मान रही थी, उंची की झुकी ने खेला कर दिया। उनको एक भी सीट नहीं मिली लेकिन वो कांग्रेस और सपा के वोट कटवा भी साबित नहीं हुई।
भाजपा को उम्मीद थी कि आगे, सपा और कांग्रेस के वोट कटेगी और परिणाम स्वरूप भाजपा की झोली में आ जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भगवान के वोटर शांत हो गए। बल्कि कहना यह चाहिए कि वे कांग्रेस और सपा की तरफ चले गए। सबूत सामने है – चार-चार लाख वोटों की गिनती हो जाने तक पाँच हज़ार वोट तक के लिए ले गए। यही वजह थी कि यहां राहुल गांधी और अखिलेश यादव के नाम के दो लड़कों की जय जयकार हो गई। बार-बार इन दोनों को शहजादे-शहजादे के नारे चिढ़ाना भी भाजपा को भारी पड़ता है।

चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडगे, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने विजय साइन दिखाए।
जहां तक पश्चिम बंगाल का सवाल है, वहां के अधिक वोटिंग प्रतिशत को देखकर भाजपा ओवर कन्फिडेंस में थी। उसे लग रहा था कि ऐसी प्रतिशत से अधिक वोटिंग वाली अधिकांश मौतें सेब की तरह उसकी झोली में आ गिरेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ज़्यादा वोटिंग ने आख़िरकार ममता की ज़ोली ही भरी और हमले कांग्रेस पहले से कहीं ज़्यादा प्रतिष्ठा पर जीत गई, जबकि भाजपा पहले से आधी रह गई।
फिर राजस्थान में क्या हुआ? यहां दो बार से कांग्रेस की कमान भी पास थी, पार्टी जीरो पर रही थी लेकिन गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व ने इस बार कमाल कर दिया। इस बार दांतों का चयन ही सबसे महत्वपूर्ण था, जिसमें कोई गलती नहीं हुई। यही वजह रही कि भाजपा को यूपी और महाराष्ट्र के बाद राजस्थान में सबसे बड़ा झटका लगा।
हरियाणा में सरकार का चेहरा भाजपा ने संभावित हार से पार पाने की कोशिश ज़रूर की थी, लेकिन बात भी नहीं बनी। दस में से पांच दवाएं कांग्रेस लूट ले गई। पंजाब में जहां पिछले बार भाजपा की दो बातें थीं, इस बार सूपड़ा साफ हो गया। महाराष्ट्र में लोगों ने उद्धव ठाकरे और सपा से धोखा खाए शरद पवार को सहानुभूति वोट दे दिया।

भाजपा के पाले में गए अजीत दादा मुन्ना की पार्टी को तो केवल एक सीट पर ही संतोष करना पड़ा। उद्धव की सेना ने नौ-दस सीटें हासिल करके कमाल कर दिखाया। यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि महाराष्ट्र की जनता ने राजनीति को फैशन से नकार दिया है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए यह पहला मौका होगा जब उन्हें गठबंधन की सरकार का नेतृत्व करना होगा।
समर्थक दल भी ऐसे हैं नीतीश कुमार (जद यू) और चंद्रबाबू नायडू (टीटीपी), जिनके विचार और रीति-नीति भाजपा से बहुत ज्यादा मेल नहीं खाते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार के परिणामों को देखने के बाद कोई भी एग्जिट पोल पर भरोसा नहीं करेगा।
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