यादव ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के बाद राज्य में अन्य नशीले पदार्थों का कारोबार भी बढ़ा है और युवाओं में गांजा, ब्राउन शुगर तथा नशीली दवाओं का सेवन बढ़ा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि राज्य की सीमाओं में बड़ी मात्रा में शराब किसके सहयोग से लाई जा रही है और खपत के आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे हैं।
पूर्व उप मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि वर्ष 2004-05 में बिहार के ग्रामीण इलाकों में 500 से कम शराब की दुकानें थीं, जबकि 2005 में राज्य में लगभग 3,000 दुकानें थीं, जो 2015 तक बढ़कर 6,000 से अधिक हो गईं।
यादव ने आरोप लगाया कि उस अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दुकानें खोली गईं। RJD नेता ने दावा किया कि शराबबंदी कानून के तहत हुई गिरफ्तारियों में अधिकांश गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोग शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘बड़ी मछलियों’ पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। यादव ने कहा कि सरकार को उन अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए जो कथित रूप से शराबबंदी को विफल कर रहे हैं।





