LED तुरंत जलती है लेकिन ट्यूब लाइट क्यों लेती है टाइम? पहले झपकती फिर होती है ऑन, जानें 5 सेकंड का पूरा साइंस


हमारे घर में पुरानी वाली ट्यूब लाइट (फ्लोरेसेंट ट्यूब) लगी होती है. स्विच दबाते ही वो तुरंत नहीं जलती. पहले झपक-झपक करती है, फिर 2-5 सेकंड बाद पूरी तरह चमकने लगती है. ये देरी क्यों होती है? चलिए बहुत ही आसान भाषा में समझते हैं. ट्यूब लाइट एक लंबी कांच की नली होती है. इसके अंदर थोड़ी-सी गैस भरी होती है- ज्यादातर आर्गन गैस और बहुत कम मात्रा में पारा (मरकरी) की भाप. दोनों सिरों पर छोटे-छोटे तार (फिलामेंट) लगे होते हैं. ट्यूब के अंदर की दीवार पर सफेद पाउडर (फॉस्फर) की परत चढ़ी होती है.

जब हम स्विच ऑन करते हैं, तो बिजली आती है. लेकिन ये गैस इतनी आसानी से रोशनी नहीं बनाती. गैस को रोशनी बनाने के लिए पहले ‘गर्म’ और ‘उत्तेजित’ करना पड़ता है. यानी गैस में बिजली का रास्ता बनाना पड़ता है. इसके लिए बहुत ज्यादा वोल्टेज चाहिए, जो घर की 220 वोल्ट बिजली से सीधे नहीं मिलता. यहां स्टार्टर नाम का छोटा सा हिस्सा काम आता है. स्टार्टर ट्यूब के पास लगा एक छोटा सिलेंडर जैसा पार्ट होता है. इसमें एक छोटा बल्ब और एक खास स्विच होता है.स्विच ऑन करने पर:सबसे पहले बिजली स्टार्टर से होकर ट्यूब के दोनों सिरों के तारों (फिलामेंट) तक जाती है.

ये तार गर्म हो जाते हैं. गर्म होने से वो इलेक्ट्रॉन छोड़ते हैं. स्टार्टर के अंदर छोटा बल्ब जलता है, जिससे स्टार्टर का स्विच गर्म होकर बंद हो जाता है. इससे तारों को और ज्यादा करंट मिलता है और वो और गर्म हो जाते हैं.

फिर स्टार्टर ठंडा होने पर अचानक स्विच खुल जाता है. इस खुलने से चोक (एक और पार्ट जो ट्यूब में लगा होता है) में बहुत ज्यादा वोल्टेज का झटका पड़ता है- सैकड़ों वोल्ट तक!

ये झटका गैस को ‘आयनाइज’ करता है. मतलब गैस में बिजली का रास्ता बन जाता है. गैस चमकने लगती है, UV किरणें निकलती हैं. ये किरणें फॉस्फर पर पड़ती हैं और सफेद रोशनी बनती है.

पूरी ये प्रक्रिया में 2-5 सेकंड लग जाते हैं. इसी दौरान ट्यूब झपकती रहती है, क्योंकि स्टार्टर बार-बार कोशिश करता है. गैस पूरी तरह तैयार नहीं होती तो रोशनी स्थिर नहीं रहती. एक बार गैस पूरी तरह चालू हो जाए, तो बिजली सीधे ट्यूब से बहने लगती है और स्टार्टर का काम खत्म हो जाता है.

झपकने की वजह
झपकना स्टार्टर के खुलने-बंद होने से होता है. तार बार-बार गर्म-ठंडे होते हैं, छोटे-छोटे डिस्चार्ज होते हैं. लेकिन पूरी गैस तैयार नहीं होती, इसलिए रोशनी झपकती रहती है.

आजकल की LED ट्यूब लाइट में ये समस्या क्यों नहीं?
पुरानी ट्यूब में स्टार्टर और पुराना चोक (बैलास्ट) की वजह से देरी होती है. लेकिन नई LED ट्यूब या इलेक्ट्रॉनिक चोक वाली ट्यूब में तुरंत हाई वोल्टेज मिल जाता है. इसलिए वो झट से जल जाती हैं, कोई झपकना नहीं, कोई देरी नहीं.

कब ज्यादा देरी होती है?

  • ट्यूब पुरानी हो तो.
  • स्टार्टर खराब हो तो.
  • सर्दियों में (ठंड में गैस धीरे तैयार होती है).
  • ऐसे में स्टार्टर बदल लें या ट्यूब नई लगा लें.

ट्यूब लाइट देर से जलती है क्योंकि इसके अंदर की गैस को रोशनी बनाने के लिए पहले गर्म करना और ज्यादा वोल्टेज का झटका देना पड़ता है. ये काम स्टार्टर करता है, और इसमें थोड़ा समय लगता है. इसलिए पहले झपकती है, फिर पूरी चमकती है. ये पुरानी ट्यूब की खास बात है. आज LED आ गई हैं, जो तुरंत जलती हैं और बिजली भी कम खाती हैं.



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Nemish Agrawal
Nemish Agrawalhttps://tv1indianews.in
Tv Journalist • Editor • Writer Digital Creator • Photographer Travel Vlogger • Web-App Developer IT Cell • Social Worker

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