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Sukhoi-30 Upgrade: सुखोई-30 MKI और भी ज्यादा ताकतवर होने जा रहा है. एयरफोर्स के नए कैपेबिलिटी रोडमैप में अब सुखोई विमानों में रूसी हथियारों की जगह पूरी तरह भारतीय एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें लगाने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए एक स्पेशल ‘कॉमन लॉन्चर’ तैयार किया जा रहा है, जिससे इसकी मारक क्षमता और परिचालन गति कई गुना बढ़ जाएगी. 84 सुखोई विमानों को ‘सुपर सुखोई’ स्टैंडर्ड में अपग्रेड करने की तैयारी चल रही है.
सुखोई-30 पहले से ज्यादा खूंखार हुआ. 500 किलोमीटर दूर तक दुश्मनों को करेगा ढेर.
Sukhoi-30 Upgrade: पूरी दुनिया में जंग का ऐसा दौर चल रहा है. आज जंग केवल मैदान में जवानों से ही नहीं बल्कि एडवांस हथियार से लड़े जा रहे हैं. अगर कोई देश अपने सेना की हथियारों को एडवांस नहीं बनाता है तो जंग में हालात पतली होनी तय है. आधुनिक युद्ध को देखते हुए भारतीय एयरफोर्स अपने हथियारों को धार देने में जुट गई है. हमारी डिफेंस की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले सुखोई-30 MKI को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है.
जिस फाइटर जेट ने बालाकोट स्ट्राइक के बाद पाकिस्तानी वायुसेना के पसीने छुड़ा दिए थे और जो दुनिया की इकलौती सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को दागने में सक्षम है, अब उसे पूरी तरह स्वदेशी कवच से लैस किया जा रहा है. सुखोई को एकदम भारतीय रंग में रंगने की तैयारी चल रही है. अब इसे ऐसा बनाया जा रहा है, जो एक बार में ही कई मिसाइलें दाग सकती है.
Su-30 से भारतीय एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलें लगाने की तैयारी की जा रही है. (REUTERS)
एक साथ दागेगी कई मिसाइलें
अभी सुखोई-30 MKI विमान रूस से खरीदे गए औजार और लॉन्चरों पर निर्भर है. इन रूसी लॉन्चरों के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि वे अपनी भार वहन क्षमता के कारण सीमित हैं. अलग-अलग हथियार के लिए अलग-अलग लॉन्चर की आवश्यकता होती है. मिशन की जरूरतों के अनुसार लॉन्चर को बार-बार बदलना पड़ता है. इसकी वजह से ऑपरेशन में काफी समय बर्बाद होता है.
एक लॉन्चर से कई मिसाइलें दागी जाएंगी
अब इसी संकट को दूर करने की तैयारी की जा रही है. इंडियन एयरफोर्स अब एक ‘कॉमन लॉन्चर’ विकसित कर रही है. यह एक क्रांतिकारी कदम है, क्योंकि इसके बाद बिना लॉन्चर बदले ही विभिन्न प्रकार की स्वदेशी मिसाइलों को आसानी से उपयोग किया जा सकेगा. इससे युद्ध की स्थिति में सुखोई की प्रतिक्रिया देने की गति और मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी.
इंडियन एयरफोर्स अब एक ‘कॉमन लॉन्चर’ विकसित कर रही है
500 KM तक मचेगी तबाही
वायुसेना के रोडमैप में न केवल लॉन्चर को स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा है, बल्कि एयर-टू-एयर (हवा से हवा) और एयर-टू-ग्राउंड (हवा से जमीन) मिसाइलों के विकास पर भी जोर दिया गया है.
- नेक्स्ट-जेन हथियार: ये मिसाइलें भारत की अगली पीढ़ी के एयर-ड्रॉप प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन सीरीज के हिस्सा हैं.
- रणनीतिक रेंज: आत्मनिर्भर योजना के तहत भारतीय लड़ाकू विमानों को एक ऐसा लॉन्च प्लेटफॉर्म बनाया जा रहा है, जहां से 50 किलोमीटर से लेकर 500 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें दागी जा सकेंगी. यह क्षमता दुश्मन के रणनीतिक ठिकानों को सीमा पार किए बिना ही नष्ट करने की ताकत देगी.
रडार से लेकर इंजन तक सब होगा नया
सुखोई को ‘सुपर सुखोई’ बनाने के लिए 84 विमानों के बेड़े को पूरी तरह अपग्रेड किया जा रहा है. इसके तहत पुराने रूसी रडार की जगह अब भारत में विकसित आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक स्कैन्ड एरे (AESA) रडार लगाए जाएंगे. विमान की ताकत बढ़ाने के लिए इसके इंजन सिस्टम को भी अपग्रेड किया जा रहा है. 84 विमानों के अपग्रेड के अलावा, 12 नए सुखोई विमानों की खरीद को भी हरी झंडी मिल चुकी है.
ब्रह्मोस का इकलौता शिकारी
भारतीय वायुसेना के पास वर्तमान में लगभग 272 सुखोई-30 MKI विमानों का बेड़ा है. इनमें से 222 विमानों का निर्माण भारत में ही हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने लाइसेंस प्रोडक्शन के तहत किया है. यह हैवी-वेट, लॉन्ग-रेंज फाइटर भारतीय रक्षा पंक्ति की पहली दीवार है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सुखोई-30 ही एकमात्र ऐसा लड़ाकू विमान है जो भारी-भरकम ब्रह्मोस मिसाइल को हवा से लॉन्च करने की क्षमता रखता है.
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें





