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Laptop & Desktop Prices May Rise Up to 35% in India 2026 – AI Boom Impact

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नई दिल्ली44 मिनट पहले

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देश में कुछ महीनों में लैपटॉप और ख़रीदारों की क़ीमतें मिल सकती हैं। सिस्टम और कार्ड (जीपीयू) जैसे प्रमुख कंपनियों के दाम बढ़ने से इस साल लैपटॉप-डेक्सटॉप में 35% तक उछाल की संभावना है।

बाजार शेयरों का मानना ​​है कि इस साल कंप्यूटर बाजार की वजह से बाजार में 8% तक की कमी आ सकती है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है।

मार्च में 10% की बढ़ोतरी संभव है, 12% पहले ही मंदी हो जाएगी

आईडीसी इंडिया के सीनियर मार्केट एनालिस्ट भरत शेनॉय के मुताबिक, रैम (RAM) के प्रोडक्ट्स पहले ही 2.5 से 3 गुना तक बढ़ गए हैं। इस लैपटॉप और लैपटॉप में अब तक 10-12% की छूट हो चुकी है।

मार्च महीने में ही 8-10% की एक और बढ़त होने की उम्मीद है, जबकि बाकी कुछ महीनों में 10% और बढ़ोतरी हो सकती है।

35 हजार वाला लैपटॉप अब 45 हजार का होगा

शेनॉय ने बताया कि जो माफिया पहले 30,000 से 35,000 रुपये की रेंज में शामिल थे, उनकी कीमत अब 45,000 रुपये के करीब पहुंच रही है। इससे जुड़े साथी, होम उपभोक्ता और पहली बार कंप्यूटर शेयरधारक के लिए सिद्धांत बनाना मुश्किल हो जाएगा।

क्वार्टर का कहना है कि यह तेजी से अगली 6-7 तिमाहियों तक रिलीज हो सकती है और 2027 की दूसरी छमाही से पहले राहत मिलने की उम्मीद कम है।

एआई-सप्लाई चेन बड़ी वजह है

समकक्ष रिसर्च के वरिष्ठ एनालिस्ट अंशिका जैन के, मेमोरियल (DRAM और NAND) के अनुसार, मियामी में उछाल का सबसे बड़ा कारण ‘एआई आर्किटेक्चर’ की लोकप्रियता है।

अब अपना प्रोडक्शन हाई-मार्जिन वाले सर्वर और हाई-बैंडविड्थ मेमोरी की तरफ मोड़ रही हैं, जिससे आम लैपटॉप के लिए इस्तेमाल होने वाले छोटे-मोटे बाजार हो गए हैं। इसके अलावा पुरातत्व-स्तर की वास्तुकला की कमी को भी मुश्किल से बढ़ाया गया है।

मध्य पूर्व में तनाव का भी असर

इंस्टीट्यूट रेस्टोरेंट्स का कहना है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में चल रहे तनाव के कारण भविष्य में संकट और गहरा हो सकता है। यह रूट एनर्जी और पेट्रोकेमिकल के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

यदि यहां असंतुलित लंबे समय तक रहता है, तो सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की औद्योगिक कास्ट बढ़ जाएगी। जिसका असर चिप्स की उपलब्धता और उनके संप्रदाय पर है।

2025 में बना था रिकॉर्ड, अब 8% गिर सकता है बाजार

वर्ष 2025 भारतीय पीसी बाजार के लिए ऐतिहासिक प्रगति थी। आईडीसी के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 1.59 करोड़ यूनिट्स की शिपमेंट हुई, जो साल-दर-साल 10.2% की वृद्धि थी। यह पहली बार था जब प्रारंभिक शिपमेंट 1.5 करोड़ के पार था।

हालाँकि, इस साल जंगलीपन का कारण विनाशकारी अस्तित्व का खतरा है। अनुमान है कि कंजुमर और धार्मिक दोनों खंडों में 7-8% की गिरावट आ सकती है।

सेल और फाइनेंस फाइनेंस का सहारा ले निवेशकों

बहुउद्देश्यीय उद्यमों के बीच टेक्नोलॉजी ब्रांड्स के लिए अब नई राह तलाश रहे हैं। लैपटॉप लैपटॉप के कॉन्फिगरेशन में बदलाव कर रही हैं ताकि बेस प्रॉपर्टी कम रखी जा सके। इसके अलावा ज्यादा से ज्यादा संभावनाओं को आसान किस्तों और प्रमोशनल ऑफर्स के बीच जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

गेमिंग और प्रोफेशनल वॉल्यूम के बजट में थोक होने के कारण खरीदारी जारी रखी जा सकती है, लेकिन बजट में स्टॉक की कमी नहीं होगी। अगर आप कुछ महीनों में लैपटॉप या लैपटॉप की सोच रहे हैं, तो अभी भी ख़रीदारी बेहतर है। क्योंकि युकीट में कमी आने के आधार 2027 से पहले नहीं दिख रहे हैं।

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चीन सहित पड़ोसी देशों के लिए भारत में निवेश आसान:फोरेन जांच के नियम बदले; 10% से कम माइक्रोवेव पर बिना मंजूरी निवेश कर फ़ायदा

केंद्र सरकार ने चीन समेत भारत के साथ सीमा साझा करने वाले यानी पड़ोसी देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (एफडीआई) के ढांचे में बदलाव किया है। पीएम मोदी की मंगलवार (10 मार्च) को हुई इंटरव्यू में इंटरव्यू में प्रेस नोट 3 यानी एफडीआई मंजूरी के फैसले में बदलाव को मंजूरी दे दी गई।

नए निवेश के तहत अब उन निवेश उत्पादों को मंजूरी मिल जाएगी, जिसमें पड़ोसी देश के निवेशकों की हिस्सेदारी 10% से कम हो और कंपनी पर कोई नियंत्रण न हो। इसके साथ ही स्ट्रैटेजिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश के लिए 60 दिन की समय सीमा तय की गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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