ब्रह्मोस मिसाइल से ज्‍यादा घातक, किराना हिल्‍स बन जाएगा मलबा, जब Su-30MKI दागेगा यह ब्रह्मास्‍त्र – india russia defence deal UPAB-1500 Glidxe Bomb


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ब्रह्मोस से ज्‍यादा घातक है यह ब्रह्मास्‍त्र, किराना हिल्‍स बन जाएगा मलबा

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Long-Range Precision Glide Bomb: भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को लगातार अपग्रेड कर कर रहा है. खासकर स्‍ट्राइक कैपेबिलिटी और एयर डिफेंस सिस्‍टम पर एक साथ फोकस किया जा रहा है. इसी क्रम में इंडियन एयरफोर्स ऐसा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है, जिससे कोई भी टार्गेट सेफ नहीं रह सकता है. भारी सुरक्षा वाले अंडरग्राउंड डिफेंस स्‍ट्रक्‍चर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे. बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्‍तान के नूर खान एयरबेस और किराना हिल्‍स के पास अटैक किया था, जिसके बाद इस्‍लामाबाद घुटनों पर आ गया था. बताया जाता है कि किराना हिल्‍स में ही पाकिस्‍तान का परमाणु ठिकाना स्थित है.

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इंडियन एयरफोर्स रूस से घातक ग्‍लाइड बम खरीद सकता है. (फाइल फोटो/PTI)

Long-Range Precision Glide Bomb: भारत अपनी युद्धक क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है. रूस-यूक्रेन और ईरान जंग ने दुनिया की तस्‍वीर बदल दी है. हर देश अपने पास ज्‍यादा से ज्‍यादा विनाशक हथ‍ियार जुटाने की जुगत में जुटे हैं. फाइटर जेट, मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्‍टम, घातक बम, ड्रोन समेत अन्‍य वेपन सिस्‍टम पर फोकस बढ़ गया है. भारत भी इसमें पीछे नहीं है. स्‍वदेशी तकनीक से नेक्‍स्‍ट जेनरेशन फाइटर जेट डेवलप करने के लिए AMCA प्रोजेक्‍ट लॉन्‍च किया गया है. अग्नि और ब्रह्मोस के बाद भारत के डिफेंस साइंटिस्‍ट अन्‍य घातक और उन्‍नत मिसाइल बनाने में जुटे हैं. कुछ मिसाइल प्रोजेक्‍ट को पूरा भी किया जा चुका है, तो कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है. स्‍टील्‍थ ड्रोन सिस्‍टम के क्षेत्र में भारत ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए घातक UCAV ड्रोन डेवलप किया है. यह कॉम्‍बैट ड्रोन रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम को चकमा देकर टार्गेट को ध्‍वस्‍त करने में सक्षम है. इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र लॉन्‍च किया गया है, ताकि एयरस्‍पेस को अभेद्य किला बनाया जा सके. इसके अलावा भारत एक और सेक्‍टर में काम कर रहा है – प्रिसिजन बम. कुछ सप्‍ताह पहले अग्नि सीरीज के तहत बंकर बस्‍टर बम डेवलप करने की बात सामने आई थी. अब भारत प्रिसिजन गाइडेड ग्‍लाइड बम हासिल करने में जुटा है. यह बम कितना घातक है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसका वजन 1500 किलोग्राम है. 1500 किलो बारूद के साथ यदि किसी टार्गेट पर अटैक किया जाएगा तो उसकी स्थिति क्‍या होगी, इसका बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है. इस बम के जरिये पाकिस्‍तान के किराना हिल्‍स जैसे संवेदनशील सैन्‍य ठिकानों को भी धुआं-धुआं किया जा सकता है.

इंडियन एयरफोर्स अपनी लंबी दूरी की सटीक हमलावर क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठा सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत रूसी मूल के UPAB-1500 कैटेगरी के प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम को अपने Su-30MKI लड़ाकू विमान बेड़े के साथ इंटीग्रेट करने पर विचार कर रहा है. इस पहल का उद्देश्य खास तौर पर किलेबंद और हाई-वैल्‍यू वाले टार्गेट्स पर सुरक्षित दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता को बढ़ाना है. UPAB-1500 एक भारी ग्लाइड बम है, जिसका वजन लगभग 1500 किलोग्राम होता है. इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसे लक्ष्य से काफी दूरी पर छोड़ा जा सके, जिससे हमला करने वाला विमान दुश्मन के एडवांस एयर डिफेंस सिस्‍टम की पहुंच से बाहर रह सके. आधुनिक युद्ध परिस्थितियों में जहां मल्‍टीलेयर एयर डिफेंस सिस्टम तेजी से विकसित हो रहे हैं, यह क्षमता बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

UPAB-1500 कैटेगरी के प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम किसी भी टार्गेट को भेदने में सक्षम बताया जाता है. (फाइल फोटो/PTI)

सुरक्षित ठिकाने भी सेफ नहीं

यह बम विशेष रूप से मजबूत और संरक्षित ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. इसमें हाई-एक्‍सप्‍लोसिव वारहेड लगाया जाता है, जो बंकर, किलेबंद सैन्य ठिकाने, एयरबेस इंफ्रास्ट्रक्चर और अहम लॉजिस्टिक केंद्रों को भेदने में सक्षम है. इस तरह के लक्ष्यों पर सटीक और प्रभावी हमले के लिए यह हथियार उपयोगी साबित हो सकता है. गाइडेंस सिस्‍टम की बात करें तो UPAB-1500 में सैटेलाइट नेविगेशन (GLONASS/GPS) और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीक का संयोजन होता है. इससे यह चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उच्च सटीकता (High Precision) बनाए रखता है. इसकी सर्कुलर एरर प्रॉबेबल (CEP) सिंगल-डिजिट मीटर रेंज में बताई जाती है, जो इसे अपनी श्रेणी के अन्य एडवांस ग्लाइड बमों के बराबर खड़ा करती है.

स्‍टैंड ऑफ स्‍टाइक कैपेबिलिटी

ग्‍लाइड बम की सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता है. लक्ष्य की ओर बढ़ते समय यह एयरोडायनामिक लिफ्ट का उपयोग करता है, जिससे यह लंबी दूरी तय कर सकता है. इससे लॉन्च प्लेटफॉर्म यानी Su-30MKI को दुश्मन के खतरनाक हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे उसकी सुरक्षा और मिशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है. एक्‍सपर्ट का मानना है कि अगर इस तरह के ग्लाइड बम को एयरफोर्स में शामिल किया जाता है, तो Su-30MKI की भूमिका केवल मल्टीरोल फाइटर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह एक प्रभावी लंबी दूरी के प्रिसिजन स्ट्राइक प्लेटफॉर्म के रूप में भी उभरेगा. यह गहरे और संवेदनशील लक्ष्यों पर बिना ज्यादा जोखिम के हमले करने में सक्षम होगा.

रणनीति में बड़ा बदलाव

दरअसल, वैश्विक स्तर पर हवाई युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है, जहां वायुसेनाएं ऐसे हथियारों को प्राथमिकता दे रही हैं जो लंबी दूरी, सटीकता और उच्च सुरक्षा का संयोजन प्रदान करते हों. इस संदर्भ में UPAB-1500 जैसे ग्लाइड बम का मूल्यांकन इसी व्यापक रणनीतिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है. यदि इसे शामिल किया जाता है, तो यह भारतीय वायुसेना के मौजूदा प्रिसिजन-गाइडेड हथियारों और क्रूज मिसाइल क्षमताओं को और मजबूती देगा. खासकर टाइम सेंसिटिव और भारी सुरक्षा वाले लक्ष्यों पर दूर से सटीक हमले करने की क्षमता में यह एक नया आयाम जोड़ सकता है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें



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