ट्रंप से इस शर्त पर दोस्ती करने को तैयार किम जोंग उन, चीन में कदम रखने से पहले तानाशाह का ऑफर


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प्योंगयांग में हुए ऐतिहासिक ‘नौवें पार्टी कांग्रेस’ में तानाशाह किम जोंग उन ने एक साथ दो बड़े धमाके किए हैं. एक तरफ उन्होंने अमेरिका के साथ शर्तिया दोस्ती का दरवाजे खोल दिए हैं. दूसरी ओर, किम ने दक्षिण कोरिया को ‘नंबर 1 दुश्मन’ घोषित कर उसे पूरी तरह तबाह करने की डरावनी धमकी दी है. अपनी बेटी जू-ए के साथ एक सैन्य परेड में शामिल हुए किम ने साफ कर दिया है कि वे परमाणु हथियारों को और तेजी से बढ़ाएंगे और अब अमेरिका से बात तभी होगी जब उनकी शर्तें मानी जाएंगी.

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ट्रंप के सामने किम जोंग उन ने रखी शर्त

प्योंगयांग: उत्तर कोरियाई तानाशाह किम जोंग उन ने ट्रंप की मुराद सुन ली है. उन्होंने पहली बार संकेत दिए हैं कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ दोस्ती करने को तौयार हैं लेकिन इसके लिए उनकी शर्तें बेहद कड़ी हैं. किम ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका को उत्तर कोरिया का दोस्त देश बनना है तो ये सब उनकी शर्तों पर होगा, यहां पर ट्रंप की दादागीरी नहीं चल पाएगी. किम ने शर्तिया दोस्ती का हाथ ऐसे समय में बढ़ाया है, जब ट्रंप कुछ महीनों में चीन दौरे पर जाने वाले हैं. नॉर्थ कोरिया के तानाशाह ने अपनी शर्तें गिनाते हुए ट्रंप को तगड़ा ऑफर दिया है.

ट्रंप के सामने किम जोंग उन ने रखी शर्त

दुनिया के सबसे खूंखार तानाशाह में से एक माने जाने वाले किम जोंग उन से दोस्ती के लिए ट्रंप बेचैन हैं और कई बार उनसे मिलने की इच्छा जता चुके हैं. वहीं, हाल ही में प्योंगयांग में हुए ऐतिहासिक ‘नौवें पार्टी कांग्रेस’ के समापन समारोह के दौरान ट्रंप को गुड न्यूज मिली है. किम जोंग उन ने उनकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है लेकिन उनकी एक तगड़ी शर्त भी है. किम का कहना है कि अमेरिका, उत्तर कोरिया को एक ‘परमाणु शक्ति’ के रूप में स्वीकार करता है और अपनी ‘दुश्मनी वाली नीति’ छोड़ता है, तो उन्हें ट्रंप के साथ हाथ मिलाने में कोई ऐतराज नहीं है.

चीन में क्या होने वाला है?

उत्तर कोरिया के तानाशाह का ये बयान ठीक उस समय आया है जब ट्रंप मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में चीन की यात्रा करने वाले हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस यात्रा के दौरान ट्रंप और किम के बीच एक और ‘सुपर समिट’ हो सकती है लेकिन इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट है, किम ने अपने पड़ोसी दक्षिण कोरिया को ‘धोखेबाज’ करार देते हुए बातचीत के सारे दरवाजे बंद कर दिए हैं, जिससे एशिया में तनाव का एक नया मोर्चा खुल गया है.

ट्रंप के दिल में क्या है?

अक्टूबर 2025 में एयरफोर्स वन पर बीबीसी से बात करते हुए ट्रंप ने कहा था, ‘किम के साथ मेरे रिश्ते बेहतरीन रहे हैं और मैं उनसे दोबारा मिलने के लिए 100% तैयार हूं’. ट्रंप ने पहले ही उत्तर कोरिया को ‘एक तरह की परमाणु शक्ति’ मानकर दशकों पुरानी अमेरिकी नीति को हिला दिया है, जो किम के लिए किसी जीत से कम नहीं है. आखिरी बार दोनों 2019 में मिले थे, जब हनोई समिट बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी.

किम जोंग का ‘न्यूक्लियर’ कॉन्फिडेंस

विशेषज्ञों का कहना है कि किम जोंग उन अब पहले से कहीं ज्यादा आत्मविश्वास में हैं. यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लिम उल-चुल के मुताबिक, ‘उत्तर कोरिया अब अमेरिका के परमाणु निशस्त्रीकरण के दबाव में आने वाला नहीं है’. किम ने अपनी फौज से परमाणु हथियारों का जखीरा और तेजी से बढ़ाने को कहा है. उनका संदेश साफ है कि ‘वे ट्रंप से मिलेंगे तो जरूर, लेकिन एक बराबर की ‘परमाणु शक्ति’ बनकर, न कि किसी कमजोर देश की तरह’.

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Utkarsha Srivastava

उत्कर्षा श्रीवास्तव डिजिटल जर्नलिस्ट हैं और जियो-पॉलिटिक्स टॉपिक्स पर लिखती हैं, वो वर्तमान में News18 Hindi के World सेक्शन में कार्यरत हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में 10+ वर्षों का अनुभव है, इस दौरान उन्होंने क…और पढ़ें





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