डोनाल्ड ट्रंप को मरवाना चाहते थे खामेनेई? अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान के मायने क्या, समझिये डर की वजह


अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चौंकाने वाला दावा किया है. उन्होंने कहा, ‘इससे पहले कि वो मुझे खत्म करता, मैंने उसे पहले खत्म कर दिया. उन्होंने दो बार कोशिश की थी.’ ट्रंप का यह बयान कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था. एक सवाल यह उठ रहा है कि क्या आयतुल्लाह खामेनेई सच में डोनाल्ड ट्रंप को मरवाना चाहते थे? क्या ईरान के पास इतनी ताकत है कि वह अमेरिका में घुसकर वहां के राष्ट्रपति को खत्म करवा सके? अमेरिकी राष्ट्रपति का यह डर था, या फिर उन्होंने हमेशा की तरह उन्होंने अपनी शेखी बघारने के लिए यह बात कह दी? चलिये विस्तार से इस पूरे मामले को समझते हैं…

दरअसल डोनाल्ड ट्रंप का इशारा कथित तौर पर उनकी हत्या की पिछली साजिशों की तरफ था. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने 2024 में सामने आई एक खुफिया आकलन का हवाला दिया था, जिसमें ईरान से जुड़ी साजिश की बात कही गई थी. इससे पहले भी ट्रंप आरोप लगा चुके हैं कि ईरान ने 2020 और 2024 के अमेरिकी चुनावों में दखल देने की कोशिश की थी ताकि उन्हें रोका जा सके.

क्या ट्रंप पर सीधा हमला हो सकता है?

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी धरती पर उसी के राष्ट्रपति पर कोई हमला कराना सीधे युद्ध की घोषणा जैसा होगा. ईरान के पिछले रुख को देखकर वह अमेरिका से सीधी कोई जंग तो मोल नहीं लेना चाहता था.

फिर अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा की जिम्मेदारी यूएस सीक्रेट सर्विस के पास होती है, जिसे सेना और खुफिया एजेंसियों का सहयोग मिलता है. वॉशिंगटन डीसी के ऊपर हमेशा ही नो फ्लाई जोन लागू रहता है. राष्ट्रपति जहां भी जाते हैं, वहां भी थोड़े वक्त के लिए नो फ्लाई जोन लागू कर दिए जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि सात समंदर पार बैठे खामेनेई आखिर ट्रंप को मरवाने की कोशिश कैसे कर सकते हैं.

असली खतरा कहां से?

साल 2024 में डोनाल्ड ट्रंप पर दो बार हमले की कोशिश की खबरें आई थीं. इसमें से एक हमला पेनसिल्वेनिया के बटलर शहर में एक रैली के दौरान हुआ था. हमलावर की पहचान 20 वर्षीय थॉमस क्रूक्स के रूप में हुई थी. इस हमलावर के मकसद को लेकर कई पहलुओं की जांच की गई, लेकिन शुरुआती रिपोर्ट्स में इसे ‘लोन वुल्फ’ यानी अकेले हमलावर की कार्रवाई बताया गया था. इसमें ईरान का कोई कनेक्शन सामने नहीं आया था.

उसी साल ट्रंप को हत्या की धमकी देने के आरोप में फरहाद शाकेरी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया. अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया था कि वह ईरानी एलीट फोर्स इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से जुड़ा है. हालांकि ईरान ने इन आरोपों से इनकार किया था.

ट्रंप के बयान के मायने क्या?

ट्रंप का इशारा यहां इसी धमकी की तरफ से था. उन्होंने खामेनेई को ‘इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक’ बताया और कहा कि यह कार्रवाई सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए न्याय है जो उनके मुताबिक खामेनेई की नीतियों से प्रभावित हुए.

हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति दुनिया के सबसे सुरक्षित व्यक्तियों में से एक होते हैं. बहु-स्तरीय सुरक्षा, रीयल-टाइम खुफिया निगरानी, मजबूत परिवहन व्यवस्था और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया किसी भी प्रत्यक्ष हमले को बेहद मुश्किल बना देती है.



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