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- केरल HC ने स्वतंत्र फिजियोथेरेपी प्रैक्टिस, डॉक्टर उपाधि को मंजूरी दी
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अब क्वाली पियानो फिजियोथेरेपिस्ट अपना नाम के आगे ‘डॉक्टर (Dr)’ लिख सकते हैं। साथ ही, बिना किसी रोक-टोक के स्वतंत्र रूप से अभ्यास भी कर सकते हैं। अब किसी भी जनरल फिजीशियन के प्रिस्क्रिप्शन या रेफरल का इंतजार करने की जरूरत नहीं होगी।
असली केरल उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी.जी. अरुण की बेंच ने शुक्रवार 23 जनवरी को अपने क्षेत्र में काम करने के लिए लोगों के पक्ष में निर्णय लिया। बेंच ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपी एंड रिहैबिलिटेंशियल’ (आईएपीएमआर) द्वारा वेल्यू पर सर्वे कर रही थी।
कोर्ट ने उन लॉजिकों को पूरी तरह से खारिज कर दिया जिसमें फिजियोथेरेपिस्टों को केवल ‘टेक्नीशियन’ या मेडिकल असिस्टेंट के रूप में सीमित करने की मांग की गई थी। साथ ही, अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि फिजियोप्लास्टी एक वैज्ञानिक और साक्ष्य-आधारित (साक्ष्य-आधारित) चिकित्सा पद्धति है। इसलिए, इस क्षेत्र के विशेषज्ञ को पूर्ण स्वायत्तता के साथ काम करने का अधिकार है।

नवंबर 2025 में ‘डॉक्टर’ के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी
इससे पहले नवंबर 2025 में इसी कोर्ट ने अपने एक अंतरिम आदेश में फिजियोथेरेपिस्टों द्वारा ‘डॉक्टर’ शब्द के इस्तेमाल पर अस्थायी रोक लगा दी थी। उस ऑर्डर से यूनेस्को के फिजियोप्लास्टी स्टॉक में भारी गिरावट थी। हालाँकि, 23 जनवरी 2026 को इस अंतिम फैसले में उस रोक को पूरी तरह से ख़त्म कर दिया गया।
पहचान और काम के बारे में विवाद पैदा हो गया
यह मामला केरल हाई कोर्ट में पिछले 3 महीने से चल रहा था। इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपी) और इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट (आईएपीएमआर) के बीच फिजियोथेरेपिस्ट की पहचान, अधिकार और काम के पहलू को लेकर विवाद था।
आईएपीएमआर की ओर से इस वैज्ञानिक सिद्धांत को गढ़ा गया था कि फिजियोथेरेपिस्ट ‘डॉक्टर’ शब्द का इस्तेमाल न करें और स्वतंत्र रूप से अभ्यास न करें।
जजमेंट में फिजियोथेरेपिस्टों की तलाश के लिए ‘फर्स्ट-कॉन्टैक्ट’ टीचर प्रोवाइडर के रूप में बताया गया है। वे बिना किसी अन्य हर्बल के स्वतंत्र रूप से इलाज कर सकते हैं।
प्रोफेशनल ने जजमेंट को पहचाना की बताया
‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजियोथेरेपिस्ट’ (आईएपी) के अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजीव झा ने इस आलोचना का स्वागत करते हुए कहा, ‘यह केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह कुमार की गरिमा और पहचान की जीत है।’ ‘अब ‘इलाज के लाखों फिजियोथेरेपिस्ट गर्व के साथ अपने आश्रम दे देते हैं।’
अब आसानी से ऑनलाइन डायरेक्टोरियल फिजियोलॉजिस्ट
इस फैसले का असर सिर्फ काम कर रहे फिजियोथेरेपिस्ट पर ही नहीं, बल्कि पढ़ाई कर रहे छात्रों पर भी है। आईएपी का कहना है कि फिजियोथेरेपिस्ट रोकथाम, इलाज, पुनर्वास उद्योग और नशे की फिल्मों को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। इंडिपेंडेंट रूप से प्रैक्टिस की अनौपचारिक मुलाकात से विद्यार्थियों को भी फायदा होगा। उन्हें डायरेक्ट फ़्लोरिडा एंटरप्राइजेज से आसानी से मिलें और गैरजरूरी सब्सक्रिप्शन कम चाहिए।
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हर साल अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा दिवस एक विशेष थीम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘शिक्षा के सह-निर्माण में युवाओं की शक्ति यानी सह-निर्माण शिक्षा में युवाओं की शक्ति’ है। पढ़ें पूरी खबर…
