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अमेरीका की एक मिनी स्कूल बस में धूंस-थूंस के बच्चे हुए थे। बस को मोदीफाई कर इसमें 22 बच्चों को शामिल किया गया था। जिसे देखकर अंकित की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव (जेजे) कृष्णा गुप्ता भड़क उठे। इसका वीडियो भी वायरल हो रहा है।
जज बोलीं- पिज्जा के बारे में जानकारी दिलचस्प बातें
जज कृष्णा गुप्ता ने कहा- मेरे माता-पिता की अपील है कि बच्चा कैसे स्कूल जा रहा है, स्कूल बस में उसके लिए जगह है या नहीं। उसकी कैपेसिटी क्या है। जब कल कोई दुर्घटना होती है तो हमें पता चलता है। हमारा साथ ये हो गया। थोड़ी सी साख बनानी चाहिए। 100-200 रुपये की इज्जत आपके बच्चों की स्थिति में हो सकती है।

सीबीएसई के नियम, पानी तक बस में हो
- स्कूल के बच्चों के बाहर और अंदर दोनों जगह जगह प्रबंधक का नाम और नंबर लिखा हो।
- बस ड्राइवर के पास ड्राइविंग लाइसेंस हो।
- हर बस में ड्राइवर के साथ एक दुकान भी हो।
- हर स्कूल बस में बच्चों के लिए एक लेडी अटेंडेंट हो।
- स्कूल बस के अंदर पीने का पानी हो।
नियमों का पालन न करने से स्कूल की मान्यता रद्द हो सकती है। भारत सरकार और सीबीएसई ने स्कूलों के खिलाफ जो नियम बनाए हैं, उनमें अगर कोई मानक दर्ज नहीं है तो उस स्कूल पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसके अलावा स्कूल पर भारी बजट लगाया जा सकता है। यदि कोई स्कूल बार-बार फाइनल को रद्द कर देता है, तो स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।
स्कूल के विद्यार्थियों के लिए स्कूल बस सीजे की जा सकती है। ड्राइवर और तैनाती पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। साथ ही स्कूल में भारी मात्रा में सामान का आकलन किया जा सकता है। इसके अलावा स्कूल पर भी कार्रवाई हो सकती है।
अगर किसी स्कूल या एंटरप्राइज मैनेजर या सीबीएसई के इन पदों पर विश्वास नहीं है तो आप केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में पत्र या मेल के माध्यम से शिकायत कर सकते हैं।
ऐसे कई मामले दैनिक आ रहे, जिम्मेदार अधिकारी इग्नोर कर रहे-बचाव
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रमुख अपराजिता गौतम का कहना है कि, नियम तो बहुत आ गए हैं लेकिन उनका पालन नहीं हो पाता। क्योंकि जो भी जिम्मेदार अधिकारी हैं वे इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। ऐसे केसेज पूरे भारत से आते हैं। सुप्रीम कोर्ट तक ने इसपर नियम बनाए हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘नियम यह है कि अगर छोटे बच्चे हैं तो दो सीटों पर 3 बच्चे बैठ सकते हैं। बड़े बच्चे 2 ही प्लांट हैं। लेकिन बार-बार इसका उल्टा ही देखने को मिलता है। जो नियम हैं उन्हें ऐसे ही होमवर्क किया जा रहा है और कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। ये ट्रेफिक वाले की जिम्मेदारी है कि अगर उसके सामने से इस तरह की बात सामने आती है तो बस जा रही है। तो जो भी जिम्मेदार हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए।’
स्टोरी- देव कुमार, दैनिक भास्कर फेलो
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