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अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की ओर से जारी जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में मशहूर लेखक दीपक चोपड़ा और एपस्टीन के बीच सैकड़ों ईमेल और मुलाकातों का खुलासा हुआ है. 2016 से 2019 के बीच दोनों के करीबी संपर्क सामने आए हैं. चोपड़ा ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है, लेकिन फाइलों में निजी बातचीत ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
दीपक चोपड़ा.
एपस्टीन को क्या मैसेज भेजा था?
यही वह दौर था जब 2019 में एपस्टीन को सेक्स ट्रैफिकिंग और नाबालिग लड़कियों के शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. फाइलों में मिले संदेशों से पता चलता है कि दीपक चोपड़ा ने न्यूयॉर्क स्थित एपस्टीन के घर, फ्लोरिडा स्थित संपत्ति और पेरिस अपार्टमेंट में उससे मुलाकात की थी. दोनों के बीच आध्यात्म, स्वास्थ्य, जीवनशैली और आपसी परिचितों को लेकर बातचीत होती थी. कई ईमेल में चोपड़ा ने संदेश के अंत में ‘Love’ या ‘XO’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. एक जगह उन्होंने लिखा, ‘मैं हमारी दोस्ती के लिए गहराई से आभारी हूं.’
क्या कहते हैं दीपक चोपड़ा?
दीपक चोपड़ा भारत से अमेरिका गए थे और पिछले कई दशकों से वहां रह रहे हैं. वह आध्यात्म, मेडिटेशन और वैकल्पिक चिकित्सा पर दर्जनों किताबें लिख चुके हैं और अमेरिकी मीडिया में एक बड़ा नाम माने जाते हैं. ओपरा विनफ्रे जैसे बड़े नामों ने उन्हें अमेरिका में लोकप्रिय बनाया था. हालांकि चोपड़ा ने कहा है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया और जो ईमेल सामने आए हैं, वे उस समय के संदर्भ में लिखे गए थे. उन्होंने यह भी कहा कि वह पीड़ितों के दर्द से दुखी हैं.
फाइलों में और क्या-क्या निकला?
फाइलों में कुछ ऐसे ईमेल भी हैं, जिनमें दोनों महिलाओं को लेकर निजी और आपत्तिजनक टिप्पणियां करते नजर आते हैं. 2017 में चोपड़ा ने एपस्टीन को एक ईमेल में लिखा था कि अगर वह इजरायल आए तो ‘अपनी लड़कियों को भी साथ लाएं.’ एक अन्य कार्यक्रम के लिए भी उन्होंने ‘अपनी लड़कियों के साथ आने’ का जिक्र किया था. हालांकि इन ‘लड़कियों’ की उम्र क्या थी, यह साफ नहीं है. कुछ बातचीत में महिलाओं को लेकर हल्के-फुल्के लेकिन विवादित अंदाज में चर्चा हुई है. एक जगह एपस्टीन ने मजाकिया लहजे में लिखा कि उसने चोपड़ा को ‘अपने शिकार पर नजरें गड़ाते’ देखा. इस पर चोपड़ा ने जवाब दिया, ‘मैं शिकारी नहीं, प्रेमी हूं.’
फाइलों से यह भी पता चलता है कि एपस्टीन ने चोपड़ा के कुछ प्रोजेक्ट्स में आर्थिक मदद की पेशकश की थी. 2017 में चोपड़ा फाउंडेशन को 50 हजार डॉलर की राशि ‘ग्रैटिट्यूड अमेरिका’ नाम की संस्था से मिली, जो एपस्टीन से जुड़ी बताई जाती है. इसके अलावा एक वेलनेस ऐप प्रोजेक्ट के लिए भी एपस्टीन से सलाह और संभावित निवेशकों से संपर्क कराने की बात हुई थी.
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योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें





