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JASSM-ER Missiles: अमेरिकी सेना ने अपने सबसे आधुनिक और गुप्त हथियारों का मुंह ईरान की तरफ मोड़ दिया है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने अपने JASSM-ER (जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज) क्रूज मिसाइलों के भंडार का लगभग पूरा हिस्सा इस युद्ध के लिए रिजर्व कर दिया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला रणनीतिक रूप से बहुत बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इसके लिए अमेरिका ने पैसिफिक क्षेत्र और अपने मुख्य ठिकानों से मिसाइलें हटा ली हैं. जानकारों का कहना है कि अमेरिका अब ईरान के एयर डिफेंस को पूरी तरह पंगु बनाकर उसे दशकों पीछे धकेलने की योजना पर काम कर रहा है. हालांकि इस बड़े कदम ने अमेरिका के दूसरे दुश्मनों के खिलाफ उसकी तैयारियों पर भी चिंता बढ़ा दी है.
JASSM-ER अमेरिका की सबसे भरोसेमंद और घातक मिसाइलों में से एक मानी जाती है. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी मारक क्षमता है जो करीब 600 मील यानी 965 किलोमीटर से भी ज्यादा है. इसका मतलब यह है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान दुश्मन की सीमा में घुसे बिना ही बहुत सुरक्षित दूरी से सटीक हमला कर सकते हैं. (Photo : US Air Force/Department Of War)

इस मिसाइल की स्पीड और इसका रडार से बच निकलने वाला ‘स्टेल्थ’ डिजाइन इसे दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइलों की लिस्ट में शुमार करता है. यह मिसाइल ईरान के उन मजबूत ठिकानों को निशाना बनाने के लिए बनाई गई है जो भारी सुरक्षा और एयर डिफेंस सिस्टम से घिरे हुए हैं. अमेरिका अब तक इस युद्ध में 1,000 से ज्यादा ऐसी मिसाइलें दाग चुका है. (Photo : US Air Force/Department Of War)

इस युद्ध की वजह से अमेरिकी सेना के पास लंबी दूरी की मिसाइलों की भारी कमी होने का खतरा पैदा हो गया है. युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 2,300 JASSM-ER मिसाइलों का स्टॉक था. लेकिन अब हालात ये हैं कि दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए सिर्फ 425 मिसाइलें ही बची रह गई हैं. इनमें से भी कई मिसाइलें तकनीकी खराबी के कारण इस्तेमाल के लायक नहीं हैं. (Photo : US Air Force/Department Of War)
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अगर अमेरिका इसी रफ्तार से मिसाइलें चलाता रहा तो उसके पास चीन जैसे बड़े प्रतिद्वंद्वी से निपटने के लिए पर्याप्त हथियार नहीं बचेंगे. लॉकहीड मार्टिन कंपनी इन मिसाइलों का उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही है. लेकिन खपत इतनी ज्यादा है कि स्टॉक को फिर से भरने में कई साल का वक्त लग सकता है. (Photo : Lockheed Martin)

अमेरिका और इजरायल ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान के एयर डिफेंस का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दिया है. इसी वजह से अब पुराने B-52 बमवर्षक विमानों को भी ईरान के ऊपर उड़ाया जा रहा है. लेकिन हकीकत थोड़ी अलग और चिंताजनक भी है. पिछले कुछ दिनों में ईरान ने अमेरिका के एक F-15E स्ट्राइक फाइटर और एक A-10 अटैक जेट को मार गिराया है. (Photo : Lockheed Martin)

अमेरिका के दो कॉम्बैट सर्च-एंड-रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलाबारी की चपेट में आए हैं. ईरान अब तक 1,600 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 4,000 ड्रोन दाग चुका है. इससे निपटने के लिए अमेरिका को भारी मात्रा में इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है. (Photo : US Air Force/Department Of War)

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अपने भाषण में कहा है कि अगले दो-तीन हफ्तों में वे ईरान को ‘पाषाण काल’ में ले आएंगे. इस बयान के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि अमेरिका अब ईरान के मुख्य तेल टर्मिनलों और आर्थिक ठिकानों पर बड़ा हमला कर सकता है. खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक स्थानों को कब्जे में लेने या तबाह करने की योजना पर काम चल रहा है. अमेरिकी नौसेना और मरीन कोर के जवान लगातार क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहे हैं. (Photo : US Air Force/Department Of War)





