Last Updated:
Extended Range Air Defence System: 21वीं सदी में फाइटर जेट और एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ ही एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम भी बेहद जरूरी हो गया है. ईरान जंग में जिस तरीके से अमेरिकी और इजरायली वायु रक्षा प्रणाली की हवा निकली है, उससे कई देशों की चिंताएं बढ़ गई हैं. हालात को देखते हुए भारत ने मिशन सुदर्शन चक्र प्रोजेक्ट लॉन्च किया है. इसके तहत प्रोजेक्ट कुश पर काम चल रहा है, जो तीन लेयर में सुरक्षा प्रदान करने में सक्षम होगा. प्रोजेक्ट कुश के तहत डेवलप एयर डिफेंस सिस्टम 400 किलोमीटर तक के एरियल थ्रेट को ट्रैक और इंटरसेप्ट करने में कैपेबल होगा.
प्रोजेक्ट कुश के तहत भारत तीन लेयर वाला एयर डिफेंस सिस्टम डेवलप कर रहा है जो S-400 जैसे सिस्टम को टक्कर देगा. (फाइल फोटो/Reuters)
Extended Range Air Defence System: रूस-यूक्रेन, वेनेजुएला अटैक और अब ईरान में जारी युद्ध ने एक बात साबित कर दी है कि अब जिसकी लाठी उसकी भैंस वाला युग आ गया है. शक्तिशाली देश जब चाहें कमजोर देशों पर हमला बोलकर उन्हें तबाह और बर्बाद कर सकते हैं. इसके लिए आर्मी यानी ग्राउंड ट्रुप्स की जरूरत नहीं है. फाइटर जेट्स, एयरक्राफ्ट कैरियर, मिसाइल, ड्रोन आदि का इस्तेमाल कर टार्गेट देश पर भीषण हमला बोलकर वहां तबाही लाई जा सकती है. ईरान वॉर इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है. ऐसे में किसी भी देश के लिए मजबूत और एडवांस एयर डिफेंस का होना जरूरी हो गया है. भारत भी इस अर्जेंसी को समझता है, इसीलिए रूसे S-400 की अतिरिक्त यूनिट खरीदने की योजना बनाई जा रही है. बता दें कि भारत ने मॉस्को से पहले ही S-400 एयर डिफेंस सिस्टम के 5 स्क्वाड्रन खरीदने का करार कर चुका है. तीन स्क्वाड्रन की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि चौथी यूनिट इस साल के अंत तक भारत को मिल जाएगी. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 ने अपनी अद्भुत ताकत से दुनिया को रूबरू कराया था. इसे देखते हुए भारत अब S-400 की 5 अतिरिक्त यूनिट खरीदने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. वह भी ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में ईरान ने अमेरिकी एंटी बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम THAAD और इजरायल के आयरन डोम का दम निकल दिया है. इन सबको देखते हुए भारत स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली प्रोजेक्ट कुश पर भी तेजी से काम कर रहा है. प्रोजेक्ट कुश के तहत तीन लेयर में एयरस्पेस की सुरक्षा की जाएगी और अधिकतम 400 किलोमीटर तक के किसी भी तरह के एरियल थ्रेट को आसमान में ही तबाह किया जा सकेगा. बता दें कि S-400 का रेंज भी 400 किलोमीटर है.
भारत की स्वदेशी लंबी दूरी की वायु रक्षा क्षमता को नई गति देते हुए ‘प्रोजेक्ट कुश’ (एक्सटेंडेड रेंज एयर डिफेंस सिस्टम – ERADS) निर्णायक चरण में पहुंच गया है. भारतीय वायु सेना द्वारा 5 स्क्वाड्रन की खरीद को मंजूरी दिए जाने के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने विकास से आगे बढ़कर परीक्षण और शुरुआती उत्पादन के चरण में प्रवेश कर लिया है. यह कदम भारत की मल्टीलेयर और पूरी तरह स्वदेशी वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन कर रहा है. फरवरी और मार्च 2026 के दौरान DRDO ने M1 इंटरसेप्टर के शुरुआती ट्रायल के सफल होने की पुष्टि की थी. इन परीक्षणों में खासतौर पर डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर तकनीक को परखा गया, जो मिसाइल को अंतिम चरण में भी पर्याप्त ऊर्जा बनाए रखने में सक्षम बनाती है. लगभग 150 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाले M1 इंटरसेप्टर को अब एकीकृत उड़ान परीक्षण (Integrated Flight Trial) और उपयोगकर्ता मूल्यांकन यानी यूजर इवैल्युएशन के अगले चरण में ले जाया जा रहा है, जिसकी शुरुआत 2026 के अंत तक होने की उम्मीद है.
तीन लेयर में सुरक्षा
परियोजना की खास बात यह है कि परीक्षण और उत्पादन कार्य समानांतर रूप से आगे बढ़ रहे हैं. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने पहले बैच के इंटरसेप्टर और संबंधित ग्राउंड सिस्टम का निर्माण शुरू कर दिया है. इससे न केवल परियोजना की तात्कालिकता का संकेत मिलता है, बल्कि इसके डिजाइन और तकनीकी ढांचे पर भरोसा भी झलकता है. प्रोजेक्ट कुश को थ्री लेयर इंटरसेप्टर सिस्टम के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से निपटने में सक्षम होगी. इसका पहला स्तर M1 है, जो लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन जैसे लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. दूसरा स्तर M2 इंटरसेप्टर है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 250 किलोमीटर तक होगी. इसे स्टील्थ फाइटर जेट और हाई-स्पीड वाले टार्गेट्स के खिलाफ प्रभावी बनाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. M2 के परीक्षण 2027 तक शुरू होने की संभावना है. तीसरे और सबसे बाहरी स्तर पर M3 इंटरसेप्टर होगा, जिसकी मारक क्षमता 350 से 400 किलोमीटर या उससे अधिक तक हो सकती है. यह सिस्टम उच्च मूल्य वाले हवाई प्लेटफॉर्म जैसे AWACS, एयर रिफ्यूलिंग टैंकर और बमवर्षक विमानों को निशाना बनाने में सक्षम होगा. M3 के विकासात्मक परीक्षण 2028 के आसपास शुरू होने की उम्मीद है.
प्रोजेक्ट कुश के तहत डेवलप सिस्टम अमेरिकी THAAD और आयरन डोम से कहीं बेहतर होने वाला है. (फाइल फोटो/Reuters)
एडवांस रडार सिस्टम
प्रोजेक्ट कुश का ऑपरेशनल स्ट्रक्चर पूरी तरह नेटवर्क सेंट्रिक और मॉड्यूलर है. इसमें मल्टी-फंक्शन कंट्रोल रडार (MFCR) प्रमुख भूमिका निभाता है, जो लक्ष्य की पहचान और फायर कंट्रोल का काम करता है. इसके साथ लो-लेवल रडार (LLR) जैसे निगरानी तंत्र जुड़े होते हैं, जो लंबी दूरी तक खतरों की पहचान सुनिश्चित करते हैं. इन सभी घटकों को कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (CCC) के माध्यम से जोड़ा जाता है, जो इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से भी इंटीग्रेटेड रहता है. इससे रियल-टाइम डेटा शेयरिंग और समन्वित कार्रवाई संभव हो पाती है. इसके अलावा मोबाइल लॉन्च यूनिट्स (MLU) इस सिस्टम की रीढ़ मानी जा रही हैं, जो इसे गतिशीलता, लचीलापन और तेजी से तैनाती की क्षमता प्रदान करती हैं. बैटल मैनेजमेंट रडार (BMR) जैसे उन्नत घटक जटिल परिस्थितियों में कई लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक और एंगेज करने में मदद करते हैं. रणनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो प्रोजेक्ट कुश का उद्देश्य मौजूदा S-400 जैसे इंपोर्टेड सिस्टम का पूरक बनना है और भविष्य में उनकी जगह लेने की क्षमता विकसित करना है. स्वदेशी प्रणाली होने के कारण इसमें सॉफ्टवेयर, अपग्रेड और इंटीग्रेशन पर भारत का पूरा नियंत्रण रहेगा. इससे भविष्य की जरूरतों के अनुसार इसमें तेजी से बदलाव और सुधार संभव होंगे.
मॉडर्न चैलेंज का मुकाबला
बढ़ते ड्रोन हमलों, लो-ऑब्जर्वेबल (स्टील्थ) प्लेटफॉर्म और सैचुरेशन अटैक जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रोजेक्ट कुश को डिजाइन किया गया है. इसकी मल्टीलेयर इंटरसेप्टर प्रणाली और उन्नत रडार क्षमताएं इसे एक मजबूत और लचीला वायु रक्षा कवच बनाती हैं. पांच स्क्वाड्रन की मंजूरी के साथ प्रोजेक्ट कुशा अब भारत की रक्षा रणनीति का एक केंद्रीय स्तंभ बनता नजर आ रहा है, जो देश को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से सक्षम वायु रक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
About the Author

बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें





