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Israel-Iran War News: ईरान पर दोहरी मार पड़ी है. अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया है. इस अटैक में खामेनेई की मौत हो चुकी है. ईरान के अन्य टॉप लीडर भी मारे जा चुके हैं. अमेरिकी अटैक से ईरान धुआं-धुआं हो गया है मगर अमेरिका का मुख्य मकसद अब भी अधूरा है. जी हां, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मकसद रिजीम चेंज है जो अब तक ईरान में नहीं हो पाया है. पहले ट्रंप ने कहा था कि युद्ध चार दिनों तक चलेगा, मगर अब वह चार हफ्तों की बात कर रहे हैं.
अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया.
Iran-Israel War News: ईरान में अमेरिका ने कत्लेआम मचाया. इजरायल के साथ मिलकर ईरान को धुआं-धुआं किया. ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई को मौत के घाट उतारा. मिसाइल-ड्रोन की बरसात कर अमेरिका ने ईरान के टॉप लीडरशिप को ही खत्म कर दिया. बावजूद इसके अमेरिका का मकसद अभी पूरा नहीं हुआ है. ईरान में अमेरिका की चाहत अब भी अधूरी है. डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा था कि चार दिन में ही वह ईरान में अपने मकसद को पा लेंगे, मगर ऐसा होता नहीं दिख रहा है. अमेरिका-इजरायल के अटैक का ईरान ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया है. ईरान ने भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरानी हमलों में 3 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी एयरबेस को भी नुकसान हुआ है. ऐसे में अब सवाल है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप की वह कौन सी हसरत अधूरी है, आखिर ईरान से कैसे अब भी डोनाल्ड ट्रंप को खुशखबरी नहीं मिली है.
डोनाल्ड ट्रंप का असल मकसद क्या?
अमेरिका के इस मकसद के पीछे एक और मकसद छिपा था. वह यह कि ईरान कभी न्यूक्लियर पावर वाला देश न बने. भले ही घोषित तौर पर ईरान ने कभी नहीं कहा कि वह न्यूक्लियर हथियार बना रहा है. मगर यह भी हकीकत है कि ईरान पर्दे के पीछे न्यूक्लियर वाला खेल कर रहा था. अमेरिका को इसकी भनक थी. यही कारण है कि अमेरिका ईरान के पीछे हाथ धोकर पड़ गया था. क्योंकि खामेनेई की सरकार अमेरिका की बात मानने को तैयार नहीं थी. इसी के चलते अमेरिका ने ईरान में रिजीम चेंज की ठानी थी. ईरान भी अमेरिका के सामने नहीं झुका. ईरान भी अंजाम की परवाह किए बगैर अमेरिका को मुंहतोड़ जवाब देता रहा. आखिरकार अमेरिका ने पूरी प्लानिंग के साथ ईरान पर अटैक कर दिया.
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है.
अमेरिका की कौन सी हसरत अब भी अधूरी?
अब सवाल है कि अमेरिका ने अपने कट्टर दुश्मन खामेनेई को तो मार दिया. फिर कौन सी हसरत अधूरी रह गई? दरअसल, खामेनेई के मारने से भी बड़ा मकसद है सत्ता परिवर्तन. अब तक ईरान टूटा नहीं है. ईरान लगातार अमेरिका को अपने तरीके से जवाब दे रहा है. वह मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है. ईरान ने खामेनेई की मौत का बदला लेने की कसम खा ली है. ईरान की सत्ता अब तक खामेनेई समर्थक ही है. डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि ईरान संग जंग महज चार दिनों तक चलेगी. मगर अब उनका कहना है कि चार हफ्ते लग जाएंगे. इसका मतलब है कि अमेरिका की सोच से आगे निकलकर ईरान पलटवार कर रहा है. ऐसे में अब भी ईरान से अमेरिका के लिए बुरी ही खबर है.
अमेरिका के लिए बुरी खबर कैसे?
यहां एक बात और ध्यान देने वाली है. अमेरिका जिस तरह से ईरान के बारे में सोच रहा था, वैसा कुछ होता नहीं दिख रहा है. खामेनेई की मौत के बाद रिजीम चेंज को लेकर ईरान में प्रदर्शन अब तक नहीं दिखे हैं. ईरान में सड़कों पर लोग नहीं उतरे हैं. ईरान पर अटैक के बाद यहां तकि अमेरिका की ही निंदा हो रही है. कुछ लोगों ने भले ही खामेनेई की मौत का ईरान में जश्न मनाया है, मगर व्यापक तौर पर खामेनेई की सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन नहीं हुआ है. ऐसे में रिजीम चेंज का ट्रंप का जो सपना है, उसे झटका लगता दिख रहा है. अमेरिका ने खामेनेई के जिंदा रहते ही सत्ता के खिलाफ आंदोलन को हवा दी थी. मगर अभी ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है. इसलिए अभी ईरान और इजरायल-अमरेिक जंग में आगे क्या होगा, कुछ भी निश्चित नहीं लग रहा.
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Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें





